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Aligarh News: 150 वर्ष, 800 पेटेंट और 500 शास्त्रोक्त दवाएं, पर एक भी ब्रांड न बना
Sun, 12 Nov 2023 12:16 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Nov 2023 12:16 AM IST
सार
वैद्यनगरी के नाम से मशहूर विजयगढ़ में आयुर्वेद पद्धति से वर्तमान में लगभग 1500 अलग अलग दवाएं बन रहीं हैं। इसमें 800 पेटेंट और 500 शास्त्रोक्त दवाएं शामिल हैं। स्वर्णिम अतीत और शानदार वर्तमान होने के बाद भी 150 वर्ष के सफर में विजयगढ़ अपनी किसी एक दवा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं दिला सका।
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विजयगढ़ की फार्मेसी में दवाओं की पैकिंग करते कर्मचारी
- फोटो : संवाद
विस्तार
धनतेरस के साथ 10 नवंबर को धन्वंतरि जयंती भी मनाई गई। विजयगढ़ के धन्वंतरि मंदिर में पूरा दिन उपवास कर आयुर्वेदाचार्य विधिविधान से पूजा अर्चना की। वैद्यनगरी के नाम से मशहूर विजयगढ़ में आयुर्वेद पद्धति से वर्तमान में लगभग 1500 अलग अलग दवाएं बन रहीं हैं। इसमें 800 पेटेंट और 500 शास्त्रोक्त दवाएं शामिल हैं।
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स्वर्णिम अतीत और शानदार वर्तमान होने के बाद भी 150 वर्ष के सफर में विजयगढ़ अपनी किसी एक दवा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं दिला सका। यहां के जानेमाने वैद्यों के सीने में इसकी कसक है। बहरहाल, इस कारोबार से लगभग 700 लोग स्थानीय स्तर से रोजगार ले रहे हैं, जो आठ लाइसेंसशुदा दवा फार्मेसियों में कार्यरत हैं। इन आठ कंपनियों की एक हजार से ज्यादा एजेंसियां पूरे देश में हैं।
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दक्षिण भारत में तमिलनाडु, केरल, पूर्व में केरल और पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़ कर देश के सभी हिस्सों में इन दवाओं की आपूर्ति हो रही है। उत्तर प्रदेश के साथ राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात तक यहां की दवाओं की जबरदस्त मांग है। इसमें पेट दर्द, गैस अपच, पाचन शक्ति, पुरुष रोग, स्त्री रोग और बाल रोग की दवाएं शामिल हैं। विजयगढ़ का मुकाबला वैद्यनाथ, डॉबर और कासगंज के कचोरा की ऊमा फार्मेसी जैसी बड़ी फर्मों के साथ हो रहा है। विजयगढ़ अपने 150 वर्ष लंबे सफर में एक भी बेहद प्रतिष्ठित ब्रांड बनाने में नाकाम साबित हुआ है। इसका कारण तकनीकी अपग्रेड न होना, सड़क, बिजली और पानी के संनाधन की कमी होना रहा है।
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नामी वैद्यों के किस्से
1-अंग्रेज वायसराय को क्लाेराइटस नाम की बीमारी होने पर वैद्य राधावल्लभ विजयगढ़ से कोलकाता बुलाए गए थे। वैद्य जी ने उनका मठ्ठे से होने वाली कल्प चिकित्सा पद्वति से इलाज किया था। जिससे वायसराय ठीक हुए और विजयगढ़ का नाम मशहूर हुआ।
2-देश की यूनीकार्न कंपनियों में शामिल पेटीएम के मालिक विजयशेखर शर्मा के बाबा वैद्य गुरुदत्त शर्मा ज्वर, मोतीझाला, चेचक जैसी बीमारियों के इलाज के बहुत मशहूर हुए थे।
3-विजयगढ़ के सबसे पहले मशहूर वैद्य नारायण दास थे, जिन्होंने धनवंतरि कार्यालय फार्मेसी की स्थापना की थी। जो आजतक कार्यरत हैं।
4-देवीशरण गर्ग लकवा रोग के बेहद मशहूर वैद्य थे, उन्होंने कई रोगियों को इससे निजात दिलाई थी। उनके परिवार के तीसरी पीढ़ी इस काम में है।
आयुर्वेदिक दवाओं का गणित
वैद्यनगरी का अतीत
2-देश की यूनीकार्न कंपनियों में शामिल पेटीएम के मालिक विजयशेखर शर्मा के बाबा वैद्य गुरुदत्त शर्मा ज्वर, मोतीझाला, चेचक जैसी बीमारियों के इलाज के बहुत मशहूर हुए थे।
3-विजयगढ़ के सबसे पहले मशहूर वैद्य नारायण दास थे, जिन्होंने धनवंतरि कार्यालय फार्मेसी की स्थापना की थी। जो आजतक कार्यरत हैं।
4-देवीशरण गर्ग लकवा रोग के बेहद मशहूर वैद्य थे, उन्होंने कई रोगियों को इससे निजात दिलाई थी। उनके परिवार के तीसरी पीढ़ी इस काम में है।
आयुर्वेदिक दवाओं का गणित
- 40 करोड़ रुपये से अधिक का सलाना टर्नओवर।
- 07 करोड़ रुपये से अधिक का आयकर और जीएसटी दे रहे।
- 800 पेटेंट दवाओं का निर्माण यहां हो रहा है।
- 500 से अधिक दवाएं शास्त्रोक्त पद्वति से बनाई जा रहीं।
- 2022 से कई दवाएं अमेजन और अन्य ई कामर्स प्लेटफार्म पर।
- 2019 में कोरोना काल दवाओं की मांग कई गुना बढ़ गई ही।
- 2013 में दवा कारोबार 15 करोड़ रुपये के आसपास था।
- 2023 में ये व्यापार लगभग 40 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
- 700 लोगों को विजयगढ़ में मिल रहा है कारोबार।
- 1000 से ज्यादा एजेंसी अलीगढ़ से बाहर काम कर रहीं।
वैद्यनगरी का अतीत
- 150 वर्ष पहले विजयगढ़ में आयुर्वेदिक दवाएं बनना शुरू हुआ।
- 1898 में पहली धनवंतरि कार्यालय फार्मेसी की स्थापना हुई।
- 1964 में आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण का लाइसेंस जारी होना शुरू हुआ।
- 1972 में पहली बार आयुर्वेदिक पद्वति की दवा का कैप्सूल बना।
- 2012 में पहले धनवंतरि मंदिर की स्थापना हुई।