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अलीगढ़ : जिले में 17.53 लाख बच्चों को दी जाएगी एल्बेंडाजोल की खुराक
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जनपद के 1 से 19 आयु वर्ग के 17.53 लाख बच्चों को 11 एवं 12 मार्च को एल्बेंडाजोल की खुराक दी जाएगी। इस अभियान में बच्चे छूट गए तो 14 से 19 मार्च के बीच उनको खुराक दी जाएगी। एल्बेंडाजोल खिलाने का उद्देश्य बच्चों को बीमारी एवं कमजोर होने से बचाना है।
गंदगी, दूषित जल एवं अशुद्ध खाद्य पदार्थों आदि के माध्यम से बच्चों के आंतों में कृमि (कीड़े) पहुंच जाते हैं। पेट में कीड़े होने से बुखार, शरीर का पीला पड़ जाना, पेट दर्द, चक्कर आना, खाना अच्छा न लगना एवं दस्त आदि होते हैं। इसके लिए सामान्यत: जिम्मेदार गोल कृमि एवं फीता कृमि जिम्मेदार होते हैं। बहुत सारे बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं और उनका स्वाभाविक विकास अवरुद्ध हो जाता है। डीईआईसी मैनेजर मो. मोनाजिर हुसैन ने बताया कि गोल कृमि एवं फीता कृमि को मारकर विभिन्न तरह की बीमारियों से बचाने के लिए 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी जाती है। उन्होंने बताया कि जनपद में 17 लाख 53 हजार 348 बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्रों आदि से मदद ली जा रही है। 11 एवं 12 मार्च के अभियान के दौरान जो बच्चे छूट जाएंगे, उनको 14 से 19 मार्च के बीच खुराक दी जाएगी। स्कूल में स्वास्थ्यकर्मियों के सामने बच्चों को खुराक देनी है। घरों में आशा या एएनएम के सामने खुराक दी जाएगी। अभिभावक नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर भी बच्चों को खुराक दिला सकते हैं। इसके लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है।
स्वच्छता का रखें ध्यान
दूषित जल, अशुद्ध खाद्य पदार्थ एवं गंदगी की वजह से गोल कृमि या फीता कृमि बच्चों की आंतों तक पहुंचता है। बचाव के लिए बच्चों में स्वच्छता की आदत डलवाना जरूरी है। अभिभावकों का दायित्व बनता है कि वह बच्चों को साबुन से हाथ धोकर खाना खाने के लिए प्रेरित करें। मोनाजिर हुसैन ने बताया कि अभिभावकों को स्वच्छता की भी जानकारी दी जाएगी ताकि बच्चे बीमार न हो। उन्होंने कहा कि 1 से 19 वर्ष के वैसे बच्चे भी खुराक लेंगे, जिनको किसी तरह की दिक्कत नहीं है।
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उम्र के हिसाब से खुराक
- 1 से 2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली पीसकर
- 2 से 3 वर्ष के बच्चों को एक गोली पीसकर
- 3 से 19 वर्ष के बच्चों को एक गोली चबाकर खानी है
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गंदगी, दूषित जल एवं अशुद्ध खाद्य पदार्थों आदि के माध्यम से बच्चों के आंतों में कृमि (कीड़े) पहुंच जाते हैं। पेट में कीड़े होने से बुखार, शरीर का पीला पड़ जाना, पेट दर्द, चक्कर आना, खाना अच्छा न लगना एवं दस्त आदि होते हैं। इसके लिए सामान्यत: जिम्मेदार गोल कृमि एवं फीता कृमि जिम्मेदार होते हैं। बहुत सारे बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं और उनका स्वाभाविक विकास अवरुद्ध हो जाता है। डीईआईसी मैनेजर मो. मोनाजिर हुसैन ने बताया कि गोल कृमि एवं फीता कृमि को मारकर विभिन्न तरह की बीमारियों से बचाने के लिए 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी जाती है। उन्होंने बताया कि जनपद में 17 लाख 53 हजार 348 बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्रों आदि से मदद ली जा रही है। 11 एवं 12 मार्च के अभियान के दौरान जो बच्चे छूट जाएंगे, उनको 14 से 19 मार्च के बीच खुराक दी जाएगी। स्कूल में स्वास्थ्यकर्मियों के सामने बच्चों को खुराक देनी है। घरों में आशा या एएनएम के सामने खुराक दी जाएगी। अभिभावक नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर भी बच्चों को खुराक दिला सकते हैं। इसके लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है।
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स्वच्छता का रखें ध्यान
दूषित जल, अशुद्ध खाद्य पदार्थ एवं गंदगी की वजह से गोल कृमि या फीता कृमि बच्चों की आंतों तक पहुंचता है। बचाव के लिए बच्चों में स्वच्छता की आदत डलवाना जरूरी है। अभिभावकों का दायित्व बनता है कि वह बच्चों को साबुन से हाथ धोकर खाना खाने के लिए प्रेरित करें। मोनाजिर हुसैन ने बताया कि अभिभावकों को स्वच्छता की भी जानकारी दी जाएगी ताकि बच्चे बीमार न हो। उन्होंने कहा कि 1 से 19 वर्ष के वैसे बच्चे भी खुराक लेंगे, जिनको किसी तरह की दिक्कत नहीं है।
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उम्र के हिसाब से खुराक
- 1 से 2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली पीसकर
- 2 से 3 वर्ष के बच्चों को एक गोली पीसकर
- 3 से 19 वर्ष के बच्चों को एक गोली चबाकर खानी है