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अलीगढ़... भाजपाई ब्लाक प्रमुख व उनके भाई पर एफआईआर के आदेश
Updated Mon, 21 May 2018 02:32 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
निजी कॉलेज के प्रबंधक साहब सिंह व उनके छोटे भाई भाजपा से अतरौली ब्लाक प्रमुख केहर सिंह के विरुद्ध कोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। सासनीगेट पला साहिबाबाद निवासी आप नेता कमल सिंह की याचिका पर दोनों भाईयों के खिलाफ यह आदेश दिया गया है।
याचिका में कहा गया था कि अलापुर गड़िया बन्नादेवी स्थित विद्यालय के संचालक साहब सिंह ने पला साहिबाबाद में एक से पांच तक व एक से आठ तक विद्यालय एक ही भवन में संचालित किया। रमेश चंद्र वर्ष 2010 में दोनों स्कूलों के प्रिंसिपल थे। बाद में फर्जीवाड़े की जानकारी होने पर उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।
इसे लेकर आरटीआई के तहत छात्रवृत्ति की जानकारी मांगी गई तो घपला सामने आया। उस समय कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई। 23 नवंबर 14 में आरोप पत्र दाखिल हुआ। याचिका में कहा गया कि विवेचना में छात्रों की संपूर्ण संख्या नहीं दर्शायी गई थी, इसलिए पुन: मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराई जाए। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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आदेश के विरुद्ध कमल सिंह ने यह दलील देते हुए रिवीजन दाखिल किया कि जो चार्जशीट पूर्व में दाखिल की गई, वह 2010-11 में हुए घोटाले से संबंधित थी। आगामी वर्ष का जिक्र नहीं किया गया। इस अपील पर रिवीजन स्वीकार कर ली। वादी पक्ष के वकील अशोक कुमार ने बताया कि कोर्ट ने इंस्पेक्टर सिविल लाइंस को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।
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निजी कॉलेज के प्रबंधक साहब सिंह व उनके छोटे भाई भाजपा से अतरौली ब्लाक प्रमुख केहर सिंह के विरुद्ध कोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। सासनीगेट पला साहिबाबाद निवासी आप नेता कमल सिंह की याचिका पर दोनों भाईयों के खिलाफ यह आदेश दिया गया है।
याचिका में कहा गया था कि अलापुर गड़िया बन्नादेवी स्थित विद्यालय के संचालक साहब सिंह ने पला साहिबाबाद में एक से पांच तक व एक से आठ तक विद्यालय एक ही भवन में संचालित किया। रमेश चंद्र वर्ष 2010 में दोनों स्कूलों के प्रिंसिपल थे। बाद में फर्जीवाड़े की जानकारी होने पर उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।
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इसे लेकर आरटीआई के तहत छात्रवृत्ति की जानकारी मांगी गई तो घपला सामने आया। उस समय कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई। 23 नवंबर 14 में आरोप पत्र दाखिल हुआ। याचिका में कहा गया कि विवेचना में छात्रों की संपूर्ण संख्या नहीं दर्शायी गई थी, इसलिए पुन: मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराई जाए। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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आदेश के विरुद्ध कमल सिंह ने यह दलील देते हुए रिवीजन दाखिल किया कि जो चार्जशीट पूर्व में दाखिल की गई, वह 2010-11 में हुए घोटाले से संबंधित थी। आगामी वर्ष का जिक्र नहीं किया गया। इस अपील पर रिवीजन स्वीकार कर ली। वादी पक्ष के वकील अशोक कुमार ने बताया कि कोर्ट ने इंस्पेक्टर सिविल लाइंस को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।