विश्व पर्यावरण दिवस: गजरौली, खुर्जा, नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों से ज्यादा है आगरा में प्रदूषण
गजरौला, नोएडा, गाजियाबाद, खुर्जा, साहिबाबाद जैसे औद्योगिक इलाके, जहां बड़ी-बड़ी फैक्टरियां धुआं उगल रही हैं, इन इलाकों से ज्यादा ताजनगरी में प्रदूषण है, जबकि यहां बड़ी फैक्टरियों पर प्रतिबंध है।
विस्तार
ताजनगरी के पर्यावरण में घुला जहर
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स अप्रैल के माह में बोदला आवासीय क्षेत्र में 174 और नुनिहाई के संवेदनशील क्षेत्र में 249 रहा। इनमें सबसे ज्यादा धूल और सूक्ष्म कण 2.5 कणों की मात्रा रही।
सल्फर डाइ ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइड की मात्रा यहां कम थी, लेकिन प्रदेश के अन्य औद्योगिक शहरों से ज्यादा है। आवासीय क्षेत्र में प्रदूषण स्तर और कम होना चाहिए था, लेकिन प्रदेश के सभी औद्योगिक क्षेत्रों से ज्यादा प्रदूषण आगरा के मोहल्लों, कॉलोनियों में निकला।
शहर औद्योगिक क्षेत्र एक्यूआई
लखनऊ तालकटोरा 221
कानपुर पनकी-2 152
गजरौला रौनक ऑटो 137
गाजियाबाद साहिबाबाद 211
खुर्जा सीजीसीआरआई 195
नोएडा जेपी इलेक्ट्रोप्लेटिंग 232
वाराणसी चांदपुर 213
9.38 वर्ग किमी हरियाली हो गई कम
ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में पेड़ काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति चाहिए लेकिन इतनी सख्ती के बाद भी ताजनगरी का हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) घट गया। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में आगरा का हरित क्षेत्र 9.38 वर्ग किमी घटा। वर्ष 2017 की रिपोर्ट में हरित क्षेत्र 272 वर्ग किमी था, जो 2019 में घटकर 262.62 वर्ग किमी रह गया। खुले जंगल में 9.06 वर्ग किमी और मध्यम घनत्व वाले जंगल में 0.32 वर्ग किमी की कमी पाई गई।
साल हरित क्षेत्र किमी
2011 6.85% 276
2013 6.78% 273
2015 6.75% 273
2017 6.73% 272
2019 6.69% 262.6
केवल कागजों पर काम हो रहा
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी के बाद भी आगरा की हवा में सुधार नहीं हो रहा। स्पष्ट है कि अधिकारी केवल कागजों पर काम कर रहे हैं। कागजों पर एयर एक्शन प्लान बनाया, पर लागू नहीं किया। सबसे ज्यादा प्रदूषण सरकारी विभाग ही कर रहे हैं।
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य उमेश शर्मा ने बताया कि मैं पहले से कहता रहा हूं कि आगरा में फैक्टरियों का प्रदूषण नहीं है। वाहनों से उड़ती धूल और बेतरतीब खोदाई के कारण यहां हवा की गुणवत्ता खराब है। बारिश में कैसे शहर सबसे अच्छी एक्यूआई में आता है। गंभीर उपाय अपनाए जाएं ताकि पर्यावरण सुधर सके।
वाहनों से दूषित हो रही है हवा
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य केशो मेहरा ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों और साइड पटरियों पर धूल जमा होने से हो रहा है। इन पर काम की जरूरत है। आगरा के उद्योग प्रदूषण नहीं फैला रहे। जहां ओरेंज कैटेगरी के उद्योग लगे हैं, वहां प्रदूषण आगरा से कम है, जबकि यहां व्हाइट कैटेगरी के उद्योग ही हैं।