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कोहिनूर पर रूप और सोनाली के सुर छाए
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
संगीत के नाम पर शोर के इस दौर में एक गहरी और शांत आवाज जब कानों में मधुरता घोल रही हो तो भला कौन उसके आकर्षण से बच सकता है। मंगलवार को नुमाइश के कोहिनूर मंच पर जब मशहूर पार्श्व गायक रूप कुमार राठौर और सोनाली राठौर ने प्रस्तुति दी तो कुछ ऐसा ही समां बांध गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन एसपी सिटी आशुतोष द्विेदी ने ने दीप प्रज्जवलित करके किया। इसके बाद रूप कुमार राठौर और सोनाली राठौर मंच पर आए। अलीगढ़ इन दोनों के लिए नया नहीं था। यह बात उन्होंने मंच से भी कही। कार्यक्रम की शुरुआत सोनाली राठौर ने फिल्म ‘लेकिन’ के मशहूर गीत यारा सीली सीली, के साथ किया। इसके बाद ?वाजा मेरे ?वाजा, और निगाहें मिलाने को जी चाहता है, पेश करके संगीत प्रेमियों को पैर थिरकाने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान जब धीमी रोशनी में मंच से फिल्म वीर जारा का गीत ‘तेरे लिए हम हैं जिए होठों को सिए’ प्रस्तुुत किया तो लगा कि मदन मोहन के संगीत का वह दौर एक बार फिर से जीवंत हो गया।
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इस फिल्म में संगीतकार मदन मोहन का संगीत था, जिनकी मौत फिल्म की रिलीज से 30 साल पहले ही हो गई थी। इसके बाद रूप कुमार राठौर ने अपने चिर परिचित अंदाज में 20 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘बार्डर’ का अपना गीत ‘संदेशे आते हैं, संदेशे जाते हैं’ गाकर पंडाल में बैठे लोगों को देश भक्ति की भावना से ओत प्रोत कर दिया। सोनाली राठौर ने लता मंगेशकर का प्रसिद्ध गीत ‘लग जा गले से फिर ये हंसी रात हो न हो’ प्रस्तुुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद रूप कुुमार राठौर और सोनाली राठौर ने 90 के दशक और सन 2000 से 2010 तक के दौर के एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत प्रस्तुत किए। देर रात तक श्रोता कोहिनूर मंच में गीत संगीत और साज की त्रिवेणी में गोते लगाते रहे। इस अवसर पर जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह, एडीएम सिटी श्याम बहादुर सिंह, तहसीलदार गौतम सिंह आदि मौजूूद थे।
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संगीत के नाम पर शोर के इस दौर में एक गहरी और शांत आवाज जब कानों में मधुरता घोल रही हो तो भला कौन उसके आकर्षण से बच सकता है। मंगलवार को नुमाइश के कोहिनूर मंच पर जब मशहूर पार्श्व गायक रूप कुमार राठौर और सोनाली राठौर ने प्रस्तुति दी तो कुछ ऐसा ही समां बांध गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन एसपी सिटी आशुतोष द्विेदी ने ने दीप प्रज्जवलित करके किया। इसके बाद रूप कुमार राठौर और सोनाली राठौर मंच पर आए। अलीगढ़ इन दोनों के लिए नया नहीं था। यह बात उन्होंने मंच से भी कही। कार्यक्रम की शुरुआत सोनाली राठौर ने फिल्म ‘लेकिन’ के मशहूर गीत यारा सीली सीली, के साथ किया। इसके बाद ?वाजा मेरे ?वाजा, और निगाहें मिलाने को जी चाहता है, पेश करके संगीत प्रेमियों को पैर थिरकाने पर मजबूर कर दिया।
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कार्यक्रम के दौरान जब धीमी रोशनी में मंच से फिल्म वीर जारा का गीत ‘तेरे लिए हम हैं जिए होठों को सिए’ प्रस्तुुत किया तो लगा कि मदन मोहन के संगीत का वह दौर एक बार फिर से जीवंत हो गया।
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इस फिल्म में संगीतकार मदन मोहन का संगीत था, जिनकी मौत फिल्म की रिलीज से 30 साल पहले ही हो गई थी। इसके बाद रूप कुमार राठौर ने अपने चिर परिचित अंदाज में 20 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘बार्डर’ का अपना गीत ‘संदेशे आते हैं, संदेशे जाते हैं’ गाकर पंडाल में बैठे लोगों को देश भक्ति की भावना से ओत प्रोत कर दिया। सोनाली राठौर ने लता मंगेशकर का प्रसिद्ध गीत ‘लग जा गले से फिर ये हंसी रात हो न हो’ प्रस्तुुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद रूप कुुमार राठौर और सोनाली राठौर ने 90 के दशक और सन 2000 से 2010 तक के दौर के एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत प्रस्तुत किए। देर रात तक श्रोता कोहिनूर मंच में गीत संगीत और साज की त्रिवेणी में गोते लगाते रहे। इस अवसर पर जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह, एडीएम सिटी श्याम बहादुर सिंह, तहसीलदार गौतम सिंह आदि मौजूूद थे।