{"_id":"5c17fe32bdec2256ba1d7911","slug":"71545076274-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंडी पर रही रजाई, कंबल का बाजार गरम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंडी पर रही रजाई, कंबल का बाजार गरम
Updated Tue, 18 Dec 2018 01:21 AM IST
विज्ञापन
राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़
सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। सर्दी से जुड़े कपड़े, रजाई, गद्दे, कंबल आदि की बिक्री रफ्तार पकड़ रही है। साल दर साल बदलते ट्रेंड में रूई वाली रजाई की जगह कंबल की बिक्री बढ़ी है। रजाई में भरी जाने वाली रूई की धुनाई करने वाले मजदूरों ने बताया कि अब इस रजाई का चलन कम हुआ है, अब शौकीन लोग ही इसको पसंद करते हैं। रेलवे रोड के तीन प्रतिष्ठानों के मुताबिक अब तक वह 9000 से ज्यादा कंबल व फाइबर वाली रजाई बेच चुके हैं। रामघाट रोड पर रूई की धुनाई करने वालों ने बताया कि सीजन शुरू होने के बाद से वह बमुश्किल 100 रजाई ही बेच पाए हैं।
रजाई से हल्का व जल्दी गरम होता है कंबल
रुई वाली रजाई का वजन जहां ज्यादा होता है। वहीं कंबल ज्यादा जल्दी गरम होते हैं। कंबल विक्रेता पंकज अग्रवाल ने बताया कि कंबलों के अंदर एकरैलिक नाम के पदार्थ के धागों का इस्तेमाल होता है। जो ज्यादा हल्का होता है। वहीं ओढ़ने के बाद यह तेजी से गरम भी हो जाता है। इस वजह से कंबलों का चलन बढ़ा है। इसी तरह से फाइबर वाली रजाई भी हल्की व जल्दी गरम होती है। चलन में आईं फाइबर की रजाई व एकरैलिक के कंबल सहजने में बहुत ही आसान होते हैं। यह इतने हल्के होते हैं कि बच्चे भी आसानी से इनकों उठाकर इधर से उधर कर सकते हैं। जबकि परंपरागत रजाई का आकार थोड़ा बड़ा और वजन ज्यादा होता है।
रजाई का चलन हुआ है कम
रजाई का चलन कम हो गया है। लोग कंबल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। मैं बचपन से ही परिवार के साथ रजाई धुनाई का काम कर रहा हूं। आज से पांच साल पहले रजाई धुनाई का काम बहुत हुआ करता था। अब तो नाम मात्र गिना चुना ही काम आता है।
विज्ञापन
-मो. उस्मान, रजाई धुनाई वाला मजदूर।
रजाई को संभालने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आजकल चलन में आए कंबलों को सहेजना काफी सरल है। रजाई को रखने के लिए विशेष आकार के बक्से की जरूरत है। जबकि कंबल बैग के अंदर ही आ जाता है। मैं हर साल रजाई धुनने यहां आता हूं। पिछले काफी समय से रजाई की बिक्री में कमी आई है।
- इता हुसैन, संभल निवासी रजाई धुनाई वाला मजदूर।
रजाई-कंबल के रेटों में फर्क
वजन रजाई (कॉटन) रजाई (फाइबर) कंबल
तीन किलो 955 1255 900
5 किलो 1285 1700 1400
इस तरह तैयार हो रही रजाई
रुई 150 रुपये किलो, 15 रुपये किलो सिंगल बेड की रजाई की धुनाई, 60 रुपये किलो सिंगल बेट रजाई की तगाई, इसी के साथ अलग से 400 से 500 रुपये तक का कवर। फाइबर वाली रजाई में रुई की कीमत 250 रुपये व 160 रुपये किलो है। बाकी धुनाई, तगाई व कवर उक्त रजाई की तरह देय है।
विज्ञापन
सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। सर्दी से जुड़े कपड़े, रजाई, गद्दे, कंबल आदि की बिक्री रफ्तार पकड़ रही है। साल दर साल बदलते ट्रेंड में रूई वाली रजाई की जगह कंबल की बिक्री बढ़ी है। रजाई में भरी जाने वाली रूई की धुनाई करने वाले मजदूरों ने बताया कि अब इस रजाई का चलन कम हुआ है, अब शौकीन लोग ही इसको पसंद करते हैं। रेलवे रोड के तीन प्रतिष्ठानों के मुताबिक अब तक वह 9000 से ज्यादा कंबल व फाइबर वाली रजाई बेच चुके हैं। रामघाट रोड पर रूई की धुनाई करने वालों ने बताया कि सीजन शुरू होने के बाद से वह बमुश्किल 100 रजाई ही बेच पाए हैं।
रजाई से हल्का व जल्दी गरम होता है कंबल
रुई वाली रजाई का वजन जहां ज्यादा होता है। वहीं कंबल ज्यादा जल्दी गरम होते हैं। कंबल विक्रेता पंकज अग्रवाल ने बताया कि कंबलों के अंदर एकरैलिक नाम के पदार्थ के धागों का इस्तेमाल होता है। जो ज्यादा हल्का होता है। वहीं ओढ़ने के बाद यह तेजी से गरम भी हो जाता है। इस वजह से कंबलों का चलन बढ़ा है। इसी तरह से फाइबर वाली रजाई भी हल्की व जल्दी गरम होती है। चलन में आईं फाइबर की रजाई व एकरैलिक के कंबल सहजने में बहुत ही आसान होते हैं। यह इतने हल्के होते हैं कि बच्चे भी आसानी से इनकों उठाकर इधर से उधर कर सकते हैं। जबकि परंपरागत रजाई का आकार थोड़ा बड़ा और वजन ज्यादा होता है।
विज्ञापन
रजाई का चलन हुआ है कम
रजाई का चलन कम हो गया है। लोग कंबल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। मैं बचपन से ही परिवार के साथ रजाई धुनाई का काम कर रहा हूं। आज से पांच साल पहले रजाई धुनाई का काम बहुत हुआ करता था। अब तो नाम मात्र गिना चुना ही काम आता है।
विज्ञापन
-मो. उस्मान, रजाई धुनाई वाला मजदूर।
रजाई को संभालने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आजकल चलन में आए कंबलों को सहेजना काफी सरल है। रजाई को रखने के लिए विशेष आकार के बक्से की जरूरत है। जबकि कंबल बैग के अंदर ही आ जाता है। मैं हर साल रजाई धुनने यहां आता हूं। पिछले काफी समय से रजाई की बिक्री में कमी आई है।
- इता हुसैन, संभल निवासी रजाई धुनाई वाला मजदूर।
रजाई-कंबल के रेटों में फर्क
वजन रजाई (कॉटन) रजाई (फाइबर) कंबल
तीन किलो 955 1255 900
5 किलो 1285 1700 1400
इस तरह तैयार हो रही रजाई
रुई 150 रुपये किलो, 15 रुपये किलो सिंगल बेड की रजाई की धुनाई, 60 रुपये किलो सिंगल बेट रजाई की तगाई, इसी के साथ अलग से 400 से 500 रुपये तक का कवर। फाइबर वाली रजाई में रुई की कीमत 250 रुपये व 160 रुपये किलो है। बाकी धुनाई, तगाई व कवर उक्त रजाई की तरह देय है।