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बिजली इंजीनियरों ने निजीकरण के विरोध में
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
इलैक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2018 के विरोध में बिजली विभाग के इंजीनियरों ने विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विरोध जताया है। साथ ही घोषणा की गई है कि यदि भारत सरकार ने विद्युत विभाग की समस्याओं का निराकरण नहीं किया तो बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा जाएगा।
समिति का दावा है कि इस बिल के लागू होने से बिजली विभाग में वितरण का निजीकरण कर दिया जाएगा।
इससे उपभोक्ताओं पर अनायास ही बोझ बढ़ जाएगा। विरोध प्रदर्शन के संबंध में नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी आफ इलैक्ट्रिसिटी इंप्लाई एंड इंजीनियर ने निर्णय लिया है। समिति की मांग है कि बिजली निगमों का एकीकरण कर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का पुर्नगठन किया जाए। साथ ही इलैक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2018 को वापस लिया जाए। आगरा फ्रेंचाइजी और ग्रेेटर नोएडा निजीकरण को निरस्त किया जाए। सन 2000 के बाद भर्ती सभी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए। बिजली कर्मियों की वेतन विसंगतियों का द्विपक्षीय वार्ता के जरिए तत्काल निराकरण किया जाए। सभी खाली पदों की नियमित भर्ती हो। तेलंगाना सरकार की तरह संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए। सरकारी क्षेत्र के बिजलीघरों का नवीनीकरण किया जाए। निजी घरानों से महंगी बिजली खरीद कर सरकारी बिजलीघरों को बंद करने की नीति समाप्त की जाए।
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इलैक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2018 के विरोध में बिजली विभाग के इंजीनियरों ने विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विरोध जताया है। साथ ही घोषणा की गई है कि यदि भारत सरकार ने विद्युत विभाग की समस्याओं का निराकरण नहीं किया तो बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा जाएगा।
समिति का दावा है कि इस बिल के लागू होने से बिजली विभाग में वितरण का निजीकरण कर दिया जाएगा।
इससे उपभोक्ताओं पर अनायास ही बोझ बढ़ जाएगा। विरोध प्रदर्शन के संबंध में नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी आफ इलैक्ट्रिसिटी इंप्लाई एंड इंजीनियर ने निर्णय लिया है। समिति की मांग है कि बिजली निगमों का एकीकरण कर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का पुर्नगठन किया जाए। साथ ही इलैक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2018 को वापस लिया जाए। आगरा फ्रेंचाइजी और ग्रेेटर नोएडा निजीकरण को निरस्त किया जाए। सन 2000 के बाद भर्ती सभी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए। बिजली कर्मियों की वेतन विसंगतियों का द्विपक्षीय वार्ता के जरिए तत्काल निराकरण किया जाए। सभी खाली पदों की नियमित भर्ती हो। तेलंगाना सरकार की तरह संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए। सरकारी क्षेत्र के बिजलीघरों का नवीनीकरण किया जाए। निजी घरानों से महंगी बिजली खरीद कर सरकारी बिजलीघरों को बंद करने की नीति समाप्त की जाए।
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