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अलीगढ़ : किराये के भवनों में चल रहे 500 आंगनबाड़ी केंद्र

Sun, 10 Oct 2021 01:24 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 01:24 AM IST
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Aligarh: 500 Anganwadi centers running in rented buildings
सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी की तर्ज पर संचालित करने की बात कर रही है, लेकिन हकीकत आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा खराब है। जिले में 500 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं तो दो दर्जन से अधिक केंद्रों के भवन जर्जर हैं। हालांकि, कायाकल्प योजना में 150 आंगनबाड़ी केंद्र मॉडल के रूप में तब्दील हो चुके हैं।
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जिले में 3039 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें पांच वर्ष तक के करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमेें से आधे से ज्यादा केंद्रों की हालत खराब है। 500 आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी भवन के अभाव में किराये के भवनों में चल रहे हैं। शहरी क्षेत्र के कई भवनों की हालत इतनी खस्ता है कि वहां पांच वर्ष तक के छोटे बच्चों को संभालने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पसीने छूट रहे हैं।
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कमोबेश यही हाल ग्रामीण इलाकों के जर्जर भवनों में चल रहे दो दर्जन केंद्रों का है। हालांकि 150 आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प योजना में कायाकल्प हो चुका है। मॉडल के रूप में विकसित हुए इन केंद्रों में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। वाल पेंटिंग के अलावा यहां फर्नीचर से लेकर अन्य सुविधाएं मौजूद हैं।
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ग्राम पंचायतों के बजाय अन्य स्थानों पर रहती हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के नियमों के मुताबिक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को उसी गांव की निवासी होना चाहिए, जिस ग्राम पंचायत में उनका आंगनबाड़ी केंद्र है। लेकिन इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। हाल ही में भर्ती हुई 400 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छोड़कर शेष में से 50 से 60 फीसदी कार्यकर्ता संबंधित ग्राम पंचायतों से अलग निवास करती हैं। कई शादी हो जाने, या फिर पति की नौकरी के चलते दूसरे स्थानों पर निवास करती हैं। इससे केंद्रों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
लोधा में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की तैयारी
बीडीओ लोधा व जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयस कुमार के प्रयासों से लोधा की ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त एवं 15वें वित्त आयोग की धनराशि से आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण होगा। अब तक नए केंद्रों का निर्माण व जर्जर भवन तोड़कर नवनिर्माण का काम मात्र शासन के बजट से ही होता था। इस नई पहल से आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा सुधरने के आसार हैं।

- शहरी परियोजना में सरकारी भवनों एवं स्थान के अभाव में 500 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। कुछ केंद्रों के भवन जर्जर हैं। इनके पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन के पास गया हुआ है। जहां तक कार्यकर्ताओं के संबंधित ग्राम पंचायतों में निवास का सवाल है तो हाल ही में भर्ती हुई कार्यकर्ता तो उसी गांव की निवासी हैं। कुछ गांव में तो नहीं लेकिन संबंधित न्याय पंचायत में निवास करती हैं। इस व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
- श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास विभाग
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