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छोटी - मोटी समस्याओं से खत्म नहीं हो जाती जिंदगी
Updated Wed, 19 Jul 2017 01:38 AM IST
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छोटी - मोटी समस्याओं से खत्म नहीं हो जाती जिंदगी
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़
एएमयू के बीटेक फाइनल ईयर के छात्र फराज द्वारा आत्महत्या किये जाने के बाद मनोविज्ञान विभाग के शोधार्थी बेहद दुखी है। उन्हें इस बात को लेकर दुख है कि किसी कारण से निराश एवं अवसादगस्त छात्रों की वे लोग मदद नहीं कर पा रहे है। उनका मानना है कि निराश छात्रों को समय पर काउंसलिंग मिल जाए तो आत्महत्या जैसे कदम नहीं उठाएंगे।
मनोविज्ञान विभाग की डॉ. हुमा हिलाल का कहना है कि जिंदगी में छोटी-मोटी समस्याएं आती रहती है, वह स्थायी नहीं होती। परीक्षा में बैक लग जाने का मतलब जिंदगी खत्म कर लेना नहीं है।
अगली बार इससे बेहतर परिणाम दिए जा सकते है। जिंदगी में कुछ करने के लिए अन्य कई रास्ते भी हैं। शोध छात्र फैसल हसन रिजवी कहते है कि एएमयू के हर विभाग एवं हॉल में छात्रों के लिए काउंसलिंग सेंटर होना चाहिए ताकि किसी भी तरह की परेशानी होने पर उचित परामर्श उपलब्ध हो सकें। बीटेक छात्र फराज अपनी परेशानी अपने दोस्त या किसी शिक्षक से शेयर कर लिया होता तो शायद आत्मघाती कदम नहीं उठाता।
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उन्होंने कहा कि हमलोगों को विभाग एवं हॉल में जाकर छात्रों की काउंसलिंग करनी चाहिए। एएमयू मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं डिप्टी प्रॉक्टर प्रो. महमूद खान कहते है कि परीक्षा परिणाम के पहले ही छात्रों की काउंसलिंग हो तो अच्छे परिणाम आ सकते हैं। एएमयू में सोशल मीडिया में भी छात्र के आत्महत्या पर बहस चल रही है।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़
एएमयू के बीटेक फाइनल ईयर के छात्र फराज द्वारा आत्महत्या किये जाने के बाद मनोविज्ञान विभाग के शोधार्थी बेहद दुखी है। उन्हें इस बात को लेकर दुख है कि किसी कारण से निराश एवं अवसादगस्त छात्रों की वे लोग मदद नहीं कर पा रहे है। उनका मानना है कि निराश छात्रों को समय पर काउंसलिंग मिल जाए तो आत्महत्या जैसे कदम नहीं उठाएंगे।
मनोविज्ञान विभाग की डॉ. हुमा हिलाल का कहना है कि जिंदगी में छोटी-मोटी समस्याएं आती रहती है, वह स्थायी नहीं होती। परीक्षा में बैक लग जाने का मतलब जिंदगी खत्म कर लेना नहीं है।
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अगली बार इससे बेहतर परिणाम दिए जा सकते है। जिंदगी में कुछ करने के लिए अन्य कई रास्ते भी हैं। शोध छात्र फैसल हसन रिजवी कहते है कि एएमयू के हर विभाग एवं हॉल में छात्रों के लिए काउंसलिंग सेंटर होना चाहिए ताकि किसी भी तरह की परेशानी होने पर उचित परामर्श उपलब्ध हो सकें। बीटेक छात्र फराज अपनी परेशानी अपने दोस्त या किसी शिक्षक से शेयर कर लिया होता तो शायद आत्मघाती कदम नहीं उठाता।
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उन्होंने कहा कि हमलोगों को विभाग एवं हॉल में जाकर छात्रों की काउंसलिंग करनी चाहिए। एएमयू मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं डिप्टी प्रॉक्टर प्रो. महमूद खान कहते है कि परीक्षा परिणाम के पहले ही छात्रों की काउंसलिंग हो तो अच्छे परिणाम आ सकते हैं। एएमयू में सोशल मीडिया में भी छात्र के आत्महत्या पर बहस चल रही है।