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रविवार को क्वार्सी पैठ में खूब बिके बकरे
Updated Mon, 28 Aug 2017 01:08 AM IST
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क्वार्सी पैठ में खूब बिके बकरे
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
ईदुल अजहा (बकरीद) करीब होने पर बकरों की खरीदारी में लोग जुट गए हैं। क्वार्सी पैठ में बकरे खूब बिके, लेकिन पिछले साल की अपेक्षा बकरों की कीमतों में दो-तीन हजार रुपये की गिरावट आई है। देर शाम तक बकरों की खरीदारी होती रही।
बकरीद दो सितंबर को संभावित है। बकरीद से पहले क्वार्सी पर एक और पैठ लगेगी। रविवार को लगी पैठ में बकरों की बेशुमार तादाद रही। इसके चलते सुबह जाम भी लग गया। बकरों की खरीदारी में खूब मोल-भाव पर चला।
ईदुल अजहा 12वां महीना
इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक ईदुल अजहा 12वां महीना है। इस्लामी साल का यह महीना कुर्बानी (त्याग) पर मुकम्मल होता है। वहीं, मुहर्रम पहला महीना होता है। यह भी कुर्बानी महीने में दर्ज है। इसी महीने में पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा (सअ) के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी।
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प्यारी चीज की कुर्बानी
अल्लाह ने नबी हजरत इब्राहीम से ख्वाब में उनसे उनकी सबसे महबूब (प्रिय) चीज की कुर्बानी मांगी। उन्होंने भेड़, ऊंट की कुर्बानी दी। मगर, ख्वाब में कुर्बानी मांगी जाती रही। आखिरकार नबी ने अपने अजीज (प्यारा) बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला किया। उनकी गर्दन पर छुरी रखकर चला दी, लेकिन जब आंख से पट्टी खोली तो देखा कि हजरत इस्माइल अलग खड़े मुस्करा रहे हैं और उनकी जगह दुंबा (भेड़) की कुर्बानी हो गई।
पिछले साल के मुकाबले बकरे सस्ते बिके हैं। आठ-दस दिन पहले बकरों की बिक्री शुरू हो जाती थी।
- कल्याण, व्यापारी अतरौली
हां, कुछ बाजार ठंडा रहा, लेकिन आज बकरों की बिक्री कुछ ज्यादा हो गई। अभी इसमें और तेजी आएगी।
-हर नारायण सिंह सहनौल
देखिये, बकरे चाहे सस्ते मिलें या महंगे, उन्हें कुर्बानी तो देनी ही है। इसलिए कीमतों का कोई फर्क नहीं पड़ता है।
-जमील अहमद, जीवनगढ़
कुर्बानी देना फर्ज है। इसलिए, बढ़ी कीमतें महजबी काम में आड़े नहीं आ सकतीं। महंगा होने पर कुर्बानी दी जाती।
-नईम, सर सैयद नगर
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
ईदुल अजहा (बकरीद) करीब होने पर बकरों की खरीदारी में लोग जुट गए हैं। क्वार्सी पैठ में बकरे खूब बिके, लेकिन पिछले साल की अपेक्षा बकरों की कीमतों में दो-तीन हजार रुपये की गिरावट आई है। देर शाम तक बकरों की खरीदारी होती रही।
बकरीद दो सितंबर को संभावित है। बकरीद से पहले क्वार्सी पर एक और पैठ लगेगी। रविवार को लगी पैठ में बकरों की बेशुमार तादाद रही। इसके चलते सुबह जाम भी लग गया। बकरों की खरीदारी में खूब मोल-भाव पर चला।
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ईदुल अजहा 12वां महीना
इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक ईदुल अजहा 12वां महीना है। इस्लामी साल का यह महीना कुर्बानी (त्याग) पर मुकम्मल होता है। वहीं, मुहर्रम पहला महीना होता है। यह भी कुर्बानी महीने में दर्ज है। इसी महीने में पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा (सअ) के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी।
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प्यारी चीज की कुर्बानी
अल्लाह ने नबी हजरत इब्राहीम से ख्वाब में उनसे उनकी सबसे महबूब (प्रिय) चीज की कुर्बानी मांगी। उन्होंने भेड़, ऊंट की कुर्बानी दी। मगर, ख्वाब में कुर्बानी मांगी जाती रही। आखिरकार नबी ने अपने अजीज (प्यारा) बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला किया। उनकी गर्दन पर छुरी रखकर चला दी, लेकिन जब आंख से पट्टी खोली तो देखा कि हजरत इस्माइल अलग खड़े मुस्करा रहे हैं और उनकी जगह दुंबा (भेड़) की कुर्बानी हो गई।
पिछले साल के मुकाबले बकरे सस्ते बिके हैं। आठ-दस दिन पहले बकरों की बिक्री शुरू हो जाती थी।
- कल्याण, व्यापारी अतरौली
हां, कुछ बाजार ठंडा रहा, लेकिन आज बकरों की बिक्री कुछ ज्यादा हो गई। अभी इसमें और तेजी आएगी।
-हर नारायण सिंह सहनौल
देखिये, बकरे चाहे सस्ते मिलें या महंगे, उन्हें कुर्बानी तो देनी ही है। इसलिए कीमतों का कोई फर्क नहीं पड़ता है।
-जमील अहमद, जीवनगढ़
कुर्बानी देना फर्ज है। इसलिए, बढ़ी कीमतें महजबी काम में आड़े नहीं आ सकतीं। महंगा होने पर कुर्बानी दी जाती।
-नईम, सर सैयद नगर