{"_id":"61e72203b72e682d4952dffe","slug":"1977-assembly-elections-city-office-news-ali283383533","type":"story","status":"publish","title_hn":"1977 का विधानसभा चुनाव ः संयुक्त विपक्ष की आंधी में उड़ी कांग्रेस, दसों सीटों पर जनता पार्टी का कब्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1977 का विधानसभा चुनाव ः संयुक्त विपक्ष की आंधी में उड़ी कांग्रेस, दसों सीटों पर जनता पार्टी का कब्जा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इमरजेंसी के बाद कांग्रेस को पूरे प्रदेश के साथ-साथ अलीगढ़ में भी बुरे दौर से गुजरना पड़ा। 1977 के सातवें विधानसभा चुनाव में संयुक्त विपक्ष ने एकजुट होकर बनाई जनता पार्टी के बैनरतले हुए इस चुनाव में जिले की दसों सीटों पर कांग्रेस मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही, मगर एक भी सीट नहीं जीत सकी और दसों पर जनता पार्टी ने कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि इस चुनाव में जनसंघ के कल्याण सिंह व किशनलाल दिलेर जनता पार्टी के बैनरतले ही चुनाव लड़े और जीत दर्ज की।
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में चार राष्ट्रीय दल सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस, जनता पार्टी मैदान में थे, जबकि तीन राज्य स्तरीय दल ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, मुसलिम लीग, रेवोलेशनरी सोशलिस्ट पार्टी चुनाव मैदान में थे। इसके अलावा सात अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 352 पर जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस मात्र 47 सीटों पर रह गई और 16 पर निर्दल जीते। बाकी अन्य पार्टियों को दस सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।
अलीगढ़ ही इस संयुक्त विपक्ष की जनता पार्टी में अहम भूमिका
अलीगढ़ प्रदेश की सियासत में उस समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। एक तरफ चौ.चरण सिंह के अति करीबी चौ.राजेंद्र सिंह प्रदेश की सियासत के कद्दावर थे। दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव के करीबी बाबू सिंह यादव और तीसरी ओर जनसंघ का झंडा प्रदेश में उठाकर घूम रहे कल्याण सिंह प्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका में थे। जब इमरजेंसी के बाद संयुक्त विपक्ष एकजुट होने लगा तो सीपीआई, सीपीएम ने इसका सहयोग नहीं किया। बाकी कल्याण सिंह, बाबू सिंह व राजेंद्र सिंह के प्रयास पर प्रदेश के अन्य सभी दल एकजुट हुए और जनता पार्टी का गठन हुआ। इसके बाद कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से उखाड़ा फेंकने में अलीगढ़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जिले की सभी दस सीटों पर जीत भी दर्ज की।
विज्ञापन
इस तरह से थे दसों सीटों के परिणाम
-1 लाख 26 हजार 756 मतों वाली हाथरस सीट पर जेएनपी के रामशरण सिंह 21339 मत पाकर जीते और कांग्रेस के प्रेमचंद्र शर्मा 20783 मत पाकर हारे।
-1 लाख 29 हजार 824 मतों वाली सासनी सीट पर जेएनपी के डॉ.बंगाली सिंह 30974 मत पाकर जीते और कांग्रेस के धर्मपाल सिंह 16026 मत पाकर हारे।
-1 लाख 33 हजार 369 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर जेएनपी के नेम सिंह चौहान 27090 मत पाकर जीते और कांग्रेस के ओंकार सिंह 15456 मत पाकर हारे।
-1 लाख 30 हजार 920 मतों वाली गंगीरी सीट पर जेएनपी के बाबू सिंह यादव 32093 मत पाकर जीते और कांग्रेस के अनीसुर्रहमान शेरवानी 18851 मत पाकर हारे।
-1 लाख 30 हजार 729 मतों वाली अतरौली सीट पर जेएनपी के कल्याण सिंह 44439 मत पाकर जीते और कांग्रेस के अमर सिंह 25321 मत पाकर हारे।
-1 लाख 12 हजार 891 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर जेएनपी के मोअज्जि अली बेग 30775 मत पाकर जीते और कांग्रेस के ख्वाजा हलीम 28072 मत पाकर हारे।
-1 लाख 28 हजार 085 मतों वाली कोल सीट पर जेएनपी के किशनलाल दिलेर 33778 मत पाकर जीते और कांग्रेस के पूरनचंद्र 19769 मत पाकर हारे।
-1 लाख 25 हजार 615 मतों वाली इगलास सीट पर जेएनपी के राजेंद्र सिंह 36097 मत पाकर जीते और कांग्रेस के मुख्तियार सिंह 18026 मत पाकर हारे।
-1 लाख 25 हजार 771 मतों वाली बरौली सीट पर जेएनपी के संग्राम सिंह 28915 मत पाकर जीते और कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह चौहान 15261 मत पाकर हारे।
-1 लाख 31 हजार 112 मतों वाली खैर सीट पर जेएनपी के प्यारेलाल 30707 मत पाकर जीते और कांग्रेस के शिवराज सिंह 16365 मत पाकर हारे।
विज्ञापन
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में चार राष्ट्रीय दल सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस, जनता पार्टी मैदान में थे, जबकि तीन राज्य स्तरीय दल ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, मुसलिम लीग, रेवोलेशनरी सोशलिस्ट पार्टी चुनाव मैदान में थे। इसके अलावा सात अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 352 पर जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस मात्र 47 सीटों पर रह गई और 16 पर निर्दल जीते। बाकी अन्य पार्टियों को दस सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन
अलीगढ़ ही इस संयुक्त विपक्ष की जनता पार्टी में अहम भूमिका
अलीगढ़ प्रदेश की सियासत में उस समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। एक तरफ चौ.चरण सिंह के अति करीबी चौ.राजेंद्र सिंह प्रदेश की सियासत के कद्दावर थे। दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव के करीबी बाबू सिंह यादव और तीसरी ओर जनसंघ का झंडा प्रदेश में उठाकर घूम रहे कल्याण सिंह प्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका में थे। जब इमरजेंसी के बाद संयुक्त विपक्ष एकजुट होने लगा तो सीपीआई, सीपीएम ने इसका सहयोग नहीं किया। बाकी कल्याण सिंह, बाबू सिंह व राजेंद्र सिंह के प्रयास पर प्रदेश के अन्य सभी दल एकजुट हुए और जनता पार्टी का गठन हुआ। इसके बाद कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से उखाड़ा फेंकने में अलीगढ़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जिले की सभी दस सीटों पर जीत भी दर्ज की।
विज्ञापन
इस तरह से थे दसों सीटों के परिणाम
-1 लाख 26 हजार 756 मतों वाली हाथरस सीट पर जेएनपी के रामशरण सिंह 21339 मत पाकर जीते और कांग्रेस के प्रेमचंद्र शर्मा 20783 मत पाकर हारे।
-1 लाख 29 हजार 824 मतों वाली सासनी सीट पर जेएनपी के डॉ.बंगाली सिंह 30974 मत पाकर जीते और कांग्रेस के धर्मपाल सिंह 16026 मत पाकर हारे।
-1 लाख 33 हजार 369 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर जेएनपी के नेम सिंह चौहान 27090 मत पाकर जीते और कांग्रेस के ओंकार सिंह 15456 मत पाकर हारे।
-1 लाख 30 हजार 920 मतों वाली गंगीरी सीट पर जेएनपी के बाबू सिंह यादव 32093 मत पाकर जीते और कांग्रेस के अनीसुर्रहमान शेरवानी 18851 मत पाकर हारे।
-1 लाख 30 हजार 729 मतों वाली अतरौली सीट पर जेएनपी के कल्याण सिंह 44439 मत पाकर जीते और कांग्रेस के अमर सिंह 25321 मत पाकर हारे।
-1 लाख 12 हजार 891 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर जेएनपी के मोअज्जि अली बेग 30775 मत पाकर जीते और कांग्रेस के ख्वाजा हलीम 28072 मत पाकर हारे।
-1 लाख 28 हजार 085 मतों वाली कोल सीट पर जेएनपी के किशनलाल दिलेर 33778 मत पाकर जीते और कांग्रेस के पूरनचंद्र 19769 मत पाकर हारे।
-1 लाख 25 हजार 615 मतों वाली इगलास सीट पर जेएनपी के राजेंद्र सिंह 36097 मत पाकर जीते और कांग्रेस के मुख्तियार सिंह 18026 मत पाकर हारे।
-1 लाख 25 हजार 771 मतों वाली बरौली सीट पर जेएनपी के संग्राम सिंह 28915 मत पाकर जीते और कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह चौहान 15261 मत पाकर हारे।
-1 लाख 31 हजार 112 मतों वाली खैर सीट पर जेएनपी के प्यारेलाल 30707 मत पाकर जीते और कांग्रेस के शिवराज सिंह 16365 मत पाकर हारे।