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एएमयू वैज्ञानिक की बौद्धिक संपदा पर ‘डाका’
Aligarh
Updated Sat, 27 Apr 2013 05:30 AM IST
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अलीगढ़ (ब्यूरो)। भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा का विदेशों में डंका बज रहा है। भारत की लगातार बढ़ती बौद्धिक संपदा पर अब विदेशी बुद्धिजीवियों ने ‘डाका’ डालना शुरू कर दिया है। अमेरिका सहित विश्व के आधा दर्जन देशों के शिक्षाविदें ने एक पूर्व एएमयू वैज्ञानिक प्रो. नूर अफजल द्वारा वर्षों मेहनत कर नए डोमेन पर किए गए कार्य के कुछ अंशों को चुरा लिया। इस संबंध में प्रो. अफजल ने 6 देशों के 26 प्रोफेसरों के खिलाफ बौद्धिक संपदा चोरी की ताजा रिपोर्ट थाना सिविल लाइन में दर्ज कराई है। इससे पहले दो बार प्रो. अफजल रिपोर्ट दर्ज करा चुके हैं।
एएमयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से रिटायर हुए प्रो. नूर अफजल ने सन् 1982 से 1985 के बीच ‘टर्ब्यूलेंट मोशन ऑफ फ्ल्यूड्स’ के नए डोमेन (कार्यक्षेत्र) पर काम किया था। उनका यह काम विश्व की कई नामचीन विज्ञान पत्रिकाओं और जनल्सम़ें प्रकाशित भी हुआ। 1987 में इटली की यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले प्रो. आरके श्रीवास्तव ने उसके अंश अपने नाम से प्रकाशित करवाने शुरू किए। 1997 में प्रो. श्रीवास्तव के एक छात्र ने पीएचडी जमा कराई, जिसमें लिखा कि हमें अभी मालूम हुआ है कि प्रो. नूर अफजल ने लेयर और इंटरमीडिएट लेयर पर काम किया है। इसके बाद इस संबंध में जो भी आर्टिकल आए उसमें से प्रो. नूर अफजल का नाम गायब कर दिया। संचार माध्यम सीमित होने के कारण 1997 से 2005 तक इस बात का पता ही नहीं चला। बाद में मामला प्रकाश में आने के बाद प्रो. नूर अफजल ने इस संबंध में कड़ी मेहनत कर सभी तथ्य जुटाए।
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एएमयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से रिटायर हुए प्रो. नूर अफजल ने सन् 1982 से 1985 के बीच ‘टर्ब्यूलेंट मोशन ऑफ फ्ल्यूड्स’ के नए डोमेन (कार्यक्षेत्र) पर काम किया था। उनका यह काम विश्व की कई नामचीन विज्ञान पत्रिकाओं और जनल्सम़ें प्रकाशित भी हुआ। 1987 में इटली की यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले प्रो. आरके श्रीवास्तव ने उसके अंश अपने नाम से प्रकाशित करवाने शुरू किए। 1997 में प्रो. श्रीवास्तव के एक छात्र ने पीएचडी जमा कराई, जिसमें लिखा कि हमें अभी मालूम हुआ है कि प्रो. नूर अफजल ने लेयर और इंटरमीडिएट लेयर पर काम किया है। इसके बाद इस संबंध में जो भी आर्टिकल आए उसमें से प्रो. नूर अफजल का नाम गायब कर दिया। संचार माध्यम सीमित होने के कारण 1997 से 2005 तक इस बात का पता ही नहीं चला। बाद में मामला प्रकाश में आने के बाद प्रो. नूर अफजल ने इस संबंध में कड़ी मेहनत कर सभी तथ्य जुटाए।
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