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स्वास्थ्य विभाग के घोटाले जांचने आई एनएचएम टीम
Updated Thu, 14 Sep 2017 01:47 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग के घोटाले जांचने आई एनएचएम की टीम
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों लखनऊ से आई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम का खौफ है। एनएचएम की टीम विभाग में पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 के खर्चे के हिसाब का विवरण जुटा रही है। टीम के तेवर देखकर पिछले वर्ष चर्चा में आए विभाग के घोटालों से जुड़े लोगों की हवाइयां उड़ी हुई हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य विभाग में बहुचर्चित वाहन घोटाला प्रकाश में आया था, जिसमें पोलियो अभियान के लिए जुटाए गए वाहनों की मद में फर्जी बिल लगाए और ट्रैक्टरों के नंबर उन पर डाल दिए। खुलासा होने पर फर्म को ब्लैक लिस्ट किया गया और उसका भुगतान भी रोक दिया गया। इसके अलावा दवा खरीद, टेलीफोन खरीद, रंगाई पुताई आदि की मद में भी गड़बड़ी हुई। एनएचएम की मद में ही नर्सों की तैनाती भी मानक से ज्यादा कर ली।
अब एनएचएम की टीम दिए गए पैसे का हिसाब मांगने आयी है। मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति की मैराथन बैठक चली। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में मुद्दा उठा कि यह 21 करोड़ रुपये पिछले वित्तीय वर्ष का बकाया क्यों है? क्यों इसको खर्च नहीं किया गया। इसका अर्थ टीम ने यह भी निकाला कि विभाग के कुछ लोग काम करना नहीं चाहते हैं। टीम अभी सभी विवरण जुटा रही है, जिसे बाद में शासन को सौंप दिया जाएगा।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों लखनऊ से आई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम का खौफ है। एनएचएम की टीम विभाग में पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 के खर्चे के हिसाब का विवरण जुटा रही है। टीम के तेवर देखकर पिछले वर्ष चर्चा में आए विभाग के घोटालों से जुड़े लोगों की हवाइयां उड़ी हुई हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य विभाग में बहुचर्चित वाहन घोटाला प्रकाश में आया था, जिसमें पोलियो अभियान के लिए जुटाए गए वाहनों की मद में फर्जी बिल लगाए और ट्रैक्टरों के नंबर उन पर डाल दिए। खुलासा होने पर फर्म को ब्लैक लिस्ट किया गया और उसका भुगतान भी रोक दिया गया। इसके अलावा दवा खरीद, टेलीफोन खरीद, रंगाई पुताई आदि की मद में भी गड़बड़ी हुई। एनएचएम की मद में ही नर्सों की तैनाती भी मानक से ज्यादा कर ली।
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अब एनएचएम की टीम दिए गए पैसे का हिसाब मांगने आयी है। मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति की मैराथन बैठक चली। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में मुद्दा उठा कि यह 21 करोड़ रुपये पिछले वित्तीय वर्ष का बकाया क्यों है? क्यों इसको खर्च नहीं किया गया। इसका अर्थ टीम ने यह भी निकाला कि विभाग के कुछ लोग काम करना नहीं चाहते हैं। टीम अभी सभी विवरण जुटा रही है, जिसे बाद में शासन को सौंप दिया जाएगा।
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