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हड़ताल में मौतों के जिम्मेदारों पर दर्ज हो हत्या का मुकदमा
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:00 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू छात्र से रेजीडेंट डॉक्टरों के विवाद के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान 15 मरीजों की मौत को मुद्दा बनाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के लिए सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की गई है।
भारतीय समाज सेवक संगठन की ओर से दायर की गई इस याचिका में एएमयू कुलपति व तीन चिकित्सकों को आरोपी बनाकर मुकदमा दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है। इस याचिका को अदालत ने प्रकीर्ण वाद के रूप में स्वीकारते हुए थाना पुलिस से आख्या भी मांगी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 20 अप्रैल को होगी।
भारतीय समाज सेवक संगठन बीएसएसएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी इफ्र ाहीम हुसैन ने अधिवक्ता अशोक कुमार के माध्यम से इस संबंध में एक याचिका सीजेएम कोर्ट में दायर की है। इसमें आरडीए अध्यक्ष डॉ. अहमद अब्दुल्लाह, उपाध्यक्ष डॉ. दीपक अग्रवाल, आरडीए से ही डॉ. महताब आलम व एएमयू कुलपति प्रो.तारिक मंसूर व अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया है।
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इस याचिका में कहा गया है कि आरडीए द्वारा गैरकानूनी हड़ताल की गई थी। इस दौरान 15 मरीजों की मौत हो गई। इसी तरह अप्रैल 2017 में हुई हड़ताल में 5 मौत हुई थीं। एएमयू में कानून व लोकतंत्र का कोई खौफ नहीं है। न इंसानियत की कोई अहमियत है। इस हड़ताल के दौरान डॉक्टरों का एक अमानवीय चेहरा यह भी सामने आया कि एक मरीज के हाथ पैर बांध दिए गए। मगर जांच में किसी को इसका दोषी नहीं पाया गया। इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है।
याचिका में कहा गया है कि एएमयू कुलपति को सभी अधिकार हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपने अधिकारों का प्रयोग न करते हुए हड़ताल खत्म कराने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिला प्रशासन की एस्मा की चेतावनी के बाद भी दोषी डॉक्टर्स ने कोई तवज्जो नहीं दी। हड़ताल के पीछे बड़ी साजिश यह भी थी कि मरीज मजबूरन शहर के निजी अस्पतालों में जाएंगे और इसका कमीशन आरोपियों को मिलेगा। अत: यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
ऐसे में इसके लिए जिम्मेदार डॉक्टर्स और अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला चलाया जाए। इसकी शिकायत डीएम व एसएसपी से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तदुपरांत आईजी अलीगढ़ को तहरीर रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। तब कोर्ट का सहारा लिया गया। अब कोर्ट ने प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के बाद संबंधित थाना पुलिस से आख्या मांगी है। मामले की सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
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एएमयू छात्र से रेजीडेंट डॉक्टरों के विवाद के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान 15 मरीजों की मौत को मुद्दा बनाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के लिए सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की गई है।
भारतीय समाज सेवक संगठन की ओर से दायर की गई इस याचिका में एएमयू कुलपति व तीन चिकित्सकों को आरोपी बनाकर मुकदमा दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है। इस याचिका को अदालत ने प्रकीर्ण वाद के रूप में स्वीकारते हुए थाना पुलिस से आख्या भी मांगी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 20 अप्रैल को होगी।
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भारतीय समाज सेवक संगठन बीएसएसएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी इफ्र ाहीम हुसैन ने अधिवक्ता अशोक कुमार के माध्यम से इस संबंध में एक याचिका सीजेएम कोर्ट में दायर की है। इसमें आरडीए अध्यक्ष डॉ. अहमद अब्दुल्लाह, उपाध्यक्ष डॉ. दीपक अग्रवाल, आरडीए से ही डॉ. महताब आलम व एएमयू कुलपति प्रो.तारिक मंसूर व अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया है।
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इस याचिका में कहा गया है कि आरडीए द्वारा गैरकानूनी हड़ताल की गई थी। इस दौरान 15 मरीजों की मौत हो गई। इसी तरह अप्रैल 2017 में हुई हड़ताल में 5 मौत हुई थीं। एएमयू में कानून व लोकतंत्र का कोई खौफ नहीं है। न इंसानियत की कोई अहमियत है। इस हड़ताल के दौरान डॉक्टरों का एक अमानवीय चेहरा यह भी सामने आया कि एक मरीज के हाथ पैर बांध दिए गए। मगर जांच में किसी को इसका दोषी नहीं पाया गया। इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है।
याचिका में कहा गया है कि एएमयू कुलपति को सभी अधिकार हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपने अधिकारों का प्रयोग न करते हुए हड़ताल खत्म कराने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिला प्रशासन की एस्मा की चेतावनी के बाद भी दोषी डॉक्टर्स ने कोई तवज्जो नहीं दी। हड़ताल के पीछे बड़ी साजिश यह भी थी कि मरीज मजबूरन शहर के निजी अस्पतालों में जाएंगे और इसका कमीशन आरोपियों को मिलेगा। अत: यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
ऐसे में इसके लिए जिम्मेदार डॉक्टर्स और अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला चलाया जाए। इसकी शिकायत डीएम व एसएसपी से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तदुपरांत आईजी अलीगढ़ को तहरीर रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। तब कोर्ट का सहारा लिया गया। अब कोर्ट ने प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के बाद संबंधित थाना पुलिस से आख्या मांगी है। मामले की सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।