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साहित्य भूषण सम्मान पशुपति को, अंजुम को मिला धर्मयुग पुरस्कार
Updated Sat, 01 Sep 2018 02:32 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने लेखक डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय को साहित्य भूषण सम्मान व कवि अशोक अंजुम को धर्मयुग पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह सम्मान वर्ष 2017 के लिए दिया गया है।
लेखक पशुपतिनाथ को साहित्य भूषण सम्मान के साथ दो लाख रुपये भी मिलेगा। वहीं, सर्जना पुरस्कार के तहत धर्मयुग पुरस्कार पत्रिका ‘अभिनव प्रयास’ के संपादक अशोक अंजुम को दिया जाएगा। उन्हें पुरस्कार के रूप में 40 हजार रुपये भी मिलेगा।
उपेक्षाओं की चादर हटी : उपाध्याय
डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय ने कहा कि अरसे बाद उपेक्षा की चादर हटी है। 28 पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। शांति प्रिय होकर अपने लेखन कार्य में लगा था। उन्हें उम्मीद थी कि कभी तो उनके कार्यों का फल मिलेगा। साहित्य भूषण सम्मान ने उनकी उम्मीद पूरी कर दी। हाथरस जिले के बागला इंटर कॉलेज से वर्ष 2010 में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी तरह से लेखन कार्य में जुट गया। आज भी चार घंटे पढ़ता हूं, तब दो घंटे लिखता हूं।
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पुरस्कार राशि को पत्रिका में लगाएंगे : अंजुम
धर्मयुग पुरस्कार के लिए नामित किए गए डॉ. अशोक अंजुम ने कहा कि वह बहुत खुश हैं। खुश होना लाजिमी भी है। वर्ष 1992 से निकलने वाली पत्रिका ‘अभिनव प्रयास’ की खातिर उन्हें यह पुरस्कार मिला है। इस पत्रिका के सलाहकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में ‘प्रयास’ के नाम से पत्रिका शुरू की थी। वर्ष 2009 में पत्रिका का रजिस्ट्रेशन होने के बाद ‘अभिनव प्रयास’ कर दिया गया। पुरस्कार राशि को पत्रिका में ही लगाऊंगा।
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने लेखक डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय को साहित्य भूषण सम्मान व कवि अशोक अंजुम को धर्मयुग पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह सम्मान वर्ष 2017 के लिए दिया गया है।
लेखक पशुपतिनाथ को साहित्य भूषण सम्मान के साथ दो लाख रुपये भी मिलेगा। वहीं, सर्जना पुरस्कार के तहत धर्मयुग पुरस्कार पत्रिका ‘अभिनव प्रयास’ के संपादक अशोक अंजुम को दिया जाएगा। उन्हें पुरस्कार के रूप में 40 हजार रुपये भी मिलेगा।
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उपेक्षाओं की चादर हटी : उपाध्याय
डॉ. पशुपतिनाथ उपाध्याय ने कहा कि अरसे बाद उपेक्षा की चादर हटी है। 28 पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। शांति प्रिय होकर अपने लेखन कार्य में लगा था। उन्हें उम्मीद थी कि कभी तो उनके कार्यों का फल मिलेगा। साहित्य भूषण सम्मान ने उनकी उम्मीद पूरी कर दी। हाथरस जिले के बागला इंटर कॉलेज से वर्ष 2010 में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी तरह से लेखन कार्य में जुट गया। आज भी चार घंटे पढ़ता हूं, तब दो घंटे लिखता हूं।
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पुरस्कार राशि को पत्रिका में लगाएंगे : अंजुम
धर्मयुग पुरस्कार के लिए नामित किए गए डॉ. अशोक अंजुम ने कहा कि वह बहुत खुश हैं। खुश होना लाजिमी भी है। वर्ष 1992 से निकलने वाली पत्रिका ‘अभिनव प्रयास’ की खातिर उन्हें यह पुरस्कार मिला है। इस पत्रिका के सलाहकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में ‘प्रयास’ के नाम से पत्रिका शुरू की थी। वर्ष 2009 में पत्रिका का रजिस्ट्रेशन होने के बाद ‘अभिनव प्रयास’ कर दिया गया। पुरस्कार राशि को पत्रिका में ही लगाऊंगा।