Aligarh News: आधा दूध, आधा पानी, प्रयोगशाला ने 67 नमूनों की बताई यह कहानी
लगातार गूंजती शिकायतों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध के यह सैंपल 31 जनवरी 2025 तक जिले में अलग-अलग स्थानों से लिए थे । शहर में 266 ठिकानों पर जांच की गई। इनमें मुहल्ले स्तर पर संचालित होने वाली डेयरियां भी थीं। फूड इंस्पेक्टरों ने 120 नमूने लेकर जांच के लिए आगरा की प्रयोगशाला में भेजे थे। आठ फरवरी को इन नमूनों की जांच प्राप्त हुई है। इनमें सर्वाधिक दूध के 67 नमूने फेल आए हैं।
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अलीगढ़ महानगर में सप्लाई किए जा रहे दूध में भारी मिलावट की जा रही है। प्रयोगशाला से जारी दूध के 67 नमूनों की रिपोर्ट में साफ हो गया है कि जितना दूध था लगभग उतना ही पानी मिलाया गया है। पहले दूध से फैट निकाला गया और फिर मिल्क पाउडर मिलाकर दूध को गाढ़ा करने की कोशिश हुई। यह सभी सैंपल गांव से आने वाले दूध से लिए गए थे। यह दूध कालोनी और मुहल्लों में सप्लाई हो रहा था।
अलीगढ़ में मिलावटी दूध की बिक्री को लेकर आए दिन शिकायतें गूंजती रहती हैं। शासन तक भी यह मामले पहुंच चुके हैं। लगातार गूंजती शिकायतों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध के यह सैंपल 31 जनवरी 2025 तक जिले में अलग-अलग स्थानों से लिए थे । शहर में 266 ठिकानों पर जांच की गई। इनमें मुहल्ले स्तर पर संचालित होने वाली डेयरियां भी थीं। फूड इंस्पेक्टरों ने 120 नमूने लेकर जांच के लिए आगरा की प्रयोगशाला में भेजे थे। आठ फरवरी को इन नमूनों की जांच प्राप्त हुई है। इनमें सर्वाधिक दूध के 67 नमूने फेल आए हैं। दूध में पानी के साथ मिल्क पाउडर पाया गया है। दूध में कई जगह तो आधा पानी मिलाया गया है।
यह है जिले में दूध की मांग और आपूर्ति की स्थिति
गत 13 वर्षों में पशुओं की संख्या घटी है और जिले में दूध की मांग बढ़ी है। जाहिर है मिलावटी दूध की सप्लाई से मांग और आपूर्ति का अंतर पाटा जा रहा है।
इस तरह कम हुए पशु
- वर्ष 2012 में जिले में भैंस की संख्या 11.30 लाख थी। जो वर्तमान में 9.70 लाख है। इसमें 3.90 लाख दुधारू भैंस हैं।
- वर्ष 2012 में गायों की संख्या 2.02 लाख थी। वर्तमान में गायों की संख्या 1.27 लाख है। इसमें दुधारू पशुओं की संख्या करीब 40 हजार है।
इतना दूध चाहिए जिले को
- जिले में 6 लाख लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन, जबकि 7 लाख लीटर प्रतिदिन की खपत
- एक लाख लीटर की मांग दिल्ली से पैक्ड दूध की आपूर्ति से पूरी होती है।
- 3.50 लाख लीटर पैक्ड दूध की खपत जिले में है।
पनीर के 36 और खोआ के 32 नमूने फेल
विभाग ने पनीर के 57 नमूने जांच को भेजे, इनमें से 36 नमूने फेल आए हैं। जबकि खोआ के 50 नमूने जांच के लिए भेजे थे इनमें से 32 नमूने फेल आए हैं। पनीर को सोया, रिफाइंड और मिल्क पाउडर से तैयार किया जा रहा था। इसी तरह खोआ को भी तैयार किया जा रहा था।
कीमत में है 160 रुपये प्रति किलो का अंतर
एक किलो पनीर बनाने किए लिए पांच लीटर दूध की जरूरत होती है और यह 360 रुपये प्रति किलो तक है। जबकि रिफाइंड और सोया से तैयार पनीर की कीमत बाजार में 190 से 200 रुपये किलो तक है
सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मलहोत्रा कहते हैं कि सोया, रिफाइंड और पाउडर आदि के मिश्रण से जो पनीर बनाया जाता है वह बच्चों ही नहीं बल्कि बड़ों की सेहत के लिए भी बहुत हानिकारक है। इससे पाचन संबंधी जटिल समस्या हो सकती हैं। इस तरह के पनीर के लगातार सेवन से शरीर में बैड फैट, धमनी और तंत्रिका तंत्र में समस्या हो सकती है।
पनीर, दूध और खोआ के जो भी नमूने फेल मिले हैं, संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इन पर वाद विचाराधीन है। सुनवाई हो रही है। पिछले दिनों चंडौस सहित अन्य जगहों से नमूने भरे हैं। इनको जांच के लिए भेज दिया गया है। - दीनानाथ यादव, मंडलीय सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा।