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चुनाव से पहले एक-दूसरे के खेमों में सेंधमारी
Updated Mon, 13 Nov 2017 01:26 AM IST
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चुनाव से पहले एक-दूसरे के खेमों में सेंधमारी
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़
नगर निकाय चुनाव का प्रचार अब परवान चढ़ रहा है। डोर-टू-डोर जनसंपर्क के साथ नुक्कड़ सभाओं के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश हो रही है। प्रत्याशी और उनके चुनाव एजेंट अपना किला सुरक्षित करने और दूसरे दलों के किले में सेंधमारी करने की कोशिश में लगे हैं।
सभी दलों में विरोधियों के समर्थकों को अपने पाले में खींचने की होड़ लगी है। पिछले कुछ दिनों में तोड़फोड़ की इस राजनीति में तेजी आई है। दूसरे दलों के धुरंधरों को अपने पाले में खींचकर लाने में बसपा, भाजपा, सपा और कांग्रेस सभी जुट गए हैं।
सपा के इरशाद का ताजा प्रकरण कुछ ऐसी ही राजनीति को दर्शाता है। जो पहले सपा छोड़ कर बसपा में गए और बाद में सपा में लौट आए। तोड़फोड़ के इस खेल के बीच उन बड़े परिवारों को भी साधने की कोशिश चल रही है, जिनमें वोटों की संख्या अच्छी-खासी है।
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इन परिवारों के मुखिया को उनके संबंधी या परिचितों के जरिये प्रत्याशियों के पक्ष में लामबंद करने की कोशिश अंदरखाने चल रही है। प्रत्याशियों और उनके चुनाव एजेंट्स का लक्ष्य है कि अगर उन्होंने बड़े परिवारों को साध लिया तो चुनावी नैया पार करने में आसानी हो जाएगी।
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ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़
नगर निकाय चुनाव का प्रचार अब परवान चढ़ रहा है। डोर-टू-डोर जनसंपर्क के साथ नुक्कड़ सभाओं के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश हो रही है। प्रत्याशी और उनके चुनाव एजेंट अपना किला सुरक्षित करने और दूसरे दलों के किले में सेंधमारी करने की कोशिश में लगे हैं।
सभी दलों में विरोधियों के समर्थकों को अपने पाले में खींचने की होड़ लगी है। पिछले कुछ दिनों में तोड़फोड़ की इस राजनीति में तेजी आई है। दूसरे दलों के धुरंधरों को अपने पाले में खींचकर लाने में बसपा, भाजपा, सपा और कांग्रेस सभी जुट गए हैं।
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सपा के इरशाद का ताजा प्रकरण कुछ ऐसी ही राजनीति को दर्शाता है। जो पहले सपा छोड़ कर बसपा में गए और बाद में सपा में लौट आए। तोड़फोड़ के इस खेल के बीच उन बड़े परिवारों को भी साधने की कोशिश चल रही है, जिनमें वोटों की संख्या अच्छी-खासी है।
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इन परिवारों के मुखिया को उनके संबंधी या परिचितों के जरिये प्रत्याशियों के पक्ष में लामबंद करने की कोशिश अंदरखाने चल रही है। प्रत्याशियों और उनके चुनाव एजेंट्स का लक्ष्य है कि अगर उन्होंने बड़े परिवारों को साध लिया तो चुनावी नैया पार करने में आसानी हो जाएगी।