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शहर में फंगल इंफेक्शन की बीमारी का कहर
Updated Thu, 07 Jun 2018 02:00 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर में जंगल की आग की तरह फंगल इंफेक्शन की बीमारी फैल रही है। लगातार दूषित हो रहा भूजल, सब्जियों में जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा फर्टिलाइजर और स्वच्छता का ध्यान नहीं रखने के चलते इस समय शहर में जबरदस्त फंगल इंफेक्शन फैला हुआ है।
मलखान सिंह जिला अस्पताल की आयुष विभाग की ओपीडी के डाक्टरों की मानें तो इस समय शहरी इलाके में ही करीब 75 हजार से अधिक के लोग फंगल इंफेक्शन के शिकार हैं।
अस्पताल के डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि निजी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों की संख्या भी इसमें शामिल है।
डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि शहर के भुजपुरा, चतरखवालान, देहली गेट, सराय मियां, नगला आशिक अली, खैर रोड, नगला मसानी, सुपर कालोनी आदि जितनी भी मलिन बस्तियां हैं, वहां से सबसे ज्यादा मामले फंगल इंफ्फेक्शन के आ रहे हैं।
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यहां पर समस्या का एक पहलू यह भी है कि इस इलाके में मकदूम नगर के आसपास जो कुछ मीट फैक्ट्रियां हैं वह वेस्ट पानी को बिना सही से ट्रीट किए ही पानी में समा दे रही हैं। इससे भूजल योग्य करने लायक नहीं रह गया है। इसी पानी का इस्तेमाल दैनिक कामों में होता है जो फंगल का एक बड़ा कारण है।
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शहर में जंगल की आग की तरह फंगल इंफेक्शन की बीमारी फैल रही है। लगातार दूषित हो रहा भूजल, सब्जियों में जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा फर्टिलाइजर और स्वच्छता का ध्यान नहीं रखने के चलते इस समय शहर में जबरदस्त फंगल इंफेक्शन फैला हुआ है।
मलखान सिंह जिला अस्पताल की आयुष विभाग की ओपीडी के डाक्टरों की मानें तो इस समय शहरी इलाके में ही करीब 75 हजार से अधिक के लोग फंगल इंफेक्शन के शिकार हैं।
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अस्पताल के डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि निजी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों की संख्या भी इसमें शामिल है।
डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि शहर के भुजपुरा, चतरखवालान, देहली गेट, सराय मियां, नगला आशिक अली, खैर रोड, नगला मसानी, सुपर कालोनी आदि जितनी भी मलिन बस्तियां हैं, वहां से सबसे ज्यादा मामले फंगल इंफ्फेक्शन के आ रहे हैं।
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यहां पर समस्या का एक पहलू यह भी है कि इस इलाके में मकदूम नगर के आसपास जो कुछ मीट फैक्ट्रियां हैं वह वेस्ट पानी को बिना सही से ट्रीट किए ही पानी में समा दे रही हैं। इससे भूजल योग्य करने लायक नहीं रह गया है। इसी पानी का इस्तेमाल दैनिक कामों में होता है जो फंगल का एक बड़ा कारण है।