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कुट्टू की अवैध बिक्री रोकने से बच रहे अफसर!
Aligarh
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। महानगर में कुट्टू की अवैध बिक्री कौन रोकेगा... ?, इस सवाल के जवाब पर जिम्मेदार दो-दो विभाग एक दूसरे पर बला टालने का काम कर रहे हैं। कहने को प्रशासनिक आदेश पर औषधि निरीक्षक मेडिकल स्टोरों से अब कुट्टू न बिकने देने का दावा कर रहे हैं। मगर अहम सवाल है कि जो कुट्टू बैकडोर से बिक रहा है, उसे कौन रोकेगा
कुट्टू के उत्पादन और उसकी बिक्री से जुड़े नियमों पर नजर डालें तो यह रेक्टीफाइड स्प्रिट (अल्कोहल) और काड्रोमम एसेंस के मिश्रण से बनता है। 90 एमएल की शीशी में 80 से 90 प्रतिशत रेक्टीफाइड स्प्रिट ही होता है। स्प्रिट चेकिंग और निर्माण के बाद मार्केट में सप्लाई जाने तक चेकिंग का जिम्मा आबकारी विभाग का होता है, क्योंकि फैक्ट्री को स्प्रिट का कोटा निर्धारित होता है। अब साल में निर्धारित कोटे से ज्यादा अगर माल बन रहा है तो कहीं न कहीं गोरखधंधा जरूर है। वहीं, महानगर में संचालित फैक्ट्री के नाम पर 17 हजार लीटर सालाना स्प्रिट का लाइसेंस है। मगर फैक्ट्री संचालक इसलिए बच जाते हैं कि अगर कुट्टू पीने से मौत पर पोस्टमार्टम कराया जाए जो रिपोर्ट में अल्कोहल आएगा। अब अगर बिक्री के नियम पर गौर करें तो दुकान पर रखे माल का रिकार्ड और डॉक्टर की पर्ची से होने वाली बिक्री का रिकार्ड का ब्योरा दुकानदार को रखना होगा। मगर महज कुट्टू बेचने वाले दुकानदार इसका गोलमाल करते हैं। बात अगर औषधि विभाग की करें तो औषधि निरीक्षक कहते हैं कि महानगर में हुए हंगामे के चलते एडीएम सिटी के निर्देश पर वे खुद दिन भर कुट्टू बेचने वाली दुकानों पर नजर रख रहे हैं। अधिकांश दुकानें बंद हैं और जो खुल रही हैं, उन पर वे बैठकर दिन भर नजर रखते हैं। हां, अब ये खबर मिल रही है कि मोहल्लों में बिना लेबल के थैलों में एजेंट कुट्टू बेचते फिर रहे हैं, जिसे रोकने का काम आबकारी विभाग का है।
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कुट्टू के उत्पादन और उसकी बिक्री से जुड़े नियमों पर नजर डालें तो यह रेक्टीफाइड स्प्रिट (अल्कोहल) और काड्रोमम एसेंस के मिश्रण से बनता है। 90 एमएल की शीशी में 80 से 90 प्रतिशत रेक्टीफाइड स्प्रिट ही होता है। स्प्रिट चेकिंग और निर्माण के बाद मार्केट में सप्लाई जाने तक चेकिंग का जिम्मा आबकारी विभाग का होता है, क्योंकि फैक्ट्री को स्प्रिट का कोटा निर्धारित होता है। अब साल में निर्धारित कोटे से ज्यादा अगर माल बन रहा है तो कहीं न कहीं गोरखधंधा जरूर है। वहीं, महानगर में संचालित फैक्ट्री के नाम पर 17 हजार लीटर सालाना स्प्रिट का लाइसेंस है। मगर फैक्ट्री संचालक इसलिए बच जाते हैं कि अगर कुट्टू पीने से मौत पर पोस्टमार्टम कराया जाए जो रिपोर्ट में अल्कोहल आएगा। अब अगर बिक्री के नियम पर गौर करें तो दुकान पर रखे माल का रिकार्ड और डॉक्टर की पर्ची से होने वाली बिक्री का रिकार्ड का ब्योरा दुकानदार को रखना होगा। मगर महज कुट्टू बेचने वाले दुकानदार इसका गोलमाल करते हैं। बात अगर औषधि विभाग की करें तो औषधि निरीक्षक कहते हैं कि महानगर में हुए हंगामे के चलते एडीएम सिटी के निर्देश पर वे खुद दिन भर कुट्टू बेचने वाली दुकानों पर नजर रख रहे हैं। अधिकांश दुकानें बंद हैं और जो खुल रही हैं, उन पर वे बैठकर दिन भर नजर रखते हैं। हां, अब ये खबर मिल रही है कि मोहल्लों में बिना लेबल के थैलों में एजेंट कुट्टू बेचते फिर रहे हैं, जिसे रोकने का काम आबकारी विभाग का है।
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