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अभी तक नहीं बदली राशन व्यवस्था
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:47 AM IST
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योगी सरकार के 100 दिन पूरे पर नहीं बदली राशन व्यवस्था
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
सत्ता संभालते ही राशन वितरण प्रणाली को डिजीटलाइज्ड करने का वायदा करने वाली योगी सरकार को 100 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन तमाम दावों के बावजूद राशन वितरण प्रणाली में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।
अपात्र उपभोक्ताओं को सूची से बाहर करने के लिए पात्र-अपात्रों के सत्यापन का काम भी अब तक अधूरा है। बताते चलें कि अब तक मात्र 60 फीसदी उपभोक्ताओं का सत्यापन हो सका है।
कैश लैस डिजीटलाइज्ड व्यवस्था के लिए सभी राशन की दुकानों पर लगने वाली बायोमैट्रिक्स मशीनें मात्र शहरी क्षेत्र की दुकानों पर लग सकी हैं। देहाती क्षेत्रों की मशीनें अभी भी विभागीय दफ्तर में धूल फांकती नजर आती हैं।
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इसके चलते ग्रामीण उपभोक्ताओं को अभी भी पुरानी व्यवस्था के तहत राशन मिल रहा है। सूची में नाम होने के बावजूद मात्र कंप्यूटराइज्ड पर्ची न होने के कारण हजारों उपभोक्ता राशन से वंचित हैं।
रोजाना ढ़ेरो शिकायतें हो रही हैं। जिला पूर्ति अधिकारी नीरज कुमार ने स्वीकार किया कि लेखपाल, कानूनगो एवं अन्य कर्मचारियों के असहयोगात्मक रवैया के कारण उपभोक्ताओं के सत्यापन का काम अब तक 60 फीसदी हुआ है।
बायोमैट्रिक्स मशीनें भी मात्र शहरी क्षेत्र में लग सकी हैं। मात्र पर्ची पर राशन देने की शिकायतें मिलने की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी उपभोक्ता को मात्र पर्ची न होने का हवाला देकर राशन से वंचित नहीं किया जा सकता है।
अगर सूची में उसका नाम है, तो राशन डीलर को राशन देना ही होगा। सभी डीलरों को इस मामले में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद भी शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
सत्ता संभालते ही राशन वितरण प्रणाली को डिजीटलाइज्ड करने का वायदा करने वाली योगी सरकार को 100 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन तमाम दावों के बावजूद राशन वितरण प्रणाली में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।
अपात्र उपभोक्ताओं को सूची से बाहर करने के लिए पात्र-अपात्रों के सत्यापन का काम भी अब तक अधूरा है। बताते चलें कि अब तक मात्र 60 फीसदी उपभोक्ताओं का सत्यापन हो सका है।
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कैश लैस डिजीटलाइज्ड व्यवस्था के लिए सभी राशन की दुकानों पर लगने वाली बायोमैट्रिक्स मशीनें मात्र शहरी क्षेत्र की दुकानों पर लग सकी हैं। देहाती क्षेत्रों की मशीनें अभी भी विभागीय दफ्तर में धूल फांकती नजर आती हैं।
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इसके चलते ग्रामीण उपभोक्ताओं को अभी भी पुरानी व्यवस्था के तहत राशन मिल रहा है। सूची में नाम होने के बावजूद मात्र कंप्यूटराइज्ड पर्ची न होने के कारण हजारों उपभोक्ता राशन से वंचित हैं।
रोजाना ढ़ेरो शिकायतें हो रही हैं। जिला पूर्ति अधिकारी नीरज कुमार ने स्वीकार किया कि लेखपाल, कानूनगो एवं अन्य कर्मचारियों के असहयोगात्मक रवैया के कारण उपभोक्ताओं के सत्यापन का काम अब तक 60 फीसदी हुआ है।
बायोमैट्रिक्स मशीनें भी मात्र शहरी क्षेत्र में लग सकी हैं। मात्र पर्ची पर राशन देने की शिकायतें मिलने की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी उपभोक्ता को मात्र पर्ची न होने का हवाला देकर राशन से वंचित नहीं किया जा सकता है।
अगर सूची में उसका नाम है, तो राशन डीलर को राशन देना ही होगा। सभी डीलरों को इस मामले में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद भी शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।