Aligarh Railway Station: एयरपोर्ट अथॉरिटी के मैनेजर की ट्रेन से गिरकर मौत, परिजनों ने लगाया यह आरोप
महाबोधी एक्सप्रेस में वितेंद्र कुमार खिड़की पर आकर खड़े हो गए। इसी बीच पीछे से किसी यात्री का धक्का लगने पर वह धीमी गति से रुकने जा रही ट्रेन से सिर के बल प्लेटफाॅर्म पर आ गिरे। चिकित्सक ने वहीं जमीन पर पड़े-पड़े ही वितेंद्र को देखकर मृत घोषित कर दिया।
विस्तार
दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीनियर फाइनेंस मैनेजर वितेंद्र कुमार (50) की 28 जून की दोपहर को अलीगढ़ स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय गिरने से मौत हो गई। वह महाबोधी एक्सप्रेस से अलीगढ़ आ रहे थे। स्टेशन पर ट्रेन के रुकते समय उतरने के लिए हुई धक्का-मुक्की में वह चलती ट्रेन से सिर के बल प्लेटफाॅर्म पर आ गिरे। सिर में आई गंभीर चोट से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिवार ने रेलवे स्टाफ पर समय से उपचार न दिला पाने का आरोप लगाया है।
मूल रूप से दादों के गांव पेतरा व हाल में महुआ खेड़ा के नगला डालचंद्र निवासी एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हरी सिंह के इकलौते बेटे वितेंद्र कुमार दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी के वित्त विभाग में सीनियर मैनेजर थे। वह प्रत्येक सप्ताह रविवार की छुट्टी होने के कारण शनिवार को अपने पिता से मिलने अलीगढ़ आते थे। इस क्रम में 28 जून को वे महाबोधी एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर अलीगढ़ आ रहे थे।
जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक संदीप तोमर ने बताया कि शाम करीब 4 बजे ट्रेन स्टेशन के प्लेटफाॅर्म नंबर 2 पर रुकने के लिए धीमी हुई। तभी वह खिड़की पर आकर खड़े हो गए। इसी बीच पीछे से किसी यात्री का धक्का लगने पर वह धीमी गति से रुकने जा रही ट्रेन से सिर के बल प्लेटफाॅर्म पर आ गिरे। जीआरपी व आरपीएफ टीम वहां आ गई। आनन-फानन रेलवे अस्पताल से चिकित्सक व एंबुलेंस को बुलाया गया, मगर चिकित्सक ने वहीं जमीन पर पड़े-पड़े ही वितेंद्र को देखकर मृत घोषित कर दिया। इधर, जेब में मिले दस्तावेजों से पहचान के आधार पर खबर मिलते ही घर से पिता पहुंच गए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव को देर शाम घर ले जाया गया।
ट्रेन से उतरते समय गिरे यात्री के घायल होने पर उपचार के लिए चिकित्सक और एंबुलेंस को तत्काल मौके पर बुलाया गया था, लेकिन यात्री को उपचार के लिए भिजवाया जाता, उससे पहले ही उसने दम तोड़ दिया। किसी तरह की देरी नहीं हुई।-अमित कुमार सिंह, पोस्ट कमांडर आरपीएफ
पिता ने लगाया इलाज न मिल पाने का आरोप
वितेंद्र के पिता हरी सिंह ने जीआरपी-आरपीएफ पर घायल बेटे को उपचार न दिला पाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जब जीआरपी से खबर मिली तो वह कुछ ही देर में स्टेशन पहुंच गए। वहां लोगों से बातचीत में पता चला कि इस घटनाक्रम के बाद काफी देर में तो रेलवे अस्पताल से चिकित्सक को बुलाया जा सका। बाद में चिकित्सक भी उन्हें कहीं ले जाने के बजाय वहीं उपचार देने का प्रयास करते रहे। अगर अस्पताल ले जाते तो शायद बेटे को बचाया जा सकता था।
जीआरपी-आरपीएफ में दिखा विरोधाभास
इस दौरान जीआरपी और आरपीएफ में प्लेटफाॅर्म से शव हटाने को लेकर विरोधाभास की स्थिति देखने को मिली। मृत्यु के बाद भी शव काफी देर तक प्लेटफाॅर्म पर रखा रहा। इस पर भी परिवार ने नाराजगी जताई।
खबर पर दिल्ली से बेटी-बेटा, पत्नी भी आए
वितेंद्र कुमार अपनी पत्नी दीपशिखा, इंजीनियरिंग कर रहे बेटे यश व दसवीं की पढ़ाई कर रही बेटी जयंती को लेकर दिल्ली में रहते थे। उन्होंने दिल्ली के द्वारिका इलाके में मकान ले रखा था। वह हंसी-खुशी पिता से मिलने अलीगढ़ के लिए निकले थे, मगर शाम को उनकी मृत्यु की खबर परिवार को मिली। दिल्ली से परिजन भी अलीगढ़ पहुंच गए थे। परिवार का हाल बेहाल था। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार वितेंद्र की मां का कोराना काल में देहांत हो गया था। तब से पिता यहां अकेले रहते हैं।