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पर्यावरणविद् ने बचाई 12 पेड़ों की जिंदगी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़। सेंटर प्वाइंट पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद होने वाले नाला निर्माण के चलते वहां पर करीब 70 साल पुराने 12 पेड़ों पर आरी चलने वाली थी। लेकिन पर्यावरणविद् ने मौके पर पहुंच कर और हस्तक्षेप करके उन पेड़ों को बचा लिया। तय हुआ कि एडीए अब उन पेड़ों को हटाकर अपने नाले का निर्माण करायेगा।
कुछ दिनों पहले सेंटर प्वाइंट चौराहे से अतिक्रमण हटाया गया था। जिसके बाद सड़क को चौड़ा करने के क्रम में नाला निर्माण होना था। यहां पर नवाब छतारी की कोठी की गिराई गई वाउंड्री के बाद किराने पर 12 पेड़ थे, जिनकी उम्र करीब 70 वर्ष से भी ज्यादा आंकी गई थी।
इनको काटने की तैयारी हो रही थी। जिसकी जानकारी स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा को भी हुई। इसके बाद सुबोध नंदन उड़ान सोसायटी के ज्ञानेंद्र मिश्रा के साथ मौके पर पहुंच गए। मौके पर नवाब के परिवार के लोग भी पहुंच गए। बताया गया कि इन पेड़ों को एडीए काटने वाला था।
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यहां पर नाले का निर्माण होना है। सुबोध नंदन और ज्ञानेंद्र मिश्रा ने घटना की जानकारी एडीए के अधिशासी अभियंता डीएस भदौरिया को दी, जिसके बाद वह मौके पर पहुंच गए। सभी की सहमति से तय हुआ कि पेड़ों को बचाकर नाले का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही मामला सुलझ गया।
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अलीगढ़। सेंटर प्वाइंट पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद होने वाले नाला निर्माण के चलते वहां पर करीब 70 साल पुराने 12 पेड़ों पर आरी चलने वाली थी। लेकिन पर्यावरणविद् ने मौके पर पहुंच कर और हस्तक्षेप करके उन पेड़ों को बचा लिया। तय हुआ कि एडीए अब उन पेड़ों को हटाकर अपने नाले का निर्माण करायेगा।
कुछ दिनों पहले सेंटर प्वाइंट चौराहे से अतिक्रमण हटाया गया था। जिसके बाद सड़क को चौड़ा करने के क्रम में नाला निर्माण होना था। यहां पर नवाब छतारी की कोठी की गिराई गई वाउंड्री के बाद किराने पर 12 पेड़ थे, जिनकी उम्र करीब 70 वर्ष से भी ज्यादा आंकी गई थी।
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इनको काटने की तैयारी हो रही थी। जिसकी जानकारी स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा को भी हुई। इसके बाद सुबोध नंदन उड़ान सोसायटी के ज्ञानेंद्र मिश्रा के साथ मौके पर पहुंच गए। मौके पर नवाब के परिवार के लोग भी पहुंच गए। बताया गया कि इन पेड़ों को एडीए काटने वाला था।
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यहां पर नाले का निर्माण होना है। सुबोध नंदन और ज्ञानेंद्र मिश्रा ने घटना की जानकारी एडीए के अधिशासी अभियंता डीएस भदौरिया को दी, जिसके बाद वह मौके पर पहुंच गए। सभी की सहमति से तय हुआ कि पेड़ों को बचाकर नाले का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही मामला सुलझ गया।