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मिनी बस को महानगर परमिट से हटा लिया था

Fri, 07 Sep 2018 01:52 AM IST
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:52 AM IST
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मिनी बस को महानगर परमिट से हटा लिया था
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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मडराक थाना क्षेत्र में मंगलवार को आगरा-अलीगढ़ हाइवे पर हुई दो बसों की भिड़ंत के मामले में आरटीओ ने जिलाधिकारी को दो पेज की विस्तृत आख्या भेज दी है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया है कि सिटी बस बिना परमिट दौड़ रही थी। पूर्व में इस बस के नाम परमिट था। मगर अब परमिट बस से हटा लिया गया।

हालांकि आख्या में स्पष्ट उल्लेख नहीं है, मगर बताया गया है कि बस मालिक बदलने के बाद इस बस का परमिट हटाया गया है। आरटीओ ने दोनों गाड़ियों को फिट करार दिया है। आरआई ने भी दोनों गाड़ियां का टेक्नीकल मुआयना भी किया है। वहीं डीएम ने मामले में सिटी मजिस्ट्रेट को मजिस्ट्रेटी जांच सौंपी है।
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मंगलवार को बस संख्या यूपी 81बीटी 4054 व मिनी बस यूपी 81 एएफ 3848 में आमने सामने भिड़त हो गई। इस भिड़त में मंगलवार को 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि गुरुवार को एक और महिला की मौत हो गई।
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साथ ही दो दर्जन के करीब यात्री इसमें घायल हो गए। इसकी सूचना जैसे ही पुलिस-प्रशासन व परिवहन विभाग के अधिकारियों को हुई तो वह मौके पर दौड़ लिए। भीषण हादसे पर डीएम ने आरटीओ से दोनों बसों के संबंध में आख्या मांगी। आरटीओ ने डीएम को भेजी आख्या में बताया है कि यूपी 81 बीटी 4054 बस 54 सीटर गाड़ी है और इसके पास ऑल यूपी परमिट 10 अक्टूबर 2020 तक है।

यह बस भुजपुरा के मुल्लापाड़ा निवासी यामीन खान पुत्र फैयाज खान के नाम पंजीकृत है। जबकि इसे सुदामा का बास निवासी गुलाम हसन पुत्र सब्बीर अहमद चला रहा था। इसका लाइसेंस छह सितंबर 2019 तक वैध है। इस गाड़ी की फिटनेस वैधता 27 सितंबर 2018 तथा 31 अक्टूबर 2018 तक का टैक्स जमा है।

24 सीटर यूपी 81 एएफ 3848 मिनी बस केशव सिंह सोलंकी पुत्र शिवराज सिंह निवासी कृष्णापुरी मठिया के नाम पंजीकृत है। इसकी फिटनेस 20 सितंबर 2018 तक वैध है। मिनी बस के पास पूर्व में महानगर बस का स्थाई परमिट था जबकि वर्तमान में वाहन से परमिट हटा ली गई थी।

इसकी फिटनेस 16 नवंबर 2018 तक वैध है तथा टैक्स 30 सितंबर 2018 तक जमा है। इस बस के चालक के बारे में कोई प्रमाणिक सूचना नहीं मिल पाई है। अनौपचारिक बातचीत में यह जानकारी मिली है कि पूर्व मालिक ने बस नए मालिक को बेची, तब से बिना परमिट के चल रही थी।


वहीं चालक के पास कोई लाइसेंस नहीं था। इस मामले में जिलधिकारी चंद्रभूषण सिंह का कहना है कि आरटीओ की आख्या मिल गई है। अब सिटी मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी गई है। इस आख्या को जांच में शामिल किया जाएगा।
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