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पूरे साल रहा बजट का इंतजार परंतु तालाब मद में नहीं मिला धेला
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जनपद के डार्क जोन में शामिल इगलास एवं चंडौस के साथ हाल ही में सामान्य की श्रेणी में आए खैर ब्लाक में भूगर्भ जल की सेहत सुधारने के लिए लघु सिंचाई विभाग ने दस बड़े तालाब बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
आकार बड़ा होने व गहराई अधिक होने के चलते इन तालाबों की मनरेगा से खुदाई संभव नहीं थी। अत: मशीनों से इन तालाबों की खुदाई के लिए अफसरों ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन वर्ष पर्यंत इंतजार के बावजूद भूगर्भ जल को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली योगी सरकार ने एक धेला तक रिलीज नहीं किया।
इसके चलते इन तालाबों की खुदाई संभव नहीं हो सकी। लघु सिंचाई विभाग के एई डॉ. अनुराग गुप्ता ने स्वीकार किया कि डार्क एरिया में नए तालाबों की खुदाई के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन बजट नहीं आया।
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चेक डेम बने संकट मोचन
भले ही तालाब मद में शासन से बजट नहीं मिला, लेकिन पूर्व में बने चेक डैमों ने ग्राउंड वाटर रीचार्जिंग के मामले में संकटमोचन की भूमिका निभाई। जेई अंकित ने बताया कि टप्पल के गांव बझेड़ा भरतपुर में बने चेक डैम से यहां वर्षों से सूखे पड़े तालाब में पानी आ गया। आसपास के वाटर लेबल में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई।
नए दस चेक डैमों से वाटर लेबल में आएगी क्रांति
इगलास, खैर, चंडौस एवं टप्पल में हाल ही में करीब 1.80 करोड़ की धनराशि से दस चेक डैमों का निर्माण कराया है। अफसरों के मुताबिक यह चेक डैम एक दो दिनों में काम करने लगेंगे। यदि ऐसा हुआ तो इससे ग्राउंड वाटर लेबल में नई क्रांति आने के आसार हैं।
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जनपद के डार्क जोन में शामिल इगलास एवं चंडौस के साथ हाल ही में सामान्य की श्रेणी में आए खैर ब्लाक में भूगर्भ जल की सेहत सुधारने के लिए लघु सिंचाई विभाग ने दस बड़े तालाब बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
आकार बड़ा होने व गहराई अधिक होने के चलते इन तालाबों की मनरेगा से खुदाई संभव नहीं थी। अत: मशीनों से इन तालाबों की खुदाई के लिए अफसरों ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन वर्ष पर्यंत इंतजार के बावजूद भूगर्भ जल को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली योगी सरकार ने एक धेला तक रिलीज नहीं किया।
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इसके चलते इन तालाबों की खुदाई संभव नहीं हो सकी। लघु सिंचाई विभाग के एई डॉ. अनुराग गुप्ता ने स्वीकार किया कि डार्क एरिया में नए तालाबों की खुदाई के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन बजट नहीं आया।
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चेक डेम बने संकट मोचन
भले ही तालाब मद में शासन से बजट नहीं मिला, लेकिन पूर्व में बने चेक डैमों ने ग्राउंड वाटर रीचार्जिंग के मामले में संकटमोचन की भूमिका निभाई। जेई अंकित ने बताया कि टप्पल के गांव बझेड़ा भरतपुर में बने चेक डैम से यहां वर्षों से सूखे पड़े तालाब में पानी आ गया। आसपास के वाटर लेबल में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई।
नए दस चेक डैमों से वाटर लेबल में आएगी क्रांति
इगलास, खैर, चंडौस एवं टप्पल में हाल ही में करीब 1.80 करोड़ की धनराशि से दस चेक डैमों का निर्माण कराया है। अफसरों के मुताबिक यह चेक डैम एक दो दिनों में काम करने लगेंगे। यदि ऐसा हुआ तो इससे ग्राउंड वाटर लेबल में नई क्रांति आने के आसार हैं।