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’कुपोषणरू मॉनिटरिंग से बाहर हैं 1 लाख से अधिक बच्चे!’
Updated Mon, 12 Feb 2018 01:16 AM IST
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अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिले में एक लाख से अधिक बच्चे बाल विकास विभाग की मानीटरिंग के दायरे से बाहर हैं। जिनकी उम्र्र छह वर्ष तक है। हालांकि आंगनबाड़ी केंद्रों का जनसंख्या के हिसाब से निर्धारण पर नजर डालें तो इनकी स्थापना वर्ष 2001 या उससे भी पुरानी आबादी के आधार पर है, लेकिन यदि वर्ष 2001 की जनगणना को मानक मानें तो यह सभी बच्चे उस साढ़े छह लाख की आबादी का हिस्सा हैं, जो अब तक विभागीय मानीटरिंग के दायरे में ही नहीं हैं।
1000 आबादी पर 1 आंगनबाड़ी
जिले में कुल 3039 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। शासन से पोषाहार भी इन्हीं का आ रहा है। नियम है कि 1000 की आबादी पर 1 आंगनबाड़ी केंद्र होना चाहिए। शासन से इसकी नियुक्ति होती है। वर्तमान में सभी आंगनबाड़ी मिलकर कुल 30 लाख 31 हजार आबादी को मानिटर करती हैं। जबकि 2011 की जनगणना के हिसाब से भी जिले की आबादी 36 लाख 73 हजार 889 है। यानी कि 6 लाख 42 हजार 889 आबादी मानीटरिंग से बाहर है।
15.64 फीसदी है बच्चों का अनुपात
2001 की जनगणना में कुल आबादी में 6 वर्ष तक के बच्चों का अनुपात 18.81 फीसदी था। 2011 में वहीं 15.64 रहा। आखिरी अनुपात के हिसाब से भी 6 लाख 42 हजार 889 की आबादी में 1 लाख 547 बच्चे होने चाहिए।
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7 वर्षों में आबादी भी बढ़ी है
6 लाख 42 हजार 889 का आंकड़ा तो 2011 की जनगणना का है। तब से अब तक 7 वर्षों में आबादी निश्चित रूप से बढ़ी है। जनसंख्या वृद्धि की पिछले 20 वर्षों की विकास दर के हिसाब से भी वही आबादी वर्तमान में साढ़े 7 लाख हो गई होगी। इससे 6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या भी 10 से 16 हजार बढ़ना लाजिमी है।
हो रही 3 बच्चों की मॉनिटरिंग’
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों में 5 वर्ष तक के 3 लाख 56 हजार 172 बच्चे दर्ज हैं। नवंबर 2017 में इनमें से 3 लाख 19 हजार 150 बच्चों का वजन तोलने का दावा विभाग ने किया था। दावा ये भी था कि जिले भर में उनके प्रयास से कुल 224 बच्चे कुपोषण के लाल घेरे से पीले घेरे में आ गए हैं। वहीं पीले घेरे से 880 बच्चे हरे घेरे में आए। बताते चलें अभी तक कुपोषितों पर अमर उजाला की पड़ताल में जिले के 52896 कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की आवाज बुलंद की गई। इनमें 16 हजार 935 लाल घेरे में हैं।
- आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्धारण वर्ष 2001 या उससे भी पुरानी जनगणना के आधार पर है। भारत सरकार ने क्षेत्र बढ़ाने एवं नए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की अनुमति नहीं मिली है। हमारी कोशिश रहती है कि प्रति आंगनबाड़ी एक हजार बच्चे के मानक से ज्यादा बच्चों को कवर किया जाए। इसके लिए लगातार कोशिशें हो रही हैं।
- श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
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जिले में एक लाख से अधिक बच्चे बाल विकास विभाग की मानीटरिंग के दायरे से बाहर हैं। जिनकी उम्र्र छह वर्ष तक है। हालांकि आंगनबाड़ी केंद्रों का जनसंख्या के हिसाब से निर्धारण पर नजर डालें तो इनकी स्थापना वर्ष 2001 या उससे भी पुरानी आबादी के आधार पर है, लेकिन यदि वर्ष 2001 की जनगणना को मानक मानें तो यह सभी बच्चे उस साढ़े छह लाख की आबादी का हिस्सा हैं, जो अब तक विभागीय मानीटरिंग के दायरे में ही नहीं हैं।
1000 आबादी पर 1 आंगनबाड़ी
जिले में कुल 3039 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। शासन से पोषाहार भी इन्हीं का आ रहा है। नियम है कि 1000 की आबादी पर 1 आंगनबाड़ी केंद्र होना चाहिए। शासन से इसकी नियुक्ति होती है। वर्तमान में सभी आंगनबाड़ी मिलकर कुल 30 लाख 31 हजार आबादी को मानिटर करती हैं। जबकि 2011 की जनगणना के हिसाब से भी जिले की आबादी 36 लाख 73 हजार 889 है। यानी कि 6 लाख 42 हजार 889 आबादी मानीटरिंग से बाहर है।
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15.64 फीसदी है बच्चों का अनुपात
2001 की जनगणना में कुल आबादी में 6 वर्ष तक के बच्चों का अनुपात 18.81 फीसदी था। 2011 में वहीं 15.64 रहा। आखिरी अनुपात के हिसाब से भी 6 लाख 42 हजार 889 की आबादी में 1 लाख 547 बच्चे होने चाहिए।
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7 वर्षों में आबादी भी बढ़ी है
6 लाख 42 हजार 889 का आंकड़ा तो 2011 की जनगणना का है। तब से अब तक 7 वर्षों में आबादी निश्चित रूप से बढ़ी है। जनसंख्या वृद्धि की पिछले 20 वर्षों की विकास दर के हिसाब से भी वही आबादी वर्तमान में साढ़े 7 लाख हो गई होगी। इससे 6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या भी 10 से 16 हजार बढ़ना लाजिमी है।
हो रही 3 बच्चों की मॉनिटरिंग’
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों में 5 वर्ष तक के 3 लाख 56 हजार 172 बच्चे दर्ज हैं। नवंबर 2017 में इनमें से 3 लाख 19 हजार 150 बच्चों का वजन तोलने का दावा विभाग ने किया था। दावा ये भी था कि जिले भर में उनके प्रयास से कुल 224 बच्चे कुपोषण के लाल घेरे से पीले घेरे में आ गए हैं। वहीं पीले घेरे से 880 बच्चे हरे घेरे में आए। बताते चलें अभी तक कुपोषितों पर अमर उजाला की पड़ताल में जिले के 52896 कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की आवाज बुलंद की गई। इनमें 16 हजार 935 लाल घेरे में हैं।
- आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्धारण वर्ष 2001 या उससे भी पुरानी जनगणना के आधार पर है। भारत सरकार ने क्षेत्र बढ़ाने एवं नए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की अनुमति नहीं मिली है। हमारी कोशिश रहती है कि प्रति आंगनबाड़ी एक हजार बच्चे के मानक से ज्यादा बच्चों को कवर किया जाए। इसके लिए लगातार कोशिशें हो रही हैं।
- श्रेयस कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग