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विद्यार्थियों के सामने संकट: एआई निगल रहा विदेशी भाषा का पूरा ज्ञान, विदेशी भाषा अनुवाद-व्याख्या में आई कमी

Mon, 31 Aug 2026 04:43 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 31 Aug 2026 04:43 PM IST
सार

एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने विदेशी भाषाओं के अनुवाद और व्याख्या से जुड़े काम को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी के विदेशी भाषा विभाग में फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, रशियन और चाइनीज भाषाएं पढ़ाई जाती हैं। इन भाषाओं में दक्ष विद्यार्थी के लिए मिलने वाले काम में कमी आई है।

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AI and the foreign language effect
एएमयू - फोटो : संवाद

विस्तार

एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विदेशी भाषा का पूरा ज्ञान निगल रहा है। एआई के चलते विदेशी भाषाओं के अनुवाद और व्याख्या करने में 50 फीसदी की गिरावट आई है। अलग-अलग देशों के दूतावास से अनुवाद और व्याख्या करने के लिए प्रोजेक्ट मिलता था, जिसमें 50 फीसदी की कमी आई। एएमयू में विदेशी भाषा पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

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एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने विदेशी भाषाओं के अनुवाद और व्याख्या से जुड़े काम को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी के विदेशी भाषा विभाग में फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, रशियन और चाइनीज भाषाएं पढ़ाई जाती हैं। इन भाषाओं में दक्ष विद्यार्थी अनुवादक, व्याख्या करना (इंटरप्रिटेशन), शिक्षक, शोधकर्ता और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में रोजगार के अवसर तलाशते हैं, लेकिन अब अनुवाद और व्याख्या करने के लिए मिलने वाले काम में कमी आई है। छात्र हर्ष कुमार ने बताया कि वह गुजरात की एक दवा कंपनी के लिए इंटरप्रिटेशन का काम करते थे, जिसमें कमी आई है।
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दूतावासों से मिलने वाले प्रोजेक्ट पर भी असर
विदेशी भाषा विभाग के शिक्षक डॉ. मुराद अहमद खान ने बताया कि पहले विभिन्न देशों के दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से दस्तावेजों के अनुवाद और कार्यक्रमों में व्याख्या के लिए नियमित रूप से प्रोजेक्ट मिलते थे। अब एआई के बढ़ते इस्तेमाल के चलते ऐसे कामों की मांग में कमी आई है।
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विशेषज्ञता की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता एआई
एएमयू के कॅरिअर काउंसलर साद हमीद ने बताया कि यह बात सही है कि एआई तेजी से अनुवाद करने में सक्षम है, लेकिन भाषा केवल शब्दों का अनुवाद नहीं है। संदर्भ, भाव, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, मुहावरे, कूटनीतिक भाषा और बातचीत के दौरान तत्काल प्रतिक्रिया के लिए मानव विशेषज्ञता अभी भी महत्वपूर्ण है।

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