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अलीगढ़ में लंका दहन पर गूंजे जय श्रीराम के उद्घोष
Updated Sun, 01 Oct 2017 05:35 PM IST
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लंका दहन पर गूंजे जय श्री राम के उद्घोष
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अचलताल स्थित रामलीला ग्राउंड में श्री रामलीला महोत्सव के तहत मंगलवार को सुग्रीव मिलन, ऋतुओं का वर्णन, माता सीता की खोज में वानरों का जाना, हनुमान द्वारा अशोक वाटिका का उजाड़ना व लंका दहन की लीला हुई। मनोहारी मंचन आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने निर्देशक राघवेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में किया। रामायण का पाठ व्यास प्रशांत कृष्ण चतुर्वेदी ने किया।
सर्वप्रथम श्रीराम एवं रामायण की पूजन विमल अग्रवाल ने की। इसके बाद रामलीला शुरू हुई। हनुमान सुग्रीव से श्रीराम को मिलवाते हैं और श्रीराम के साथ चल देते हैं। वानरों की सेना को सीता की खोज में भेजी जाती है। माता सीता की खोज करते करते हनुमान लंका पहुंच जाते हैं। सीता जी से मुलाकात के बाद अशोक वाटिका में लगे फल देखकर हनुमान जी को भूख लगती है।
वह माता सीता की आज्ञा लेकर फल तोड़कर खाने लगते हैं। अशोक वाटिका में वानर द्वारा वाटिका को उजाड़ने की खबर पर रावण अपने सैनिकों को भेजता है। हनुमान जी उन्हें मारकर भगा देते हैं, फिर मेघनाद आता है और हनुमान जी को नागपाश नामक शस्त्र से बांधकर रावण के दरबार में लाता है। हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जाती है, हनुमान जी अपनी पूंछ की आग से पूरी लंका में आग लगा देते हैं। इस दौरान पूरे पांडाल में जय श्री राम के उद्घोष ही सुनाई पड़ रहे थे।
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मीडिया प्रभारी राजीव रंजन गुप्ता ने बताया कि बुधवार को लंका कूच, विभीषण शरणागत, सुख सारन संवाद, रामसेतु का निर्माण, रामेश्वरम स्थापना की लीला का मंचन होगा। रामलीला में विमल अग्रवाल, संदीप रंजन गुप्ता, ऋषि मित्तल, शैलेंद्र अग्रवाल, अतुल कुलश्रेष्ठ, गोपाल वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, हरीश शर्मा, सुनील गर्ग, मनमोहन अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अचलताल स्थित रामलीला ग्राउंड में श्री रामलीला महोत्सव के तहत मंगलवार को सुग्रीव मिलन, ऋतुओं का वर्णन, माता सीता की खोज में वानरों का जाना, हनुमान द्वारा अशोक वाटिका का उजाड़ना व लंका दहन की लीला हुई। मनोहारी मंचन आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने निर्देशक राघवेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में किया। रामायण का पाठ व्यास प्रशांत कृष्ण चतुर्वेदी ने किया।
सर्वप्रथम श्रीराम एवं रामायण की पूजन विमल अग्रवाल ने की। इसके बाद रामलीला शुरू हुई। हनुमान सुग्रीव से श्रीराम को मिलवाते हैं और श्रीराम के साथ चल देते हैं। वानरों की सेना को सीता की खोज में भेजी जाती है। माता सीता की खोज करते करते हनुमान लंका पहुंच जाते हैं। सीता जी से मुलाकात के बाद अशोक वाटिका में लगे फल देखकर हनुमान जी को भूख लगती है।
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वह माता सीता की आज्ञा लेकर फल तोड़कर खाने लगते हैं। अशोक वाटिका में वानर द्वारा वाटिका को उजाड़ने की खबर पर रावण अपने सैनिकों को भेजता है। हनुमान जी उन्हें मारकर भगा देते हैं, फिर मेघनाद आता है और हनुमान जी को नागपाश नामक शस्त्र से बांधकर रावण के दरबार में लाता है। हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जाती है, हनुमान जी अपनी पूंछ की आग से पूरी लंका में आग लगा देते हैं। इस दौरान पूरे पांडाल में जय श्री राम के उद्घोष ही सुनाई पड़ रहे थे।
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मीडिया प्रभारी राजीव रंजन गुप्ता ने बताया कि बुधवार को लंका कूच, विभीषण शरणागत, सुख सारन संवाद, रामसेतु का निर्माण, रामेश्वरम स्थापना की लीला का मंचन होगा। रामलीला में विमल अग्रवाल, संदीप रंजन गुप्ता, ऋषि मित्तल, शैलेंद्र अग्रवाल, अतुल कुलश्रेष्ठ, गोपाल वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, हरीश शर्मा, सुनील गर्ग, मनमोहन अग्रवाल आदि उपस्थित थे।