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रमजान में रहम की दुआ मांग रही एसिड अटैक पीड़िता दिव्यांग गुलशाना

Sat, 01 Jun 2019 01:46 AM IST
राजेश सिंह राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़।
राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Sat, 01 Jun 2019 01:46 AM IST
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Acid attack victim Divyaung Gulshana seeking mercy of Ramzan
तेजाब हमले की पीड़िता गुलशाना। - फोटो : Amar Ujala
तेजाब हमले का दंश झेल रही चंडौस के रामपुर शाहपुर गांव निवासी 16 वर्षीय नाबालिग को चार महीने बाद भी इंसाफ  का इंतजार है। रमजान के महीने में खाट पर पड़े-पड़े वह अल्लाह से रहम की दुआ मांग रही है। तेजाब से बुरी तरह झुलस चुकी गुलशाना को अब तक सरकारी मदद तक नहीं मिली है।
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पीड़िता पर फरवरी में तेजाब से हमला हुआ था। जिसमें उसका 40 फीसदी हिस्सा झुलस गया था। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पीड़िता को 15 दिन के अंदर मुआवजा देने का प्रावधान है। लेकिन, चार महीने बाद भी अब तक किसी ने पीड़िता की सुध नहीं ली। जबकि गुलशाना पर हुए हमले के तुरंत बाद ही छांव फाउंडेशन की ओर से उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग को पत्रावली भेज दी गई थी। गुलशाना फिलहाल बिस्तर पर पड़े-पड़े जहां एक तरफ  सिस्टम को कोस रही है। वहीं अपने हालात पर आंसू बहाने को भी मजबूर है। 
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छांव फाउंडेशन के कार्यकर्ता ने की मुलाकात
तेजाब पीड़िताओं के लिए काम कर रहे दिल्ली के छांव फाउंडेशन के रीच आउट अधिकारी दुर्गा प्रसाद शुक्ला ने गुलशाना से मुलाकात की। गुलशाना पर हुए हमले के बाद ही छांव फाउंडेशन की ओर से उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग को पत्रावली भेज दी गई थी। लेकिन विभाग द्वारा उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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आपसी रंजिश में किया  था अटैक
रामपुर शाहपुर निवासी 14 वर्षीय गुलशाना और उसके भाई पर उसके रिश्तेदारों ने आपसी रंजिश में गांव के ही बाहर तेजाब से हमला कर दिया था। 17 फरवरी को हुए इस हमले में भाई अरमान तो बच गया, लेकिन तेजाब से गुलशाना के शरीर का 40 फीसदी हिस्सा झुलस गया। उसकी एक आंख भी खत्म हो गई है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज हुआ था। 


छह लाख के मुआवजे के लिए करेंगे आवेदन पीजीआई में होगी प्लास्टिक सर्जरी
छांव फाउंडेशन के रीच आउट अधिकारी दुर्गा प्रसाद शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री राहत कोष से गुलशाना को एक लाख रुपये और उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग की ओर से पांच लाख रुपये के मुआवजे के लिए कार्यवाही की जा रही है। चूंकि पीड़िता के पास कोई पहचान पत्र नहीं है। इसीलिए सबसे पहले उसका पहचान-पत्र बनवाकर मुआवजे के लिए दोबारा आवेदन किया जाएगा। मुआवजे की प्रक्रिया के साथ ही गुलशाना की प्लास्टिक सर्जरी भी पीजीआई लखनऊ में कराई जाएगी। स्वास्थ्य ठीक होने के बाद गुलशाना दुनिया के पहले एसिड पीड़ितों द्वारा संचालित शीरोज हैंगआउट कैफे को ज्वाइन करेगी। 



- खुलेआम तेजाब की बिक्री पर है रोक।
- विक्रेता को 15 दिनों के अंदर एडीएम को उपलब्ध कराना होगा क्रय-विक्रय संबंधी डाटा।
- 15 दिनों के अंदर राज्य सरकार को मुआवजे का देना होगा कुछ हिस्सा। 
- बिना परिचय पत्र के नहीं खरीदा जा सकता तेजाब।
- आदेश का पालन न करने पर विक्रेता पर 50 हजार जुर्माने का प्रावधान।
- पुनर्वास और चिकित्सकीय सहायता की जिम्मेदारी है राज्य सरकार की। 



आधार कार्ड और दिव्यांग प्रमाण-पत्र की है दरकार
गुलशाना बचपन से ही दिव्यांग है। उसके शरीर के कुछ अंग बचपन से ही काम नहीं करते हैं। भाई अरमान ने बताया कि एक हाथ की उंगलियों मुड़ी होने के कारण वह बायोमैट्रिक पूरा नहीं कर सकी। इस कारण आधार कार्ड नहीं बन सका। आधार कार्ड की वजह से उसे किसी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। गुलशाना के पास फिलहाल कोई भी ऐसा फोटो युक्त दस्तावेज मौजूद नहीं है। जिससे वह अपनी पहचान उजागर कर सके। 
 
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