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अलीगढ़... गोद लिए गांवों को छह माह में कुपोषण मुक्त कराने का लक्ष्य
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:45 AM IST
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गोद लिए गांवों को छह माह में कुपोषण मुक्त कराने का लक्ष्य
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
शबरी संकल्प योजना में अफसरों को उनके गोद लिए गांवों के बच्चों को छह माह के अंदर कुपोषण से मुक्त कराने का लक्ष्य दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी कुपोेषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर लिया जाए। इसके बाद बाल विकास, स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों का सहयोग लेकर इन बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के प्रयास किए जाएं।
मुख्य विकास अधिकारी दिनेश चंद्र विकास भवन सभागार में शबरी संकल्प योजना के तहत चल रहे पोषण पखवाड़ा के संबंध में हुई गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि शबरी संकल्प योजना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों को आपसी तालमेल बनाकर काम करना होगा।
उन्होंने योजना से सीधे जुड़े बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पूर्ति, खाद्य सुरक्षा, पंचायती राज आदि विभागों के अफसरों से कहा कि जल्द से जल्द कार्य योजना बनाकर योजना के नियमों के अनुसार काम करें। कोशिश की जाय कि छह माह में किसी भी गांव में अति कुपोषित बच्चों की लाल श्रेणी का एक भी बच्चा न रहे और इन गांवों की कम से कम 75 फीसदी गर्भवती माताओं को आयरन की गोली मिलना भी सुनिश्चित किया जाए।
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कुपोषित बच्चों के माता पिता को मनरेगा योजना में जाब कार्ड बनवाकर रोजगार दिया जाए। इस मौके पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयस कुमार समेत अन्य अफसर मौजूद थे।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
शबरी संकल्प योजना में अफसरों को उनके गोद लिए गांवों के बच्चों को छह माह के अंदर कुपोषण से मुक्त कराने का लक्ष्य दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी कुपोेषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर लिया जाए। इसके बाद बाल विकास, स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों का सहयोग लेकर इन बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के प्रयास किए जाएं।
मुख्य विकास अधिकारी दिनेश चंद्र विकास भवन सभागार में शबरी संकल्प योजना के तहत चल रहे पोषण पखवाड़ा के संबंध में हुई गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि शबरी संकल्प योजना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों को आपसी तालमेल बनाकर काम करना होगा।
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उन्होंने योजना से सीधे जुड़े बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पूर्ति, खाद्य सुरक्षा, पंचायती राज आदि विभागों के अफसरों से कहा कि जल्द से जल्द कार्य योजना बनाकर योजना के नियमों के अनुसार काम करें। कोशिश की जाय कि छह माह में किसी भी गांव में अति कुपोषित बच्चों की लाल श्रेणी का एक भी बच्चा न रहे और इन गांवों की कम से कम 75 फीसदी गर्भवती माताओं को आयरन की गोली मिलना भी सुनिश्चित किया जाए।
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कुपोषित बच्चों के माता पिता को मनरेगा योजना में जाब कार्ड बनवाकर रोजगार दिया जाए। इस मौके पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयस कुमार समेत अन्य अफसर मौजूद थे।