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हरिशंकर की आंखों से देखेंगे ‘हरि’ की दुनिया
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:17 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बुजुर्ग हरिशंकर शर्मा वैद्य जी की आंखों से दो लोग ‘हरि’ की दुनिया देख सकेंगे। हरिशंकर ने जेएन मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान कर दिया।
हालांकि, वह देहदान की घोषणा की थी, लेकिन एनाटॉमी विभाग के असहयोग से ऐसा नहीं हो सका। देहदान कर्तव्य संस्था के अध्यक्ष डॉ. एसके गौड़, सचिव डॉ. जयंत शर्मा, संपादकीय प्रभारी डॉ. डीके वर्मा ने वैद्य जी को मृत शरीर के लिए प्रेरित किया था। वह संस्था के सक्रिय सदस्य थे।
सासनीगेट टेलीफोन एक्सचेंज के निवासी सुशील कुमार शर्मा ने संस्था के सदस्यों के कहने पर मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग से संपर्क किया।
पिता हरिशंकर के शरीर को दान करने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन विभाग के अधिकारियों के असहयोग के चलते दान संभव नहीं हो सका। उन्होंने मृत्य प्रमाण पत्र व थाने से एनओसी लाने की शर्त रख दी, जो फौरन उपलब्ध करना शोकाकुल परिवार के लिए संभव नहीं था।
डॉ. वर्मा ने बताया कि वैद्य जी के शरीर को जलाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी मेडिकल कॉलेज को मरने के बाद शायद ही मृत शरीर मिल पाए, क्योंकि उनके बनाए हुए दोनों कानून को मरणोपरांत पूरा करना संभव नहीं है।
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बुजुर्ग हरिशंकर शर्मा वैद्य जी की आंखों से दो लोग ‘हरि’ की दुनिया देख सकेंगे। हरिशंकर ने जेएन मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान कर दिया।
हालांकि, वह देहदान की घोषणा की थी, लेकिन एनाटॉमी विभाग के असहयोग से ऐसा नहीं हो सका। देहदान कर्तव्य संस्था के अध्यक्ष डॉ. एसके गौड़, सचिव डॉ. जयंत शर्मा, संपादकीय प्रभारी डॉ. डीके वर्मा ने वैद्य जी को मृत शरीर के लिए प्रेरित किया था। वह संस्था के सक्रिय सदस्य थे।
सासनीगेट टेलीफोन एक्सचेंज के निवासी सुशील कुमार शर्मा ने संस्था के सदस्यों के कहने पर मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग से संपर्क किया।
पिता हरिशंकर के शरीर को दान करने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन विभाग के अधिकारियों के असहयोग के चलते दान संभव नहीं हो सका। उन्होंने मृत्य प्रमाण पत्र व थाने से एनओसी लाने की शर्त रख दी, जो फौरन उपलब्ध करना शोकाकुल परिवार के लिए संभव नहीं था।
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डॉ. वर्मा ने बताया कि वैद्य जी के शरीर को जलाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी मेडिकल कॉलेज को मरने के बाद शायद ही मृत शरीर मिल पाए, क्योंकि उनके बनाए हुए दोनों कानून को मरणोपरांत पूरा करना संभव नहीं है।
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