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परिंदों की तरह आसमान में उड़ने का संदेश दे रही आफरीन
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कौशल कुमार ओझा। अलीगढ़
पंख... इसका उच्चारण सुनते ही आजादी का बोध होता है। बिना किसी प्रतिबंध के आसमान में उड़ने की स्वतंत्रता। कुछ ऐसा ही संदेश लेकर रामपुर से एएमयू में आई हैं आफरीन खान। खासकर लड़कियों के लिए। वह चाहती हैं कि लड़कियां ख्वाब सजाएं और उसे साकार करने के लिए परिंदों की तरह खुले आसमान में ऊंची उड़ान भरें।
एएमयू फाइन आर्ट क्लब द्वारा तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव का आयोजन किया गया है। इसमें देश-विदेश के कलाकार पहुंचे हैं। रामपुर जेल रोड की आफरीन भी इसमें पहुंची हैं। बुधवार को वह यहां के छात्र-छात्राओं को परिंदों के पंख पर कला को उकेरने की बारीकियां समझाएंगी।
दरअसल आफरीन एएमयू से ही बीएफए उत्तीर्ण हैं और दिल्ली से स्नातकोत्तर करने के लिए प्रयासरत हैं। परिंदों के पंख पर कलाकारी के लिए छोटी सी उम्र में अच्छा नाम कमाया है। उनके हाथ के बने पोट्रेट एएमयू के मूसा डाकरी म्यूजियम एवं रामपुर स्थित रजा लाइब्रेरी में सजाया गया है।
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अमेरिकी दूतावास में उन्होंने अलग हटकर काम करने वाली महिलाओं पर आधारित श्रृंखला का प्रदर्शन किया था, जिसे खूब सराहा गया था। इसमें चील, कबूतर, कौआ, मोर एवं गरैया आदि के पंखों पर इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, कल्पना चावला, किरण वेदी, मैरीकॉम आदि के पोट्रेट बनाकर प्रदर्शित किया था।
ये सभी वैसी महिलाएं है जो अपने-अपने क्षेत्र में शीर्ष पर रही और औरतों के सम्मान को बुलंदी पर पहुंचायी। आफरीन एआर रहमान, जावेद अख्तर, राज्यपाल रामनाइक, एएमयू के पूर्व वीसी ले.जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह, वर्तमान वीसी प्रो. तारिक मंसूर, पूर्व मंत्री आजम खां से लेकर नोबल पुरस्कार विजेता तकाकी कजिता तक के पोट्रेट परिंदों के पंख पर बनाकर भेंट कर चुकी हैं।
आफरीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोट्रेट भी बना चुकी हैं, लेकिन अभी भेंट नहीं किया है। वह कहती हैं कि पंख को देखकर आजादी की फीलिंग होती है। इसीलिए परिंदों के पंख पर काम करने का ख्याल आया। महिलाओं के संदर्भ में यह बेहद सटीक बैठता है।
अल्लाह के 99 नाम...
गुजरात से आए कैलीग्राफी के ख्यात कलाकार गौरी यूसुफ हुसैन एवं मुल्तानी रूबिना ने करीब 200 छात्र-छात्राओं को कैलीग्राफी की बारीकियों को समझाया। एएमयू में चल रहे तीन दिवसीय कला महोत्सव के दूसरे दिन मोइनुद्दीन आर्ट गैलरी में आयोजित कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को अरेबिक कैलीग्राफी के बारे में जानकारी दी गई। अल्लाह के 99 नाम को प्रतिभागियों ने कलात्मक तरीके से उतारा।
एएमयू छात्रों का चाय प्यार...
