Aligarh: एटा चुंगी निजी भूखंड पर निर्माण कार्य प्रशासन ने रुकवाया, फोर्स संग पहुंचे अफसर, यह है मामला
अलीगढ़ में एटा चुंगी बाईपास स्थित निजी भूखंड पर चल रहे काम को रूकवा दिया गया है। निजी भूमि टीकाराम ट्रस्ट के नाम पर अंकित है। भूखंड से जुड़े राजस्व अभिलेख एवं अन्य दस्तावेजों को ट्रस्ट से जुड़े लोगों से तलब किया गया है। दस्तावेज अवलोकन के बाद ही साफ हो सकेगा कि जमीन का स्वामित्व किसका है।
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अलीगढ़ में एटा चुंगी बाईपास स्थित निजी भूखंड पर अवैध कब्जा करने की शिकायत पर 2 दिसंबर को एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी के नेतृत्व में पहुंची पुलिस फोर्स ने काम रुकवा दिया। टीम ने भूखंड के स्वामित्व आदि से जुड़े राजस्व अभिलेखों को तलब किया है।
अवैध कब्जे की शिकायत पर एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट, एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक, एसीएम द्वितीय संजय मिश्रा, एसडीएम कोल रविशंकर सिंह, सीओ बन्नादेवी विशाल चौधरी मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान टीम ने यहां चल रहे नाला निर्माण समेत अन्य कार्य को रुकवा दिया।
एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट के अनुसार भूखंड को लेकर शिकायत मिली कि अवैध कब्जा किया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूखंड का वास्तविक स्वरूप नहीं बदला जा सकता है। नगर निगम को ही इसका प्रबंधन करने का अधिकार है। निजी भूमि टीकाराम ट्रस्ट के नाम पर अंकित है। एडीएम सिटी के अनुसार भूखंड से जुड़े राजस्व अभिलेख एवं अन्य दस्तावेजों को ट्रस्ट से जुड़े लोगों से तलब किया गया है। दस्तावेज अवलोकन के बाद ही साफ हो सकेगा कि जमीन का स्वामित्व किसका है।
टीकाराम चैरिटेबल फैमिली ट्रस्ट से जुड़ी है जमीन
सेंटर प्वाइंट स्थित टीकाराम मंदिर से जुड़े श्री टीकाराम चैरिटेबल फैमिली ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 1936 में हुई थी। ट्रस्ट द्वारा पिछले कई सालों में शहर भर में धर्मार्थ से जुड़े कार्य कराए गए हैं। ट्रस्ट की प्रबंधन समिति के ट्रस्टी हरीप्रकाश गुप्ता ने बीते दिनों शासन में प्रमुख सचिव स्तर पर शिकायत करते हुए बताया था कि ट्रस्ट की चार अलग-अलग खाता संख्या में करीब 56 हजार गज जमीन है।
जो ग्राम कूकड़ी खेड़ा, औरंगाबाद, तहसील कोल में है। राजस्व विभाग की खतौनी एवं खसरा में संक्रमणीय भूमिधरी अंकित है। आरोप है कि एडीए की प्रस्तावित अलीगढ़ महायोजना-2031 से पूर्व नगर निगम इस जमीन को ग्रीन बेल्ट दर्शाकर अवैधानिक रूप से हड़पने का प्रयास कर चुका है।
ट्रस्ट ने अदालत में शरण ली तो फैसले के बाद ट्रस्ट की जमीन में किसी भी प्रकार से दखलअंदाजी करने से स्थाई निषेधाज्ञा द्वारा रोक दिया गया। उन्होंने बताया कि पहले इस जमीन पर ईंट भट्ठे का संचालन होता था। पास में सलेज फार्म है, जिसका पानी ट्रस्ट की जमीन में आकर भर जाता है।
ज्वाइंट मैनेजिंग ट्रस्टी पवन गुप्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश एवं अन्य विभागों की अनुमन्य एनओसी लेने के बाद अपनी पुश्तैनी संपत्ति पर काम करा रहे हैं। पुलिस- प्रशासनिक टीम ने जमीन से जुड़े अभिलेख एवं दस्तावेज मांगे हैं। वे इस भूखंड से सभी दस्तावेजों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। पुश्तैनी जमीन पर विधि अनुसार ही काम करा रहे हैं। निजी खर्चे पर नाला बनाने के लिए नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया है। इसके बाद ही नाले का निर्माण कराया जा रहा है।