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शरजील उस्मानी के ट्वीट पर डीजीपी को लिखा पत्र
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 15 दिसंबर 2019 को हुए बवाल में जेल गए शरजील उस्मानी के एक ट्वीट से मामला फिर गर्मा गया है। इस संबंध में भाजपा के जिला प्रवक्ता निशित शर्मा ने पत्र लिखकर डीजीपी से शिकायत की है। पत्र में कहा गया है कि एएमयू छात्र शरजील उस्मानी का यह ट्वीट समाज के सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा पहुंचाने वाला है। ट्वीट करने वाला छात्र कुछ दिनों पहले ही जमानत पर रिहा हुआ है। इस पर एसएसपी ने थाना सिविल लाइन प्रभारी को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, शरजील उस्मानी ने भी अपने ट्वीट के संबंध में सफाई प्रस्तुत की है। कहा कि ‘मैंने अपने लोगों से (ध्यान रहे, सभी लोगों से, केवल एक धर्म विशेष से नहीं) आह्वान किया कि वे इस दमनकारी सरकार के खिलाफ इकट्ठा हों और असहयोग आंदोलन शुरू करें’। अगर शिकायतकर्ता ने आजादी की लड़ाई का इतिहास पढ़ा होता तो वे असहयोग आंदोलन को हिंसा से न जोड़ते। आरोप लगाया कि इनको सरकार और राष्ट्र में फर्क करना नहीं आता। हर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी इनकी नजर में राष्ट्र विरोधी हैं।
इसको हिंसा से जोड़ना हमारे पूर्वजों के संघर्षों का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोगों से अपील करूंगा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बहकावे में न आएं और सरकार से जरूरी सवाल पूछते रहें। सवाल पूछना जिंदा लोकतंत्र की पहचान है। शरजील उस्मानी के पिता एएमयू के प्रोफेसर तारिक उस्मानी ने कहा कि जिस ट्वीट की बात की जा रही है, वह शरजील ने किया ही नहीं है, क्योंकि उसका मोबाइल अभी तक एटीएस के कब्जे में है। इसलिए यह उसको फंसाने का षड्यंत्र है।
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दूसरी ओर, शरजील उस्मानी ने भी अपने ट्वीट के संबंध में सफाई प्रस्तुत की है। कहा कि ‘मैंने अपने लोगों से (ध्यान रहे, सभी लोगों से, केवल एक धर्म विशेष से नहीं) आह्वान किया कि वे इस दमनकारी सरकार के खिलाफ इकट्ठा हों और असहयोग आंदोलन शुरू करें’। अगर शिकायतकर्ता ने आजादी की लड़ाई का इतिहास पढ़ा होता तो वे असहयोग आंदोलन को हिंसा से न जोड़ते। आरोप लगाया कि इनको सरकार और राष्ट्र में फर्क करना नहीं आता। हर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी इनकी नजर में राष्ट्र विरोधी हैं।
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इसको हिंसा से जोड़ना हमारे पूर्वजों के संघर्षों का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोगों से अपील करूंगा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बहकावे में न आएं और सरकार से जरूरी सवाल पूछते रहें। सवाल पूछना जिंदा लोकतंत्र की पहचान है। शरजील उस्मानी के पिता एएमयू के प्रोफेसर तारिक उस्मानी ने कहा कि जिस ट्वीट की बात की जा रही है, वह शरजील ने किया ही नहीं है, क्योंकि उसका मोबाइल अभी तक एटीएस के कब्जे में है। इसलिए यह उसको फंसाने का षड्यंत्र है।
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