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...भीड़ के साथ चलते हैं, फिर भी अकेले हैं
Updated Wed, 18 Jul 2018 01:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रसिद्घ गीतकार डॉ. महावीर द्विवेदी की पांचवीं पुण्यतिथि पर ‘शिखर’ साहित्यिक संस्था की ओर से कवि सम्मेलन व संगोष्ठी हुई। इसमें आयकर आयुक्त (अपील) सुनील वाजपेई ने बरेली से पधारे प्रसिद्घ हास्य व्यंग्य के कवि आनंद गौतम को डॉ. महावीर द्विवेदी स्मृति सम्मान से नवाजा।
प्रसिद्घ व्यंग्यकार सुरेंद्र सुकुमार ने सुनाया ‘हर ओर छा गए हैं परधान जी के बेटे, सत्ता में आ गए हैं परधान जी के बेटे’। थ्री डॉट्स स्कूल की संस्थापिका डॉ. पुष्पा शर्मा ने पढ़ा ‘हम सबके साथ रहते हैं फिर भी अकेले रहते हैं, भीड़ के साथ चलते हैं फिर भी अकेले हैं’।
ओजस्वी कवि हरीश बेताब ने सुनाया ‘अब भी यारों कश्मीर में अपना झंडा जलता है अब भी गद्दारों का मेरे देश में सिक्का जलता है’। आनंद गौतम ने पढ़ा ‘उलझे हुए प्रश्नों का समाधान करें हम, आओ के अपने देश का उत्थान करें हम’। कवि अशोक अंजुम ने सुनाया ‘बरसना था नहीं बरसे जो फिर बरसे तो क्या बरसे, बहुत प्यासी है ये धरती, कोई बादल जरा बरसे’।
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गाजियाबाद से आईं शायरा तरुणा मिश्रा ने सुनाया ‘ऐसा नहीं कि पांव में छाले नहीं रहेे तकलीफ ये है देखने वाले नहीं रहे’। डॉ. मुजीब शहजर ने सुनाया ‘मांगे के पर कब छिन जाए, उड़ते हुए कब गिर जाओ, हम जैसे बे पर अच्छे हैं तुम जैसे परदारों से’।
इनके अलावा नरेंद्र शर्मा, श्रीओम वार्ष्णेय, डॉ. महावीर द्विवेदी की बेटी अवंतिका शर्मा, डॉ. दौलत शर्मा, सुधांशु, पूनम शर्मा पूर्णिमा, हरीशंकर, भारती शर्मा, वतन शहजादा ने रचनाएं पढ़ी। डॉ. महावीर द्विवेदी की पत्नी अखिलेश द्विवेदी, नवीन शर्मा, एससी अस्थाना, लालजी सिंह वर्मा ने कवियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। संयोजक नितिन नायाब ने सबका आभार जताया।
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प्रसिद्घ गीतकार डॉ. महावीर द्विवेदी की पांचवीं पुण्यतिथि पर ‘शिखर’ साहित्यिक संस्था की ओर से कवि सम्मेलन व संगोष्ठी हुई। इसमें आयकर आयुक्त (अपील) सुनील वाजपेई ने बरेली से पधारे प्रसिद्घ हास्य व्यंग्य के कवि आनंद गौतम को डॉ. महावीर द्विवेदी स्मृति सम्मान से नवाजा।
प्रसिद्घ व्यंग्यकार सुरेंद्र सुकुमार ने सुनाया ‘हर ओर छा गए हैं परधान जी के बेटे, सत्ता में आ गए हैं परधान जी के बेटे’। थ्री डॉट्स स्कूल की संस्थापिका डॉ. पुष्पा शर्मा ने पढ़ा ‘हम सबके साथ रहते हैं फिर भी अकेले रहते हैं, भीड़ के साथ चलते हैं फिर भी अकेले हैं’।
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ओजस्वी कवि हरीश बेताब ने सुनाया ‘अब भी यारों कश्मीर में अपना झंडा जलता है अब भी गद्दारों का मेरे देश में सिक्का जलता है’। आनंद गौतम ने पढ़ा ‘उलझे हुए प्रश्नों का समाधान करें हम, आओ के अपने देश का उत्थान करें हम’। कवि अशोक अंजुम ने सुनाया ‘बरसना था नहीं बरसे जो फिर बरसे तो क्या बरसे, बहुत प्यासी है ये धरती, कोई बादल जरा बरसे’।
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गाजियाबाद से आईं शायरा तरुणा मिश्रा ने सुनाया ‘ऐसा नहीं कि पांव में छाले नहीं रहेे तकलीफ ये है देखने वाले नहीं रहे’। डॉ. मुजीब शहजर ने सुनाया ‘मांगे के पर कब छिन जाए, उड़ते हुए कब गिर जाओ, हम जैसे बे पर अच्छे हैं तुम जैसे परदारों से’।
इनके अलावा नरेंद्र शर्मा, श्रीओम वार्ष्णेय, डॉ. महावीर द्विवेदी की बेटी अवंतिका शर्मा, डॉ. दौलत शर्मा, सुधांशु, पूनम शर्मा पूर्णिमा, हरीशंकर, भारती शर्मा, वतन शहजादा ने रचनाएं पढ़ी। डॉ. महावीर द्विवेदी की पत्नी अखिलेश द्विवेदी, नवीन शर्मा, एससी अस्थाना, लालजी सिंह वर्मा ने कवियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। संयोजक नितिन नायाब ने सबका आभार जताया।