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World Hepatitis Day 2023: पीली त्वचा और भूख कम लगना..,कुछ ऐसे हैं हेपेटाइटिस के लक्षण; इन लोगों को अधिक खतरा

Fri, 28 Jul 2023 10:49 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 28 Jul 2023 10:49 AM IST
सार

World Hepatitis Day 2023: विशेषज्ञों का कहना है कि झोलाछाप की जांच और इलाज से हेपेटाइटिस हो रहा है। हेपेटाइटिस बी और सी गंभीर हैं। हर साल 2.25 फीसदी मरीज मिल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। 
 

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Yellow skin and loss of appetite symptoms of hepatitis Know which people are more at risk
हेपेटाइटिस - फोटो : istock

विस्तार

झोलाछाप के इलाज और पैथोलॉजी लैब में जांच कराने से लोग अनजाने में हेपेटाइटिस बी और सी के रोगी बन रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) में हर साल 2.25 फीसदी नए मरीज मिल रहे हैं। पूछताछ में इन्होंने झोलाछाप से जांच और इलाज कराने की जानकारी दी।

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एनवीएचसीपी प्रभारी अधिकारी डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि लैब में 26601 मरीजों की जांच हुई, जिसमें 597 मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी मिला। इनमें 377 को हेपेटाइटिस बी और 220 को हेपेटाइटिस सी मिला। पूछताछ में 90 फीसदी मरीजों ने बीमार होने पर बिना मानक वाली लैब में खून की जांच, दलाल से रक्त की व्यवस्था करते हुए झोलाछाप से सर्जरी समेत इलाज कराने की जानकारी दी। इनके यहां उपकरण दूषित होने और बिना मानक वाली ब्लड बैंक से रक्त चढ़ाने से इनको ये बीमारी लगी। 10 फीसदी में बीमारी की वजह असुरक्षित यौन संबंध रहे। बीमारी के लक्षण नजर आने पर इलाज के लिए आए, जिसमें हेपेटाइटिस की जानकारी हुई।
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12 लैब में उपकरण मिले थे दूषित

स्वास्थ्य विभाग के अपंजीकृत अस्पताल नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि इसी महीने 12 पैथोलॉजी लैब सील कीं। इनमें डॉक्टर नहीं थे और झोलाछाप ही खून की जांच कर रहे थे। छापे के वक्त इनकी मशीन, सिरिंज समेत अन्य गंदे और दूषित मिले। फतेहाबाद समेत देहात में पांच अस्पताल सील किए, जिसमें सिजेरियन, महिलाओं का रक्त चढ़ाते हुए झोलाछाप मिले। इनके उपकरण संक्रमित होने से हेपेटाइटिस का पूरा खतरा है।

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एसएन में निशुल्क इलाज

एनवीएचसीपी के नोडल अधिकारी डॉ. सूर्यकमल ने बताया कि हेपेटाइटिस ए और बी दूषित पानी और भोजन करने से होता है। इसके मरीज अधिकांश बरसात में अधिक मिलते हैं। हेपेटाइटिस बी और सी गंभीर हैं। इनका यहां निशुल्क इलाज मिल रहा है। मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 84 दिन इलाज चलता है। निजी अस्पतालों में 30-35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इलाज से 127 मरीज ठीक हो गए हैं।

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इन बातों का रखें ख्याल

- विशेषज्ञ चिकित्सक और सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराएं।
- भारत सरकार और मान्यता प्राप्त ब्लड बैंकों से ही रक्त लें।
- सुरक्षित यौन संबंध बनाएं, दूषित सिरिंज का इस्तेमाल न करें।

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ये हैं लक्षण

- आंख, त्वचा पीली होना, पेशाब पीला आना।
- खून की कमी, वजन कम होना, भूख कम लगना।
- उल्टी होना, पेट में दर्द होना, बुखार आना।

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