एएमयू छात्रों का चाय प्यार जगजाहिर है। मजाक में तो छात्र कहते हैं कि उनके शरीर को काटो तो खून के बदले चाय निकलेगी। तीन दिवसीय कला महोत्सव में चाय की केतली को भी दर्शाया गया है। इसे बीकॉम सेकेंड ईयर के छात्र मो. जुनैद ने बनाया। वह केतली को राजस्थानी आंगन में दर्शाने का प्रयास किये है। यहां पर लड़कों से ज्यादा लड़कियों की भीड़ देखी जा रही है। फोटो खिंचवाने की तो होड़ मची है।
मोहसिन एवं हैदर की कला पर देर तक झूमते रहे छात्र
दिल्ली से आए कलाकार मोहसिन एवं एएमयू के हैदर सैफुल्लाह की कला पर छात्र-छात्रा देर रात तक झूमते रहे। कला महोत्सव के अंतर्गत सोमवार की रात्रि में कैनेडी आडिटोरियम में म्यूजिकल नाइट का आयोजन किया गया था।
इसमें मोहसिन ने वाद्ययंत्रों के बदले चाय पतीला, मटकी, चम्मच, कटोरी, कांगो आदि बजाकर दर्शकों को झूमा दिया। इन्हीं वाद्ययंत्रों के माध्यम से पंजाबी एवं बॉलीवुड गाने गाए। एएमयू के हैदर सैफुल्लाह ने भी एक से बढ़कर एक गाने प्रस्तुत किये। मोहसिन ने अपने वाद्य यंत्रों पर उनका साथ दिया।
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पंख... इसका उच्चारण सुनते ही आजादी का बोध होता है। बिना किसी प्रतिबंध के आसमान में उड़ने की स्वतंत्रता। कुछ ऐसा ही संदेश लेकर रामपुर से एएमयू में आई हैं आफरीन खान। खासकर लड़कियों के लिए। वह चाहती हैं कि लड़कियां ख्वाब सजाएं और उसे साकार करने के लिए परिंदों की तरह खुले आसमान में ऊंची उड़ान भरें।
एएमयू फाइन आर्ट क्लब द्वारा तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव का आयोजन किया गया है। इसमें देश-विदेश के कलाकार पहुंचे हैं। रामपुर जेल रोड की आफरीन भी इसमें पहुंची हैं। बुधवार को वह यहां के छात्र-छात्राओं को परिंदों के पंख पर कला को उकेरने की बारीकियां समझाएंगी।
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दरअसल आफरीन एएमयू से ही बीएफए उत्तीर्ण हैं और दिल्ली से स्नातकोत्तर करने के लिए प्रयासरत हैं। परिंदों के पंख पर कलाकारी के लिए छोटी सी उम्र में अच्छा नाम कमाया है। उनके हाथ के बने पोट्रेट एएमयू के मूसा डाकरी म्यूजियम एवं रामपुर स्थित रजा लाइब्रेरी में सजाया गया है।
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अमेरिकी दूतावास में उन्होंने अलग हटकर काम करने वाली महिलाओं पर आधारित श्रृंखला का प्रदर्शन किया था, जिसे खूब सराहा गया था। इसमें चील, कबूतर, कौआ, मोर एवं गरैया आदि के पंखों पर इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, कल्पना चावला, किरण वेदी, मैरीकॉम आदि के पोट्रेट बनाकर प्रदर्शित किया था।
ये सभी वैसी महिलाएं है जो अपने-अपने क्षेत्र में शीर्ष पर रही और औरतों के सम्मान को बुलंदी पर पहुंचायी। आफरीन एआर रहमान, जावेद अख्तर, राज्यपाल रामनाइक, एएमयू के पूर्व वीसी ले.जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह, वर्तमान वीसी प्रो. तारिक मंसूर, पूर्व मंत्री आजम खां से लेकर नोबल पुरस्कार विजेता तकाकी कजिता तक के पोट्रेट परिंदों के पंख पर बनाकर भेंट कर चुकी हैं।
आफरीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोट्रेट भी बना चुकी हैं, लेकिन अभी भेंट नहीं किया है। वह कहती हैं कि पंख को देखकर आजादी की फीलिंग होती है। इसीलिए परिंदों के पंख पर काम करने का ख्याल आया। महिलाओं के संदर्भ में यह बेहद सटीक बैठता है।
अल्लाह के 99 नाम...
गुजरात से आए कैलीग्राफी के ख्यात कलाकार गौरी यूसुफ हुसैन एवं मुल्तानी रूबिना ने करीब 200 छात्र-छात्राओं को कैलीग्राफी की बारीकियों को समझाया। एएमयू में चल रहे तीन दिवसीय कला महोत्सव के दूसरे दिन मोइनुद्दीन आर्ट गैलरी में आयोजित कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को अरेबिक कैलीग्राफी के बारे में जानकारी दी गई। अल्लाह के 99 नाम को प्रतिभागियों ने कलात्मक तरीके से उतारा।
एएमयू छात्रों का चाय प्यार...
एएमयू छात्रों का चाय प्यार जगजाहिर है। मजाक में तो छात्र कहते हैं कि उनके शरीर को काटो तो खून के बदले चाय निकलेगी। तीन दिवसीय कला महोत्सव में चाय की केतली को भी दर्शाया गया है। इसे बीकॉम सेकेंड ईयर के छात्र मो. जुनैद ने बनाया। वह केतली को राजस्थानी आंगन में दर्शाने का प्रयास किये है। यहां पर लड़कों से ज्यादा लड़कियों की भीड़ देखी जा रही है। फोटो खिंचवाने की तो होड़ मची है।
मोहसिन एवं हैदर की कला पर देर तक झूमते रहे छात्र
दिल्ली से आए कलाकार मोहसिन एवं एएमयू के हैदर सैफुल्लाह की कला पर छात्र-छात्रा देर रात तक झूमते रहे। कला महोत्सव के अंतर्गत सोमवार की रात्रि में कैनेडी आडिटोरियम में म्यूजिकल नाइट का आयोजन किया गया था।
इसमें मोहसिन ने वाद्ययंत्रों के बदले चाय पतीला, मटकी, चम्मच, कटोरी, कांगो आदि बजाकर दर्शकों को झूमा दिया। इन्हीं वाद्ययंत्रों के माध्यम से पंजाबी एवं बॉलीवुड गाने गाए। एएमयू के हैदर सैफुल्लाह ने भी एक से बढ़कर एक गाने प्रस्तुत किये। मोहसिन ने अपने वाद्य यंत्रों पर उनका साथ दिया।