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आठ रुपये की दवा 35 रुपये में मंत्री से की शिकायत
Updated Sun, 18 Mar 2018 01:51 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्वास्थ्य विभाग में अंधता निवारण मिशन के तहत आपूर्ति हो रही दवाओं के भुगतान में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। सामाजिक संस्था नागरिक चेतना समिति की ओर से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत की गई है।
जिसमें आरोप लगाया है कि अंधता निवारण मिशन के तहत आपूर्ति हो रही दवाओं के भुगतान में नियमों को ताक पर रखकर आपूर्तिकर्ता के हितों की पूर्ति हो रही है। पत्र में अब तक हुए भुगतानों की कैट के माध्यम से जांच की मांग की गई है साथ ही होने वाले भुगतानों को रोकने की मांग की गई है।
नागरिक चेतना समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा भारत सरकार के अंधता निवारण मिशन का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए मरीजोें को ड्राप दी जाती है।
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जिसमें आल्फोकेम डी ड्राप शामिल है जिस पर 35 रुपये प्रिंट है। एक और ड्राप टोरजोन पी है जिस पर 65 रुपये प्रिंट है। हकीकत यह है कि इन जेनरिक दवाओं की कीमत मात्र छह और आठ रुपये है, लेकिन विभाग से प्रिंट रेट के मुताबिक ही भुगतान वसूला गया है। दवा आपूर्ति करने वाले लोग भाजपा से जुड़े हैं।
इसलिए विभाग भी इनके सामने ज्यादा सवाल जवाब नहीं कर पाता है। साल दर साल यह सिलसिला चल रहा है। पूरे मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से कैट के माध्यम से जांच कराए जाने के साथ ही भुगतान रोकने की भी मांग की है।
अगर ऐसा कुछ है तो मैं मामले की जांच करूंगा। सरकारी अभियान में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग में अंधता निवारण मिशन के तहत आपूर्ति हो रही दवाओं के भुगतान में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। सामाजिक संस्था नागरिक चेतना समिति की ओर से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत की गई है।
जिसमें आरोप लगाया है कि अंधता निवारण मिशन के तहत आपूर्ति हो रही दवाओं के भुगतान में नियमों को ताक पर रखकर आपूर्तिकर्ता के हितों की पूर्ति हो रही है। पत्र में अब तक हुए भुगतानों की कैट के माध्यम से जांच की मांग की गई है साथ ही होने वाले भुगतानों को रोकने की मांग की गई है।
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नागरिक चेतना समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा भारत सरकार के अंधता निवारण मिशन का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए मरीजोें को ड्राप दी जाती है।
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जिसमें आल्फोकेम डी ड्राप शामिल है जिस पर 35 रुपये प्रिंट है। एक और ड्राप टोरजोन पी है जिस पर 65 रुपये प्रिंट है। हकीकत यह है कि इन जेनरिक दवाओं की कीमत मात्र छह और आठ रुपये है, लेकिन विभाग से प्रिंट रेट के मुताबिक ही भुगतान वसूला गया है। दवा आपूर्ति करने वाले लोग भाजपा से जुड़े हैं।
इसलिए विभाग भी इनके सामने ज्यादा सवाल जवाब नहीं कर पाता है। साल दर साल यह सिलसिला चल रहा है। पूरे मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से कैट के माध्यम से जांच कराए जाने के साथ ही भुगतान रोकने की भी मांग की है।
अगर ऐसा कुछ है तो मैं मामले की जांच करूंगा। सरकारी अभियान में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