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Agra News: वनखंडी अखाड़े से नेशनल पदक विजेता बनी पहलवान गामिनी चाहर
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वनखंडी अखाड़ा
आगरा। आगरा–ग्वालियर हाईवे स्थित गांव बाद के रहने वाले रिटायर्ड बैंक कर्मचारी कुशलपाल चाहर ने समाज के लिए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने रिटायर्डमेंट पर मिले फंड और जीवनभर की बचत को अपने खेत पर व्यायामशाला एवं मंदिर बनवाने में लगा दी। आज उनकी व्यायामशाला में करीब 80 युवा निशुल्क पहलवानी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। नेशनल पदक विजेता बनी पहलवान गामिनी चाहर भी इसी अखाड़े की देन हैं।
उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई स्वर्गीय लोटन पहलवान अच्छे पहलवान थे, उनका सपना था कि बच्चों को निशुल्क सुविधा मिलनी चाहिए। मजबूत शरीर और अनुशासित जीवन ही युवाओं को सफलता की राह पर आगे बढ़ाता है। कुशलपाल सिंह ने बताया कि यहां तैयारी करने वाले कई पहलवान नेशनल और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। व्यायाम शाला के कोच राणा पहलवान ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों में भी पहलवानी का उत्साह देखने को मिल रहा है।
इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए गांव जारूआ कटरा के निवासी रविंद्र पहलवान ने भी अपने खेत पर करीब 8 साल पहले बनखंडी नाम से व्यायाम शाला तैयार की है, जिसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों लडके और लड़कियां पहलवानी के दांवपेच के गुर सीखते हैं। वह खुद एक पहलवान रह चुके हैं। रविंद्र पहलवान ने अपने संसाधनों से यह पहल शुरू की, उनका कहना है कि भले ही वे अपना सपना पूरा न कर सके, लेकिन अब वे क्षेत्र के युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए समर्पित हैं। दूर-दूर से खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। नेशनल पदक विजेता पहलवान गामिनी चाहर और सौरभ पहलवान जैसे कई पहलवान यहीं तैयारी कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई स्वर्गीय लोटन पहलवान अच्छे पहलवान थे, उनका सपना था कि बच्चों को निशुल्क सुविधा मिलनी चाहिए। मजबूत शरीर और अनुशासित जीवन ही युवाओं को सफलता की राह पर आगे बढ़ाता है। कुशलपाल सिंह ने बताया कि यहां तैयारी करने वाले कई पहलवान नेशनल और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। व्यायाम शाला के कोच राणा पहलवान ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों में भी पहलवानी का उत्साह देखने को मिल रहा है।
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इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए गांव जारूआ कटरा के निवासी रविंद्र पहलवान ने भी अपने खेत पर करीब 8 साल पहले बनखंडी नाम से व्यायाम शाला तैयार की है, जिसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों लडके और लड़कियां पहलवानी के दांवपेच के गुर सीखते हैं। वह खुद एक पहलवान रह चुके हैं। रविंद्र पहलवान ने अपने संसाधनों से यह पहल शुरू की, उनका कहना है कि भले ही वे अपना सपना पूरा न कर सके, लेकिन अब वे क्षेत्र के युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए समर्पित हैं। दूर-दूर से खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। नेशनल पदक विजेता पहलवान गामिनी चाहर और सौरभ पहलवान जैसे कई पहलवान यहीं तैयारी कर रहे हैं।
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