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18 सुझावों पर नहीं हुआ अमल एएमयू में फिर पहुंची पिस्तौल
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में आपराधिक गतिविधियों से नाता नया नहीं है। अक्सर एएमयू में अपराधियों के छिपे होने और छात्र गुटों के बीच झगड़े में फायरिंग की घटनाएं होती रहती हैं। इन्हीं घटनाक्रमों को लेकर जून में पुलिस की ओर से एएमयू इंतजामिया को 18 सुझाव सुरक्षा के बिंदु पर भेजे थे। मगर उन सुझावों पर कोई काम नहीं हुआ। इसी का परिणाम है कि दो दिन पहले कैंपस में छात्र बैग में पिस्तौल लेकर पहुंच गए और फायरिंग की। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि उन सुझावों पर क्या हुआ? पिस्तौल कैसे पहुंची? इस सवाल पर एएमयू की ओर से जांच कराने का राग अलापा जा रहा है।
जून की शुरुआत में एएमयू में छात्रों के प्रदर्शन, कैंपस में कुछ आपराधिक घटनाओं और शहर में हुईं कुछ लूट के बाद आरोपियों के कैंपस में जाकर छिपने के साक्ष्य मिले। सीसीटीवी जांच में पाया गया कि लूट के बाद आरोपी कैंपस में प्रवेश कर जा रहे हैं। फिर नहीं मिल रहे। इस पर पुलिस की ओर से एएमयू में अपराधियों के छिपे होने का हवाला देकर सुरक्षा के बिंदु पर 18 सुझाव भेजे गए थे। इसके बावजूद घटनाएं हो रही हैं। शनिवार को हुई घटना तो हैरान करने वाली है कि परीक्षा देने गए छात्र को निकलते ही घेरकर हमला किया और फायरिंग हुई। बैग में रखकर पिस्तौल लाई गई। मतलब कहीं कोई जांच पड़ताल नहीं।
- पुलिस की ओर से पूर्व में सुरक्षा को लेकर कुछ सुझाव दिए गए थे, जिन पर काम हुआ है। रहा सवाल बैग में छात्र के पिस्तौल लेकर पहुंचने का तो यह जांच का विषय है। इसमें कितनी सच्चाई है ये जांच के बाद उजागर होगा। पुलिस भी इस विषय पर अपने स्तर से जांच कर रही है।
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- डॉ. सैयद नवाज जैदी, डिप्टी प्रॉक्टर एएमयू।
हमले के आरोपियों ने खुद अपने पैरों में मारी गोलियां : जैद
एएमयू में शनिवार को दिन में फायरिंग की घटना के बाद आधी रात को पुरानी चुंगी पर फायरिंग में साजिश के आरोपी बनाए गए छात्र नेता जैद शेरवानी ने पलटवार किया है। जैद ने कहा कि आर्ट फैकल्टी पर हमले में नामजदों ने रात में खुद अपने पैरों में गोली मारकर नामजदगी की घटना को मैनेज करने का प्रयास किया है। यह मुकदमा झूठा दर्ज कराया गया है। मेरी नामजदगी गलत कराई गई है। यह साजिश रची गई है। जैद का कहना है कि मैं छात्र नेता हूं और छात्र हितों के लिए लड़ता हूं। इसी रंजिश में मुझे फंसाया गया है। मेरी नामजदगी से कैंपस पर दबाव बनेगा। सच ये है कि घटना के वक्त मैं बुखार में घर में था। इस घटना की सच्चाई से जांच हो और सीसीटीवी देखे जाएं। तभी कोई निर्णय लिया लाए। मेरा नाम मुकदमे से हटाया जाए। अन्यथा मैं मानहानी का दावा करूंगा।
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जून की शुरुआत में एएमयू में छात्रों के प्रदर्शन, कैंपस में कुछ आपराधिक घटनाओं और शहर में हुईं कुछ लूट के बाद आरोपियों के कैंपस में जाकर छिपने के साक्ष्य मिले। सीसीटीवी जांच में पाया गया कि लूट के बाद आरोपी कैंपस में प्रवेश कर जा रहे हैं। फिर नहीं मिल रहे। इस पर पुलिस की ओर से एएमयू में अपराधियों के छिपे होने का हवाला देकर सुरक्षा के बिंदु पर 18 सुझाव भेजे गए थे। इसके बावजूद घटनाएं हो रही हैं। शनिवार को हुई घटना तो हैरान करने वाली है कि परीक्षा देने गए छात्र को निकलते ही घेरकर हमला किया और फायरिंग हुई। बैग में रखकर पिस्तौल लाई गई। मतलब कहीं कोई जांच पड़ताल नहीं।
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- पुलिस की ओर से पूर्व में सुरक्षा को लेकर कुछ सुझाव दिए गए थे, जिन पर काम हुआ है। रहा सवाल बैग में छात्र के पिस्तौल लेकर पहुंचने का तो यह जांच का विषय है। इसमें कितनी सच्चाई है ये जांच के बाद उजागर होगा। पुलिस भी इस विषय पर अपने स्तर से जांच कर रही है।
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- डॉ. सैयद नवाज जैदी, डिप्टी प्रॉक्टर एएमयू।
हमले के आरोपियों ने खुद अपने पैरों में मारी गोलियां : जैद
एएमयू में शनिवार को दिन में फायरिंग की घटना के बाद आधी रात को पुरानी चुंगी पर फायरिंग में साजिश के आरोपी बनाए गए छात्र नेता जैद शेरवानी ने पलटवार किया है। जैद ने कहा कि आर्ट फैकल्टी पर हमले में नामजदों ने रात में खुद अपने पैरों में गोली मारकर नामजदगी की घटना को मैनेज करने का प्रयास किया है। यह मुकदमा झूठा दर्ज कराया गया है। मेरी नामजदगी गलत कराई गई है। यह साजिश रची गई है। जैद का कहना है कि मैं छात्र नेता हूं और छात्र हितों के लिए लड़ता हूं। इसी रंजिश में मुझे फंसाया गया है। मेरी नामजदगी से कैंपस पर दबाव बनेगा। सच ये है कि घटना के वक्त मैं बुखार में घर में था। इस घटना की सच्चाई से जांच हो और सीसीटीवी देखे जाएं। तभी कोई निर्णय लिया लाए। मेरा नाम मुकदमे से हटाया जाए। अन्यथा मैं मानहानी का दावा करूंगा।
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