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कविता की ताकत है लय : नरेश
Updated Sun, 11 Feb 2018 01:20 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
केपी सिंह मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित समारोह में युवा कवि संजीव कौशल को ‘मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार-17’ से सम्मानित किया गया।
ट्रस्ट की अध्यक्ष नमिता सिंह ने कहा कि यह पुरस्कार सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग और विचारवान, प्रगतिशील मूल्यों के युवा कवि को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। केपी सिंह मेमोरियल ट्रस्ट साहित्य-समाज-संस्कृति और विचार को जोड़ने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि सम्मानित कवि संजीव कौशल की कविताएं हमारे समय की भयानक सच्चाइयों से मुठभेड़ करती हैं और मनुष्य के भीतर की बची हुई उम्मीद को साकार करती हैं।
मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कवि नरेश सक्सेना ने कहा कि कविता की ताकत लय है, जो उसे ध्वन्यात्मकता प्रदान कर प्रभावशाली बनाती है। आज कविता जनसाधारण के लिए भी महत्वपूर्ण हो गई है। डॉ. आशुतोष कुमार ने कहा कि आज सार्थक कविता वस्तु होते समाज और मनुष्य को फिर से स्पंदित करती है और प्राणवान बनाती है।
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काव्य गोष्ठी में संजीव कौशल ने ‘आग के घर हैं चूल्हे’, ‘रावणों का बाजार’ जैसी कई कविताओं का पाठ किया। उर्दू के प्रसिद्ध शायर सिराज अजमली, सुरेश कुमार, दिल्ली से पधारे डॉ. जसवीर त्यागी, डॉ. महेंद्र बेनीवाल ने भी काव्य पाठ किया। नरेश सक्सेना ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनकी कविता ‘चंबल एक नदी का नाम’ बहुत सराही गई। संचालन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष व लेखक राजीव लोचन नाथ शुक्ल ने किया। इसमें अजय बिसारिया व देवेंद्र कुमार गुप्ता का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर पद्मश्री काजी अब्दुल सत्तार, प्रो. जेबा, डॉ. रक्षपाल सिंह, डॉ. प्रेमकुमार, प्रो. प्रदीप सक्सेना, प्रो. अब्दुल अलीम, प्रो. आशिक अली, प्रो. एम. शाहुल हमीद, डॉ. मंजू शर्मा, डॉ. नीता, डॉ. प्रीती माथुर, प्रो. कमलानंद झा, डॉ. दीपशिखा आदि मौजूद रहे।
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केपी सिंह मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित समारोह में युवा कवि संजीव कौशल को ‘मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार-17’ से सम्मानित किया गया।
ट्रस्ट की अध्यक्ष नमिता सिंह ने कहा कि यह पुरस्कार सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग और विचारवान, प्रगतिशील मूल्यों के युवा कवि को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। केपी सिंह मेमोरियल ट्रस्ट साहित्य-समाज-संस्कृति और विचार को जोड़ने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि सम्मानित कवि संजीव कौशल की कविताएं हमारे समय की भयानक सच्चाइयों से मुठभेड़ करती हैं और मनुष्य के भीतर की बची हुई उम्मीद को साकार करती हैं।
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मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कवि नरेश सक्सेना ने कहा कि कविता की ताकत लय है, जो उसे ध्वन्यात्मकता प्रदान कर प्रभावशाली बनाती है। आज कविता जनसाधारण के लिए भी महत्वपूर्ण हो गई है। डॉ. आशुतोष कुमार ने कहा कि आज सार्थक कविता वस्तु होते समाज और मनुष्य को फिर से स्पंदित करती है और प्राणवान बनाती है।
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काव्य गोष्ठी में संजीव कौशल ने ‘आग के घर हैं चूल्हे’, ‘रावणों का बाजार’ जैसी कई कविताओं का पाठ किया। उर्दू के प्रसिद्ध शायर सिराज अजमली, सुरेश कुमार, दिल्ली से पधारे डॉ. जसवीर त्यागी, डॉ. महेंद्र बेनीवाल ने भी काव्य पाठ किया। नरेश सक्सेना ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनकी कविता ‘चंबल एक नदी का नाम’ बहुत सराही गई। संचालन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष व लेखक राजीव लोचन नाथ शुक्ल ने किया। इसमें अजय बिसारिया व देवेंद्र कुमार गुप्ता का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर पद्मश्री काजी अब्दुल सत्तार, प्रो. जेबा, डॉ. रक्षपाल सिंह, डॉ. प्रेमकुमार, प्रो. प्रदीप सक्सेना, प्रो. अब्दुल अलीम, प्रो. आशिक अली, प्रो. एम. शाहुल हमीद, डॉ. मंजू शर्मा, डॉ. नीता, डॉ. प्रीती माथुर, प्रो. कमलानंद झा, डॉ. दीपशिखा आदि मौजूद रहे।