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आरक्षण बिगाड़ देगा खेल का भविष्य : गांगुली
Updated Tue, 23 Oct 2018 02:08 AM IST
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व प्रशिक्षक बुला गांगुली ने हाल ही में खेल निदेशालय उत्तर प्रदेश के स्टेडियम में अंशकालिक प्रशिक्षकों की तैनाती में आरक्षण व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि यह आरक्षण व्यवस्था खेल के भविष्य को बिगाड़ देगा। ऊंच-नीच, जाति-पात दूर हो, नहीं तो बरसों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। ओलंपिक में मेडल जीतने के सपने भी टूट जाएंगे।
बुला गांगुली डीएस कॉलेज में चल रही अखिल भारतीय महिला हॉकी प्रतियोगिता में बतौर अतिथि आई हैं। देश को कई खिलाड़ी देने वालीं बुला कहती हैं कि एनआईएस में प्रवेश के लिए मानक तय होना चाहिए। पारदर्शी होनी चाहिए। यही वजह है कि अच्छे कोच नहीं मिल पा रहे हैं। जीरो डिग्री पर गियर (कोच) हैं, अच्छे कोच की दरकार है। बुला का कहना है कि किसी पर भी पाबंदी लगाओ, उसे दबा और कुचल सकते हैं, लेकिन जिसे जहां पहुंचना है, वो वहीं पहुंच जाएगा। मुझे भी ताने सहने पड़े। तानों की परवाह किए बगैर आगे बढ़ती गई और ताने मारने वाले चुप हो गए। अब देश में बेटियों को उड़ने का मौका खूब मिल रहा है। संकीर्ण मानसिकता सिमट रही है।
कौन हैं बुला गांगुली
बुला गांगुली अपने जमाने की हॉकी की बेहतरीन खिलाड़ी रही हैं। टीम इंडिया में खेलने के साथ ही मैनेजर व प्रशिक्षक की भूमिका भी रही हैं। इन्होंने ही उत्तर प्रदेश में पहली बार बालिकाओं के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ में हॉकी की शुरुआत की थी। इसके बाद स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में भी बालिकाओं के लिए हॉकी की शुरुआत की। इसके बाद बिहार व कर्नाटक में भी उत्तर प्रदेश के तर्ज पर यह व्यवस्था शुरू हुई।
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हॉकी से कर ली शादी
बुला कहती हैं कि मैंने अपनी शादी हॉकी से कर ली है। यही मेरी जिंदगी है। हॉकी को मैं छोड़ नहीं सकती और हॉकी मुझे। हॉकी की तरक्की में तन-मन व धन से लगी रही। वक्त ही नहीं मिला कि शादी के बारे में सोच सकूं।
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भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व प्रशिक्षक बुला गांगुली ने हाल ही में खेल निदेशालय उत्तर प्रदेश के स्टेडियम में अंशकालिक प्रशिक्षकों की तैनाती में आरक्षण व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि यह आरक्षण व्यवस्था खेल के भविष्य को बिगाड़ देगा। ऊंच-नीच, जाति-पात दूर हो, नहीं तो बरसों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। ओलंपिक में मेडल जीतने के सपने भी टूट जाएंगे।
बुला गांगुली डीएस कॉलेज में चल रही अखिल भारतीय महिला हॉकी प्रतियोगिता में बतौर अतिथि आई हैं। देश को कई खिलाड़ी देने वालीं बुला कहती हैं कि एनआईएस में प्रवेश के लिए मानक तय होना चाहिए। पारदर्शी होनी चाहिए। यही वजह है कि अच्छे कोच नहीं मिल पा रहे हैं। जीरो डिग्री पर गियर (कोच) हैं, अच्छे कोच की दरकार है। बुला का कहना है कि किसी पर भी पाबंदी लगाओ, उसे दबा और कुचल सकते हैं, लेकिन जिसे जहां पहुंचना है, वो वहीं पहुंच जाएगा। मुझे भी ताने सहने पड़े। तानों की परवाह किए बगैर आगे बढ़ती गई और ताने मारने वाले चुप हो गए। अब देश में बेटियों को उड़ने का मौका खूब मिल रहा है। संकीर्ण मानसिकता सिमट रही है।
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कौन हैं बुला गांगुली
बुला गांगुली अपने जमाने की हॉकी की बेहतरीन खिलाड़ी रही हैं। टीम इंडिया में खेलने के साथ ही मैनेजर व प्रशिक्षक की भूमिका भी रही हैं। इन्होंने ही उत्तर प्रदेश में पहली बार बालिकाओं के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ में हॉकी की शुरुआत की थी। इसके बाद स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में भी बालिकाओं के लिए हॉकी की शुरुआत की। इसके बाद बिहार व कर्नाटक में भी उत्तर प्रदेश के तर्ज पर यह व्यवस्था शुरू हुई।
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हॉकी से कर ली शादी
बुला कहती हैं कि मैंने अपनी शादी हॉकी से कर ली है। यही मेरी जिंदगी है। हॉकी को मैं छोड़ नहीं सकती और हॉकी मुझे। हॉकी की तरक्की में तन-मन व धन से लगी रही। वक्त ही नहीं मिला कि शादी के बारे में सोच सकूं।