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अलीगढ़... एक ही भूल, लड़के से मिलने आ गई थी 16 वर्षीय पायल
Updated Tue, 28 Nov 2017 02:26 AM IST
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एक ही भूल.. लड़के से मिलने आ गई थी 16 वर्षीय पायल
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
आरपीएफ थाने से जून में प्राप्त हुई सोलह वर्षीय बालिका पायल चाइल्ड लाइन की मदद से पांच महीने बाद सकुशल अपने घर पहुंच पा रही है। पायल पुत्री महादेव व माता अष्टमी निवासी गंगा रामपुर दोखीन दिनाजपुर जिला मालदा बीती 26 जून को थाना आरपीएफ से चाइल्ड लाइन को प्राप्त हुई थी।
चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि पायल को एक परिचित लड़के ने मिलने के बहाने कोलकाता बुलाया था। वह मालदा से कोलकाता के लिए ट्रेन में बैठी, लेकिन गलत ट्रेन में चढ़ जाने के कारण कानपुर पहुंच गई। कानपुर से उसने फिर मालदा का टिकट लिया, लेकिन दनकौर जाने वाली ट्रेन में बैठ गई। जहां से आरपीएफ स्टाफ उसे अलीगढ़ लाया और चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में दे दिया गया। तबसे पायल चाइल्ड लाइन के संरक्षण में ही रह रही थी।
दरअसल, पायल मूल रूप से बांग्लादेश के टंगाइल जिले के मिज़ार्पुर थाना अंतर्गत महिरा गांव की रहने वाली है। उसके पिता वहां लकड़ी का कारोबार करते हैं। पिछले दो वर्षों से वह अपने दादा के पास गंगारामपुर जिला मालदा पश्चिम बंगाल में रह रही थी। गहन जांच पड़ताल के बाद चाइल्ड लाइन ने पायल की बुआ को खोजा जो नोएडा में रहती हैं।
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बुआ ने उसको दीपावली के बाद घर भेजने की जिम्मेदारी ली थी। छह अक्तूबर को नोएडा बाल कल्याण समिति के समक्ष उसको प्रस्तुत किया गया, लेकिन बुआ रिश्ते से संबंधित उचित दस्तावेज नहीं दिखा सकीं। जिससे वह वापस अलीगढ़ आ गई। बालिका के दादा मनेंद्र नाथ डे सरकार व भाई सनातन सरकार को चाइल्ड लाइन ने अपने खर्चे से बुलाना चाहा तो वह आखिरी वक्त में नहीं आए।
टीम को इस बीच पता चला कि उसके चाचा बासुदेव मालाकर जिला छपरा में अपने कारोबार के संबंध में आए हुए हैं। टीम ने जब उनसे संपर्क किया तो उन्होंने बालिका को साथ ले जाने के लिए कहा। पायल के चाचा चाइल्ड लाइन की समन्वयक नेसी वर्गीस, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय व सदस्य मटरूमल, अजय सक्सेना, साधना गुप्ता व पद्मा रानी के समक्ष पेश हुए।
समिति ने वासुदेव द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर पायल को चाचा को सौंप दिया। इस तरह से पांच महीने के बाद पायल अपने घर पहुंच रही है। चाइल्ड लाइन से विदाई के वक्त पायल की आंखें नम थीं।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
आरपीएफ थाने से जून में प्राप्त हुई सोलह वर्षीय बालिका पायल चाइल्ड लाइन की मदद से पांच महीने बाद सकुशल अपने घर पहुंच पा रही है। पायल पुत्री महादेव व माता अष्टमी निवासी गंगा रामपुर दोखीन दिनाजपुर जिला मालदा बीती 26 जून को थाना आरपीएफ से चाइल्ड लाइन को प्राप्त हुई थी।
चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि पायल को एक परिचित लड़के ने मिलने के बहाने कोलकाता बुलाया था। वह मालदा से कोलकाता के लिए ट्रेन में बैठी, लेकिन गलत ट्रेन में चढ़ जाने के कारण कानपुर पहुंच गई। कानपुर से उसने फिर मालदा का टिकट लिया, लेकिन दनकौर जाने वाली ट्रेन में बैठ गई। जहां से आरपीएफ स्टाफ उसे अलीगढ़ लाया और चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में दे दिया गया। तबसे पायल चाइल्ड लाइन के संरक्षण में ही रह रही थी।
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दरअसल, पायल मूल रूप से बांग्लादेश के टंगाइल जिले के मिज़ार्पुर थाना अंतर्गत महिरा गांव की रहने वाली है। उसके पिता वहां लकड़ी का कारोबार करते हैं। पिछले दो वर्षों से वह अपने दादा के पास गंगारामपुर जिला मालदा पश्चिम बंगाल में रह रही थी। गहन जांच पड़ताल के बाद चाइल्ड लाइन ने पायल की बुआ को खोजा जो नोएडा में रहती हैं।
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बुआ ने उसको दीपावली के बाद घर भेजने की जिम्मेदारी ली थी। छह अक्तूबर को नोएडा बाल कल्याण समिति के समक्ष उसको प्रस्तुत किया गया, लेकिन बुआ रिश्ते से संबंधित उचित दस्तावेज नहीं दिखा सकीं। जिससे वह वापस अलीगढ़ आ गई। बालिका के दादा मनेंद्र नाथ डे सरकार व भाई सनातन सरकार को चाइल्ड लाइन ने अपने खर्चे से बुलाना चाहा तो वह आखिरी वक्त में नहीं आए।
टीम को इस बीच पता चला कि उसके चाचा बासुदेव मालाकर जिला छपरा में अपने कारोबार के संबंध में आए हुए हैं। टीम ने जब उनसे संपर्क किया तो उन्होंने बालिका को साथ ले जाने के लिए कहा। पायल के चाचा चाइल्ड लाइन की समन्वयक नेसी वर्गीस, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय व सदस्य मटरूमल, अजय सक्सेना, साधना गुप्ता व पद्मा रानी के समक्ष पेश हुए।
समिति ने वासुदेव द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर पायल को चाचा को सौंप दिया। इस तरह से पांच महीने के बाद पायल अपने घर पहुंच रही है। चाइल्ड लाइन से विदाई के वक्त पायल की आंखें नम थीं।