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15 दिन जीने वाला मच्छर हर साल निगल जाता है 15 करोड़
आशीष निगम
Updated Mon, 17 Oct 2016 01:31 AM IST
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मक्खी मच्छर नाले और अलीगढ़ के ताले..। ये कहावत आपने कई बार सुनी और सुनाई होगी। 37 लाख की आबादी वाले जिले में मच्छरों को मारने वाली दवाओं और उत्पादों का कारोबार भी बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है।
इस व्यापार ने कुछ ही सालों में 5 से 15 करोड़ रुपये का सफर तय कर लिया है। कैसे..? आइए बताते हैं- जिले में तकरीबन 6 लाख परिवार हैं। लगभग तीन लाख परिवार ऐसे उत्पादों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
इस कारोबार के जानकारों की मानें तो अगर एक परिवार एक महीने में केवल 50 रुपये भी मच्छर मारने में खर्च करता है तो पूरे जिले में डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार होता है। अगर दस महीने की ये रकम जोड़ दें तो 15 करोड़ तक पहुंचती है, क्योंकि दस महीने तक इन दवाओं की सबसे ज्यादा मांग होती है।
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ये वक्त वो होता है, जब हम भीषण गरमी से बरसात, बरसात के बाद सर्दी या फिर सर्दी से गरमी के मौसम में जा रहे होते हैं, क्योंकि यही सीजन मच्छरों के लिए सबसे ज्यादा मुफीद होता है। इसके अलावा नगर निगम और जिला मलेरिया रोग नियंत्रण विभाग भी हर साल मच्छरों को मारने में लाखों रुपये खर्च कर देते हैं।
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इस व्यापार ने कुछ ही सालों में 5 से 15 करोड़ रुपये का सफर तय कर लिया है। कैसे..? आइए बताते हैं- जिले में तकरीबन 6 लाख परिवार हैं। लगभग तीन लाख परिवार ऐसे उत्पादों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
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इस कारोबार के जानकारों की मानें तो अगर एक परिवार एक महीने में केवल 50 रुपये भी मच्छर मारने में खर्च करता है तो पूरे जिले में डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार होता है। अगर दस महीने की ये रकम जोड़ दें तो 15 करोड़ तक पहुंचती है, क्योंकि दस महीने तक इन दवाओं की सबसे ज्यादा मांग होती है।
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ये वक्त वो होता है, जब हम भीषण गरमी से बरसात, बरसात के बाद सर्दी या फिर सर्दी से गरमी के मौसम में जा रहे होते हैं, क्योंकि यही सीजन मच्छरों के लिए सबसे ज्यादा मुफीद होता है। इसके अलावा नगर निगम और जिला मलेरिया रोग नियंत्रण विभाग भी हर साल मच्छरों को मारने में लाखों रुपये खर्च कर देते हैं।