Acid Attack: बहन के देवर ने फेंका एसिड, 12 ऑपरेशन हुए, 20 साल बाद लिखी रिपोर्ट, न्याय की लड़ाई लड़ रही रुकैया
रुकैया 14 वर्ष की थी। वह 2002 में अपनी बहन की ससुराल आई थी। जहां उसकी बहन के देवर आरिफ ने उसे परेशान करते हुए उस पर शादी का दबाव बनाया। रुकैया नहीं मानी तो आरोपी ने उस पर 7 सितंबर 2002 को एसिड से हमला कर दिया। 22 साल बाद 2022 में मामले की रिपोर्ट दर्ज हुई।
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एसिड हमले की एक कहानी अलीगढ़ में भी सिस्टम व समाज पर सवाल खड़ा करने वाली है। आगरा की रुकैया संग अलीगढ़ में एसिड हमले की घटना हुई। मगर उसे इस घटना की प्राथमिकी दर्ज कराने में बीस वर्ष लग गए। वह भी तब जब एक दिन अधिकारियों से उसकी मुलाकात हो गई। आनन फानन रिपोर्ट दर्ज किए जाने के बाद आरोपी जेल भेजा गया, जो अभी भी जमानत न मिलने के कारण जेल में है। मगर रुकैया है कि उसे सजा दिलाने तक लड़ने का जज्बा मन में पाले हुए है।
इस कहानी की शुरुआत तब हुई, जब आगरा पीली पोखर इलाके की रुकैया 14 वर्ष की थी। वह 2002 में अपनी बहन की ससुराल देहली गेट के तुर्कमान गेट में आई थी। जहां उसकी बहन के 24 वर्षीय देवर आरिफ ने उसे परेशान करते हुए उस पर शादी का दबाव बनाया। रुकैया नहीं मानी तो आरोपी ने उस पर 7 सितंबर 2002 को एसिड से हमला कर दिया। जिससे उसका चेहरा आदि हिस्सा झुलस गया। उसके इलाज में कुल 12 ऑपरेशन हुए। परिवार के दबाव में वह सिर्फ इसलिए उस समय चुप रही कि बहन का परिवार टूट जाएगा।
2010 में उसकी शादी अलीगढ़ मामूद नगर के जाहिद संग कर दी। जिससे एक बेटा हुआ। मगर उसने भी 2016 में घर से निकाल दिया। इसके बाद मायके आगरा पहुंचकर वह एसिड हमले की पीड़ितों के सर्वाइवल के लिए काम कर रहे शीरोज हैंगआउट कैफे में काम करने लगी। वहां 6 दिसंबर 2022 को तत्कालीन एडीजी जोन राजीव कृष्ण व कमिश्रर आगरा प्रीतिंदर सिंह आए। जहां उनकी रुकैया से मुलाकात हुई। रुकैया से उन्होंने पूरी घटना के बारे में पूछा तो उसने आरोपी को सजा दिलाने की इच्छा जताई।
तत्काल अधिकारियों के निर्देश पर जांच कराते हुए देहली गेट में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके आधार पर आरिफ को जेल भेज दिया गया। रुकैया आज भी लड़ रही है। हाईकोर्ट तक जमानत खारिज कराने के लिए वह गई है। वह चाहती है कि जब तक आरोपी को सजा नहीं मिलेगी। लड़ती रहेगी। मुकदमा आज भी न्यायालय में विचाराधीन है। अभी सितंबर 2025 में उसे हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने मुआवजा भी दिया है।
इस संबंध में जो भी निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार विवरण इकट्ठा कर भेजा जाएगा। इन मुकदमों का क्या स्टेटस है इसकी जानकारी कराई जा रही है।-नीरज कुमार जादौन, एसएसपी, अलीगढ़
गुलशाना-उसके भाई को भी सजा का इंतजार
जिले में अकेली रुकैया नहीं, जिसे खुद पर एसिड हमले में सजा का इंतजार हो। इसी तरह जिले के चंडौस के गांव रामपुर शाहपुर की गुलशाना व उसके भाई अरमान पर 17 फरवरी 2019 को एसिड हमले की घटना हुई थी। ये दोनों जेल में निरुद्ध अपने पिता से मिलकर गांव पहुंचे थे, तभी विपक्षियों ने हमला किया था। इनको भी मुकदमे में सजा का इंतजार है। गुलशाना की तो इस घटना के बाद तबीयत भी ठीक नहीं रहती। इस विषय में शीरोज हैंगआउट कैफे से जुड़े आशीष बताते हैं कि हमारे स्तर से इन सभी मामलों में लगातार सजा कराने के प्रयास हो रहे हैं। लगातार हम लोग मॉनीटर करते हैं।
जिले में तीन वर्ष में 9 हमले दर्ज हुए, विचाराधीन
जिला पुलिस के रिकार्ड पर ध्यान दें तो जिले में पिछले तीन वर्ष में एसिड हमले के 9 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनके मुकदमे अलग अलग अदालतों में लंबित हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद उनका विवरण संकलित किया जा रहा है। मुकदमों में किस तरह की प्रक्रिया अब चल रही है। यह देखा जा रहा है। उसके अनुसार इनमें गति लाने का प्रयास होगा।