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मेरे चाहने वालों में थे मुश्ताक अहमद यूसुफी
Updated Fri, 22 Jun 2018 02:08 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पाकिस्तान के मशहूर उर्दू व्यंगकार मुश्ताक अहमद यूसुफी के निधन से उर्दू के प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार बेहद दुखी है। उनका कहना है कि मुश्ताक अहमद यूसुफी उनके चाहने वालों में से थे। उनकी पुस्तक आब-ए-गम को पद्मश्री आसमानी किताब मानते हैं। करीब 94 वर्ष के यूसुफी का बुधवार को निधन हुआ है।
प्रो. काजी अब्दुल सत्तार एवं मुश्ताक अहमद यूसुफी की कभी सीधी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन उर्दू साहित्य के दोनों दिग्गजों ने एक-दूसरे को पुस्तकों को माध्यम से समझा और करीब आए।
काजी अब्दुल सत्तार कहते हैं कि यूसुफी से उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई लेकिन मेरी नई पुस्तक या पुरस्कार पर उनका मुबारकबाद जरूर आ जाता था। कई बार उन्होंने फोन कर मुबारकबाद दी है। मेरे मित्र जब उनके पास जाते थे और वह उनका बहुत ख्याल रखते थे।
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प्रो. काजी अब्दुल सत्तार कहते है कि मुश्ताक अहमद यूसुफी का जाना साहित्य जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह उर्दू के सबसे बड़े व्यंगकार थे। मेरी नजर में उनकी पुस्तक आब-ए-गम आसमानी किताब है। उल्लेखनीय है कि यूसुफी राजस्थान में पैदा हुए थे और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एमए एवं एलएलबी की डिग्री हासिल की थी। विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान चला गया।
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पाकिस्तान के मशहूर उर्दू व्यंगकार मुश्ताक अहमद यूसुफी के निधन से उर्दू के प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार बेहद दुखी है। उनका कहना है कि मुश्ताक अहमद यूसुफी उनके चाहने वालों में से थे। उनकी पुस्तक आब-ए-गम को पद्मश्री आसमानी किताब मानते हैं। करीब 94 वर्ष के यूसुफी का बुधवार को निधन हुआ है।
प्रो. काजी अब्दुल सत्तार एवं मुश्ताक अहमद यूसुफी की कभी सीधी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन उर्दू साहित्य के दोनों दिग्गजों ने एक-दूसरे को पुस्तकों को माध्यम से समझा और करीब आए।
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काजी अब्दुल सत्तार कहते हैं कि यूसुफी से उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई लेकिन मेरी नई पुस्तक या पुरस्कार पर उनका मुबारकबाद जरूर आ जाता था। कई बार उन्होंने फोन कर मुबारकबाद दी है। मेरे मित्र जब उनके पास जाते थे और वह उनका बहुत ख्याल रखते थे।
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प्रो. काजी अब्दुल सत्तार कहते है कि मुश्ताक अहमद यूसुफी का जाना साहित्य जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह उर्दू के सबसे बड़े व्यंगकार थे। मेरी नजर में उनकी पुस्तक आब-ए-गम आसमानी किताब है। उल्लेखनीय है कि यूसुफी राजस्थान में पैदा हुए थे और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एमए एवं एलएलबी की डिग्री हासिल की थी। विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान चला गया।