फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   दवा दी न रोटी बस चार दिन से देखते रहे जिंदा है कि मर गया

दवा दी न रोटी बस चार दिन से देखते रहे जिंदा है कि मर गया

Fri, 22 Jun 2018 02:04 AM IST
Updated Fri, 22 Jun 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
दवा दी न रोटी बस चार दिन से देखते रहे जिंदा है कि मर गया
न्यूज डेस्क, गंगीरी (अलीगढ़)।
विज्ञापन


संवेदनाएं और सामाजिक परिवेश किस तरह जनमानस से दूर होते जा रहे हैं यह गंगीरी क्षेत्र के गांव भदरोई में साफ नजर आया। करीब 30 वर्षीय दिव्यांग सतेंद्र वाल्मीकि बुखार से पीड़ित था। इसके चलते वह गांव अथवा गांव के बाहर खाने के लिए राशन मांगने नहीं जा पाया। बुखार और भूख से बेहाल होकर वह चारपाई पर बेहोश पड़ा रहा। गांव के लोग उसके घर पर आते। देखते और चले जाते। किसी ने न दो टुकड़े रोटी के दिए न हलक में दो बूंद पानी की डाली।

गुरुवार को ‘अमर उजाला’ सतेंद्र वाल्मीकि के घर पहुंचा तो कुछ लोगों की संवेदनाएं जगीं। एक व्यक्ति अपनी बाइक में बिठाकर उसे डॉक्टर के पास इलाज कराने ले गया। कुछ अन्य लोग अनाज और रोटी उसके घर पर रख आए ताकि वह खा सके।
विज्ञापन


भदरोई निवासी सतेंद्र वाल्मीकि के माता-पिता की कई साल पहले मौत हो चुकी है। वह अकेले घर पर रहते हैं। लोगाें की मदद से राशन मिल जाता तो खुद ही घर पर खाना बना लेता लेकिन इधर कुछ दिनों से राशन की समस्या रही। राशन और दरवाजे हैंडपंप के लिए प्रधान से गुहार लगाई थी लेकिन उन्होंने भी बात अनसुनी कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


चार दिन से भूख, प्यास और बुखार से तड़पते हुए सतेंद्र चारपाई पर गिरकर बेहोश हो गया। किसी ने देखा तो गांव में बात फैली। बच्चे, महिलाएं और बड़े सभी पहुंचकर सिर्फ देखते और चलते बनते और भगवान भरोसे छोड़कर चलते बनते। ग्राम प्रधान ने भी गांव के मुखिया होने के नाते संवेदना नहीं दिखाई। ‘अमर उजाला’ के पहुंचने के बाद अनीश उसे अपनी बाइक पर बाजीतपुर (हाथरस) में चिकित्सक के पास इलाज कराने ले गए।

स्वजातीय परिवार भी नजरें फेरे रहा
भदरोई में वाल्मीकि समाज के 12 घर हैं, जिनमें सतेंद्र के अलावा एक अन्य परिवार गांव में रहता है। अन्य लोग घर पर ताला डालकर दिल्ली में रहकर काम कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में रहने वाला स्वजातीय परिवार उससे बोलचाल का वास्ता नहीं रखता।


कोट
- चार दिन से बुखार में चला फिरा नहीं गया तो कहीं से मांग कर भी नहीं ला सका। बुखार में भूखा रहने से बेहोश हुआ है। - दुर्गा प्रसाद।
- सतेंद्र का व्यवहार अच्छा है, लेकिन दलित होने के कारण लोग मदद नहीं करना चाहते हैं। बेचारा भगवान भरोसे है। - राजपाल सिंह।
- मुझे जैसे ही पता चला तो मैं अपनी बाइक लेकर पहुंचा और इलाज कराने के लिए बाजीतपुर डॉक्टर के पास ले जा रहा हूं। - अनीश।

बोले ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान राजू सिंह गोवर्धनपुर गांव के निवासी हैं। उनके अनुसार 20 दिन पहले सतेंद्र हैंडपंप लगवाने की मांग करने आया था। इस पर कहा कि नए हैंडपंप तो नहीं हैं। कोई रिबोर हैंडपंप होगा तो तुम्हारे दरवाजे लगवा दूंगा। चार दिन से खाना न मिलने से वह बेहोश हो गया। मुझे किसी ने सूचना नहीं दी। गांव पहुंचकर उसका इलाज कराऊंगा। खाने के लिए राशन दिलवाऊंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed