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अब दांतों का भी एक्सपर्ट हुआ अलीगढ़ डीईआईसी
Updated Sun, 11 Feb 2018 01:20 AM IST
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अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कुपोषित बच्चों में 38 बीमारियों के निशुल्क इलाज के क्रम में अब डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) में दांतों का इलाज भी शुरू हो गया है।
यूपी में एक्सीलेंस एक्सपर्ट के रूप में स्थापित अपने जिले का यह सेंटर अब तक उपकरण न होने के कारण सिर्फ डेंटल के मामले में जेएन मेडिकल कालेज पर निर्भर थे।
मगर अब इसमें भी डीईआईसी खुद एक्सपर्ट हो गया है। डेंटल सर्जन डॉ. नावेद व उनकी टीम पहले से थी, जनवरी के दूसरे सप्ताह में उपकरण भी मिल गए हैं और इलाज भी शुरू हो गया है। बता दें कि जन्म से कुपोषित अधिकतर बच्चे इस समस्या से ग्रस्त मिलते हैं।
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अब तक 110 पंजीकरण
डीईआईसी की शुरुआत अगस्त से हुई है। तब से अब तक कुल 110 कुपोषित बच्चे डेंटल उपचार के लिए पंजीकृत किए गए हैं। इनमे 40 पंजीकरण जनवरी माह में ही हुए हैं। जनवरी से अब इन सभी को डीईआईसी में ही उपचार मिल रहा है।
ये मिले दांत रोग
दांतों में विसंगतियां, मसूड़ों से रक्त स्त्राव, कीड़ा लगना, दांतों का समय असमय निकलना, टेढ़े दांत सहित अन्य सभी बीमारियों का उपचार डिवाइस डेंटल चेयर में मौजूद हैं। हालांकि फटे होठ व तालु के लिए अभी भी मेडिकल कालेज की ओटी की मदद ली जा रही है।
अलीगढ़ में पहला पोर्टेबल एक्स-रे
उपकरणों के साथ दांत के एक्स-रे के लिए पोर्टेबल हैंड हेल्ड मशीन भी आ गई है। ये मशीन अलीगढ़ में कहीं नहीं है। ये मशीन बच्चे के पास जाकर एक्स-रे करेगी।
अब सिर्फ ओटी की कमी
फटे होठ व तालु वाले बच्चों की सर्जरी के लिए ओटी की भी जरूरत है। फिलहाल मेडिकल कालेज की मदद से सर्जरी हो रही हैं। ऐसे बच्चे भी महज आधा दर्जन पंजीकृत हैं। जबकि गांवों में इन बच्चों की बहुत संख्या है। बताते चले कि बिजौली के सिरसा गांव की जिस लक्ष्मी से इस अभियान की शुरुआत की थी, वो इसी से पीड़ित थी और उपचार के लिए हरियाणा के आसरे थी। हालांकि अब उसका उपचार डीईआईसी में चल रहा है।
- अब हम दांत रोग में हर उपचार अपने स्तर पर कर रहे हैं। सिर्फ फटे होठ व तालु के लिए मेडिकल कॉलेज की ओटी की मदद ले रहे हैं। इन बच्चों की संख्या भी हमारे पास अभी कम है। जबकि गांवों में ऐसे बच्चे बहुत हैं। ऐसे मामलों में समय से सर्जरी जरूरी है, वरना दांत नहीं निकलेंगे। दूसरी ओर दूध पिलाने के बाद नर्सिंग बॉटल कैरिज से दांत गल रहे हैं, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। - डॉ. नवेद डेंटल सर्जन, डीईआईसी
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कुपोषित बच्चों में 38 बीमारियों के निशुल्क इलाज के क्रम में अब डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) में दांतों का इलाज भी शुरू हो गया है।
यूपी में एक्सीलेंस एक्सपर्ट के रूप में स्थापित अपने जिले का यह सेंटर अब तक उपकरण न होने के कारण सिर्फ डेंटल के मामले में जेएन मेडिकल कालेज पर निर्भर थे।
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मगर अब इसमें भी डीईआईसी खुद एक्सपर्ट हो गया है। डेंटल सर्जन डॉ. नावेद व उनकी टीम पहले से थी, जनवरी के दूसरे सप्ताह में उपकरण भी मिल गए हैं और इलाज भी शुरू हो गया है। बता दें कि जन्म से कुपोषित अधिकतर बच्चे इस समस्या से ग्रस्त मिलते हैं।
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अब तक 110 पंजीकरण
डीईआईसी की शुरुआत अगस्त से हुई है। तब से अब तक कुल 110 कुपोषित बच्चे डेंटल उपचार के लिए पंजीकृत किए गए हैं। इनमे 40 पंजीकरण जनवरी माह में ही हुए हैं। जनवरी से अब इन सभी को डीईआईसी में ही उपचार मिल रहा है।
ये मिले दांत रोग
दांतों में विसंगतियां, मसूड़ों से रक्त स्त्राव, कीड़ा लगना, दांतों का समय असमय निकलना, टेढ़े दांत सहित अन्य सभी बीमारियों का उपचार डिवाइस डेंटल चेयर में मौजूद हैं। हालांकि फटे होठ व तालु के लिए अभी भी मेडिकल कालेज की ओटी की मदद ली जा रही है।
अलीगढ़ में पहला पोर्टेबल एक्स-रे
उपकरणों के साथ दांत के एक्स-रे के लिए पोर्टेबल हैंड हेल्ड मशीन भी आ गई है। ये मशीन अलीगढ़ में कहीं नहीं है। ये मशीन बच्चे के पास जाकर एक्स-रे करेगी।
अब सिर्फ ओटी की कमी
फटे होठ व तालु वाले बच्चों की सर्जरी के लिए ओटी की भी जरूरत है। फिलहाल मेडिकल कालेज की मदद से सर्जरी हो रही हैं। ऐसे बच्चे भी महज आधा दर्जन पंजीकृत हैं। जबकि गांवों में इन बच्चों की बहुत संख्या है। बताते चले कि बिजौली के सिरसा गांव की जिस लक्ष्मी से इस अभियान की शुरुआत की थी, वो इसी से पीड़ित थी और उपचार के लिए हरियाणा के आसरे थी। हालांकि अब उसका उपचार डीईआईसी में चल रहा है।
- अब हम दांत रोग में हर उपचार अपने स्तर पर कर रहे हैं। सिर्फ फटे होठ व तालु के लिए मेडिकल कॉलेज की ओटी की मदद ले रहे हैं। इन बच्चों की संख्या भी हमारे पास अभी कम है। जबकि गांवों में ऐसे बच्चे बहुत हैं। ऐसे मामलों में समय से सर्जरी जरूरी है, वरना दांत नहीं निकलेंगे। दूसरी ओर दूध पिलाने के बाद नर्सिंग बॉटल कैरिज से दांत गल रहे हैं, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। - डॉ. नवेद डेंटल सर्जन, डीईआईसी