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जेल में रक्षा सूत्र बांधते ही छूटी बहनों की रुलाई
Updated Tue, 08 Aug 2017 01:28 AM IST
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रक्षा सूत्र बांधते ही छूटी बहनों की रुलाई
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
हाथ में लगी पॉलिथीन में रेशम की डोरी से बनी राखी और पुड़िया में टीका (तिलक) लगाने का सामान थामे बहनें सोमवार सुबह से ही जिला कारागार के बाहर इकट्ठा होना शुरू हो गईं। चेहरे पर आतुरता के भाव और निगाहें कारागार के गेट पर टिकी थीं। इंतजार था तो सिर्फ इस बात का कि कब जेल का गेट खुले और बहनों को भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का मौका मिले। राखी बांधी तो घर परिवार की बात हुई। दिल की बात को दिल ने छुआ, रुलाई भी छूट गई। भाई से यह न देखा गया तो ढांढस बंधा दिया। प्रार्थना की कि अगला रक्षाबंधन अपने घर पर हो। भाई-बहन के असीम प्यार के इस पर्व पर बहनों की मुलाकात के लिए जेल प्रशासन का रुख भी लचीला रहा। जेल में सोमवार को 2500 बहनें मुलाकात के लिए पहुंचीं।
रविवार शाम से ही रक्षाबंधन को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से खासे इंतजाम किए गए थे। बिना पर्ची के बहनों की भाइयों से मुलाकात की व्यवस्था थी। साथ में सुरक्षा के लिहाज से जेल के अंदर ही घेवर बनवाकर बेचा गया। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक जेल में मुलाकात कराई गई। जेलर आवास से ही जेल को जाने वाली बहनों की एंट्री रोक दी गई थी। वहां से एक-एक बार में आठ-आठ मुलाकातियों को जेल में भेजा जा रहा था। ताकि किसी तरह की अफरातफरी न मचे। इस दौरान वरिष्ठ अधीक्षक आलोक सिंह व उनकी पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी रही।
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बहनों के भाई बने अधीक्षक-जेलर
जिला कारागर के महिला बैरक में जिन महिला बंदियों से कोई मिलने नहीं आया। इनसे खुद अधीक्षक तथा अन्य स्टाफ ने राखी बंधवाई और अपनी बहन बनाया।
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220 रुपये किलो बिका घेवर
जेल में बिना घाटा बिना मुनाफा पर घेवर बनाकर बेचा गया। यहां कुल 220 रुपये किलो के भाव से घेवर बेचा गया। सुरक्षा कारणों से हर बार की तरह इस बार भी बाहर से मिठाई लाना प्रतिबंधित रखा गया था।
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- जेल में बहनों की मुलाकात कराई गई है। सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रहीं और सुरक्षा कारणों से बाहर की मिठाई प्रतिबंधित रख अंदर मिठाई बनाकर बेची गई ।- आलोक सिंह अधीक्षक जेल
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
हाथ में लगी पॉलिथीन में रेशम की डोरी से बनी राखी और पुड़िया में टीका (तिलक) लगाने का सामान थामे बहनें सोमवार सुबह से ही जिला कारागार के बाहर इकट्ठा होना शुरू हो गईं। चेहरे पर आतुरता के भाव और निगाहें कारागार के गेट पर टिकी थीं। इंतजार था तो सिर्फ इस बात का कि कब जेल का गेट खुले और बहनों को भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का मौका मिले। राखी बांधी तो घर परिवार की बात हुई। दिल की बात को दिल ने छुआ, रुलाई भी छूट गई। भाई से यह न देखा गया तो ढांढस बंधा दिया। प्रार्थना की कि अगला रक्षाबंधन अपने घर पर हो। भाई-बहन के असीम प्यार के इस पर्व पर बहनों की मुलाकात के लिए जेल प्रशासन का रुख भी लचीला रहा। जेल में सोमवार को 2500 बहनें मुलाकात के लिए पहुंचीं।
रविवार शाम से ही रक्षाबंधन को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से खासे इंतजाम किए गए थे। बिना पर्ची के बहनों की भाइयों से मुलाकात की व्यवस्था थी। साथ में सुरक्षा के लिहाज से जेल के अंदर ही घेवर बनवाकर बेचा गया। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक जेल में मुलाकात कराई गई। जेलर आवास से ही जेल को जाने वाली बहनों की एंट्री रोक दी गई थी। वहां से एक-एक बार में आठ-आठ मुलाकातियों को जेल में भेजा जा रहा था। ताकि किसी तरह की अफरातफरी न मचे। इस दौरान वरिष्ठ अधीक्षक आलोक सिंह व उनकी पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी रही।
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बहनों के भाई बने अधीक्षक-जेलर
जिला कारागर के महिला बैरक में जिन महिला बंदियों से कोई मिलने नहीं आया। इनसे खुद अधीक्षक तथा अन्य स्टाफ ने राखी बंधवाई और अपनी बहन बनाया।
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220 रुपये किलो बिका घेवर
जेल में बिना घाटा बिना मुनाफा पर घेवर बनाकर बेचा गया। यहां कुल 220 रुपये किलो के भाव से घेवर बेचा गया। सुरक्षा कारणों से हर बार की तरह इस बार भी बाहर से मिठाई लाना प्रतिबंधित रखा गया था।
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- जेल में बहनों की मुलाकात कराई गई है। सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रहीं और सुरक्षा कारणों से बाहर की मिठाई प्रतिबंधित रख अंदर मिठाई बनाकर बेची गई ।- आलोक सिंह अधीक्षक जेल
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