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नए ज्ञान के लिए करें शोध : जेपी
Updated Wed, 17 Jan 2018 01:28 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
डीएस कॉलेज के शिक्षक डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि शोध उपाधि के लिए नहीं, बल्कि शोध को नई समस्या के निराकरण और नए ज्ञान के लिए करना चाहिए।
मंगलवार को वह इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फार्मेशन मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में शिक्षक-शिक्षा संकाय के तत्वावधान में ‘रिसर्च मेथोडोलॉजी’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शोध में नवीनता का समावेश होना चाहिए। डॉ. विक्रांत उपाध्याय ने कहा कि जब से सभ्यता का विकास हुआ, तब से शोध कार्य का आरंभ हो गया। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मनुष्य आम जिंदगी में शोध करता है।
डॉ. शिवराज कुमार ने लिटरेचर रिव्यू, ऑब्जेक्टिव फोरमूलेशन, हाइपोथेसिस फोरमेशन को विस्तृत रूप से परिभाषित किया। डॉ. गिर्राज किशोर ने रिसर्च डिजाइन, सनोफसिस, स्टेटीकल टेक्निक्स, एनालाइसिस, कनक्लूजन रिफरेंसेज पर चर्चा की।
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कार्यशाला में संजय सिंह, नरेश, प्रीति, मनीष, संजय कुमार, भावना, स्नेहलता शर्मा, सुरेखा, भुवनेश ने शोध पर जिज्ञासा को विशेषज्ञों के समक्ष रखा। शुभारंभ आईआईएमटी सचिव पंकज महलवार, रजिस्ट्रार डॉ. बिजेंद्र सिंह, प्राचार्य शंभू केएन सिंह रावत, कार्यशाला कनवीनर डॉ. अंजू सक्सेना, चेयरपर्सन डॉ. एसएफ उस्मानी, मदर टेरेसा प्राचार्या डॉ. स्वर्णलता याज्ञनिक ने दीप जलाकर किया।
संचालन डॉ. अजीता सिंह व स्वाती कुमारी ने किया। इस मौके पर डॉ. शिवराज कुमार, डॉ. गिर्राज किशोर, दूसरे राज्यों से शोधार्थी, रिसर्च स्कालर, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. एसके गुप्ता, डॉ. मनीषा गुप्ता, डॉ. इंदू सिंह, डॉ. गोविंद वार्ष्णेय, कुलदीप गौड़ आदि मौजूद रहे।
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डीएस कॉलेज के शिक्षक डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि शोध उपाधि के लिए नहीं, बल्कि शोध को नई समस्या के निराकरण और नए ज्ञान के लिए करना चाहिए।
मंगलवार को वह इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फार्मेशन मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में शिक्षक-शिक्षा संकाय के तत्वावधान में ‘रिसर्च मेथोडोलॉजी’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शोध में नवीनता का समावेश होना चाहिए। डॉ. विक्रांत उपाध्याय ने कहा कि जब से सभ्यता का विकास हुआ, तब से शोध कार्य का आरंभ हो गया। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मनुष्य आम जिंदगी में शोध करता है।
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डॉ. शिवराज कुमार ने लिटरेचर रिव्यू, ऑब्जेक्टिव फोरमूलेशन, हाइपोथेसिस फोरमेशन को विस्तृत रूप से परिभाषित किया। डॉ. गिर्राज किशोर ने रिसर्च डिजाइन, सनोफसिस, स्टेटीकल टेक्निक्स, एनालाइसिस, कनक्लूजन रिफरेंसेज पर चर्चा की।
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कार्यशाला में संजय सिंह, नरेश, प्रीति, मनीष, संजय कुमार, भावना, स्नेहलता शर्मा, सुरेखा, भुवनेश ने शोध पर जिज्ञासा को विशेषज्ञों के समक्ष रखा। शुभारंभ आईआईएमटी सचिव पंकज महलवार, रजिस्ट्रार डॉ. बिजेंद्र सिंह, प्राचार्य शंभू केएन सिंह रावत, कार्यशाला कनवीनर डॉ. अंजू सक्सेना, चेयरपर्सन डॉ. एसएफ उस्मानी, मदर टेरेसा प्राचार्या डॉ. स्वर्णलता याज्ञनिक ने दीप जलाकर किया।
संचालन डॉ. अजीता सिंह व स्वाती कुमारी ने किया। इस मौके पर डॉ. शिवराज कुमार, डॉ. गिर्राज किशोर, दूसरे राज्यों से शोधार्थी, रिसर्च स्कालर, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. एसके गुप्ता, डॉ. मनीषा गुप्ता, डॉ. इंदू सिंह, डॉ. गोविंद वार्ष्णेय, कुलदीप गौड़ आदि मौजूद रहे।