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500 साल पुराने साहित्य से होगा लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Updated Fri, 05 Oct 2018 02:08 AM IST
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डेस्क न्यूज अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़। शहर के रामलीला मैदान में मंचन होने वाली रामलीला में इस बार लक्ष्मण-परशुराम संवाद में 500 साल पुराने साहित्य का भी इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि मंचन तुलसीकृत रामायण पर आधारित होता है। लेकिन इसके साथ-साथ विभिन्न साहित्य को भी कलाकार अपने अनुसार प्रयोग में लाते रहते हैं।
श्री आदर्श रामलीला मथुरा मंडली के निर्देशक स्वामी राघवेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि इस बार लक्ष्मण-परशुराम संवाद में 500 साल पुराना राम रसायन ग्रंथ के साहित्य का भी इस्तेमाल होगा। यह साहित्य तत्कालीन समय में अयोध्या स्थित कनक भवन सरकार के एक संत ने 60 से 70 ग्रंथों का निचोड़ निकालकर लिखा था। मंचन तुलसीकृत रामायण पर आधारित होता है। लेकिन समय-समय पर पात्र विभिन्न ग्रंथों को लेकर संवाद करते हैं। लक्ष्मण-परशुराम संवाद में राधेश्याम, वंशी, वाल्मीकि, आध्यात्म रामायण का साहित्य भी प्रयोग में लाया जाएगा। इसी के साथ कौशलेंद्र कौस्तुभ व राम रसायन के कवित्त, श्लोक, शास्त्रार्थ का इस्तेमाल कलाकार करेंगे।
अलीगढ़। शहर के रामलीला मैदान में मंचन होने वाली रामलीला में इस बार लक्ष्मण-परशुराम संवाद में 500 साल पुराने साहित्य का भी इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि मंचन तुलसीकृत रामायण पर आधारित होता है। लेकिन इसके साथ-साथ विभिन्न साहित्य को भी कलाकार अपने अनुसार प्रयोग में लाते रहते हैं।
श्री आदर्श रामलीला मथुरा मंडली के निर्देशक स्वामी राघवेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि इस बार लक्ष्मण-परशुराम संवाद में 500 साल पुराना राम रसायन ग्रंथ के साहित्य का भी इस्तेमाल होगा। यह साहित्य तत्कालीन समय में अयोध्या स्थित कनक भवन सरकार के एक संत ने 60 से 70 ग्रंथों का निचोड़ निकालकर लिखा था। मंचन तुलसीकृत रामायण पर आधारित होता है। लेकिन समय-समय पर पात्र विभिन्न ग्रंथों को लेकर संवाद करते हैं। लक्ष्मण-परशुराम संवाद में राधेश्याम, वंशी, वाल्मीकि, आध्यात्म रामायण का साहित्य भी प्रयोग में लाया जाएगा। इसी के साथ कौशलेंद्र कौस्तुभ व राम रसायन के कवित्त, श्लोक, शास्त्रार्थ का इस्तेमाल कलाकार करेंगे।
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