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अलीगढ़ : 563 ग्राम पंचायतों में नहीं है पंचायत भवन
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आशीष श्रीवास्तव
कैसे चले प्रधान का सदन। कारण है पंचायत भवनों का अभाव। जिले की 870 ग्राम पंचायतों में से 563 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन ही नहीं हैं। शेष 307 पंचायतों में भवन हैं भी तो जर्जर या मानक से काफी छोटे। इसके चलते यहां सदन की बैठक नहीं हो पा रही हैं। इसका सीधा असर पंचायती राज व्यवस्था पर पड़ रहा है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है ग्राम पंचायत
लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत मानी जाती है। लोकसभा एवं विधानसभा की तर्ज पर ग्राम पंचायतों में प्रधान मुखिया होता है और वार्डवार ग्राम पंचायत सदस्य होते हैं। यह सभी मिलकर ग्राम पंचायत में स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास, नियोजन से लेकर अन्य काम कराते हैं। संसद की तरह प्रस्ताव रखे जाते हैं, उन पर बहस होती है और बहुमत से प्रस्ताव पारित कर काम कराये जाते हैं।
सरकारी स्कूल या घर पर ही बैठक को मजबूर प्रधान
अलीगढ़। पंचायत घर न होने की समस्या के चलते प्रधान सरकारी स्कूल, कार्यालय अथवा किसी अन्य सार्वजनिक स्थल पर बैठकें करने पर मजबूर होते हैं। कई बार घर बैठकर ही प्रस्ताव तैयार कराये जाते हैं और उनका क्रियान्वयन शुरू करा दिया जाता है। इससे प्रधानों को तमाम आरोप प्रत्यारोपों का सामना करना पड़ता है।
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प्रमुख सचिव के निर्देशों के बाद बदलाव की आस
अलीगढ़। हाल ही में प्रमुख सचिव पंचायती राज ने आदेश जारी कर व्यवस्था में बदलाव की आस जगा दी है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव कर सीसी रोड व इंटरलाकिंग के बजाय पहली प्राथमिकता पर सभी पंचायतों में पंचायत घर, सामुदायिक शौचालय व सचिवालय बनवाने के आदेश जारी किए हैं। प्रधानों को ग्राम निधि के पैसे से निर्माण कराने के निर्देश दिये गये हैं।
प्रमुख सचिव ने सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत घर बनवाने के आदेश दिये हैं। इसके लिये ग्राम पंचायतों को प्रस्ताव तैयार कराने को कहा गया है।
पारुल सिसौदिया, जिला पंचायती राज अधिकारी
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कैसे चले प्रधान का सदन। कारण है पंचायत भवनों का अभाव। जिले की 870 ग्राम पंचायतों में से 563 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन ही नहीं हैं। शेष 307 पंचायतों में भवन हैं भी तो जर्जर या मानक से काफी छोटे। इसके चलते यहां सदन की बैठक नहीं हो पा रही हैं। इसका सीधा असर पंचायती राज व्यवस्था पर पड़ रहा है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है ग्राम पंचायत
लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत मानी जाती है। लोकसभा एवं विधानसभा की तर्ज पर ग्राम पंचायतों में प्रधान मुखिया होता है और वार्डवार ग्राम पंचायत सदस्य होते हैं। यह सभी मिलकर ग्राम पंचायत में स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास, नियोजन से लेकर अन्य काम कराते हैं। संसद की तरह प्रस्ताव रखे जाते हैं, उन पर बहस होती है और बहुमत से प्रस्ताव पारित कर काम कराये जाते हैं।
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सरकारी स्कूल या घर पर ही बैठक को मजबूर प्रधान
अलीगढ़। पंचायत घर न होने की समस्या के चलते प्रधान सरकारी स्कूल, कार्यालय अथवा किसी अन्य सार्वजनिक स्थल पर बैठकें करने पर मजबूर होते हैं। कई बार घर बैठकर ही प्रस्ताव तैयार कराये जाते हैं और उनका क्रियान्वयन शुरू करा दिया जाता है। इससे प्रधानों को तमाम आरोप प्रत्यारोपों का सामना करना पड़ता है।
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प्रमुख सचिव के निर्देशों के बाद बदलाव की आस
अलीगढ़। हाल ही में प्रमुख सचिव पंचायती राज ने आदेश जारी कर व्यवस्था में बदलाव की आस जगा दी है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव कर सीसी रोड व इंटरलाकिंग के बजाय पहली प्राथमिकता पर सभी पंचायतों में पंचायत घर, सामुदायिक शौचालय व सचिवालय बनवाने के आदेश जारी किए हैं। प्रधानों को ग्राम निधि के पैसे से निर्माण कराने के निर्देश दिये गये हैं।
प्रमुख सचिव ने सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत घर बनवाने के आदेश दिये हैं। इसके लिये ग्राम पंचायतों को प्रस्ताव तैयार कराने को कहा गया है।
पारुल सिसौदिया, जिला पंचायती राज अधिकारी